आज के समय में फाइनेंशियल समस्या कब किसके सामने आ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. ज्यादातर मामलों में मिडिल क्लास लोन के जरिए इस समस्या का समाधान ढूंढता है. इससे एक तनाव से तो बच जाते हैं, पर दूसरी टेंशन शुरू हो जाती है. लोन देने के बाद बैंकों या एनबीएफसी के रिकवरी एजेंट दिन का चैन और रातों की नींद उड़ा देते हैं. कई मामले तो ऐसे भी सामने आए हैं, जिसमें ये एजेंट घर आकर बदतमीजी के साथ बदनाम करने की धमकी दे डालते हैं. ऐसे में अगर आप भी ऐसे तनाव का सामना कर रहे हैं तो सबसे पहले डरना बंद कीजिए. देश के रिजर्व बैंक ने इस स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बहुत कड़े नियम बनाए हैं, जिन्हें हर कर्जदार को जानना जरूरी है. इस खबर में आपको बताते हैं कि रिकवरी एजेंट क्या नहीं कर सकते और धमकी मिलने के मामले में आपके पास क्या 5 बड़े राइट हैं.
क्या हैं आरबीआई के 3 नियम?
- धमकाने या डराने पर आरबीआई ने कहा है कि कोई भी रिकवरी एजेंट किसी ग्राहक को डरा या धमका नहीं सकता है. साथ ही सोशल मीडिया पर बदनाम करने या फिर घर के बाहर हंगामा करना गैरकानूनी है.
- प्राइवेसी के लिए एजेंट को आपके लोन की जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रखनी होगी. मतलब लोन लेने वाले व्यक्ति के माता-पिता, पति या पत्नी के साथ पड़ोसियों को फोन करके कर्ज के बारे में नहीं बता सकते.
- आरबीआई ने साफ कहा है कि एजेंट आधी रात के समय फोन नहीं कर सकते हैं. सुबह 8 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक ही लोन लेने वाले व्यक्ति से संपर्क किया जा सकता है.
तो ये वो 3 नियम हैं जो आरबीआई ने लोन एजेंट के लिए तय किए हैं. यानी कर्जदार की समस्याओं को देखते हुए रिजर्व बैंक ने हर स्थिति साफ की है. अब बात आती है कि ये नियम तो बन गए पर कोई एजेंट अगर इन नियमों का पालन ना करे तो फिर कर्जदार के पास क्या ऑप्शन हैं.
1. ज्यादा से ज्यादा सबूत जुटाएं
जब भी किसी रिकवरी एजेंट का फोन आए तो सबसे पहले उसकी कॉल रिकॉर्डिंग स्टार्ट कर दें. साथ ही धमकी भरे मैसेज, चैट और ईमेल का स्क्रीनशॉट को संभाल कर रखें. एजेंट किस दिन, किस समय और किस नंबर से फोन कर रहा है, इसका पूरा डेटा बनाकर रखें. ये सभी सबूत आगे कोर्ट केस या फिर लीगल एक्शन में आपकी मदद कर सकते हैं.
2. आईडी कार्ड की जांच करें
एजेंट घर आकर आपके साथ बदतमीजी करता है तो सबसे पहले उसका ऑफिशियल आईडी कार्ड या फिर बैंक का अथॉराइजेशन लेटर चेक करें. अगर एजेंट असली होगा तो तुरंत आपको ये दिखा देगा. अगर वो ना दिखाएं तो फिर उनसे कोई भी जानकारी साझा ना करें.
3. बैंक को मामले से अवगत कराएं
अगर एजेंट कई बार मना करने के बाद भी लगातार परेशान कर रहा है तो सबूतों के साथ अपने बैंक या फिर फाइनेंशइयल इस्टीट्यूशन की ब्रांच में इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराएं.
4. बैंक के बाद आरबीआई की लें मदद
बैंक में शिकायत करने के बाद करीब 30 दिन का इंतजार करें. अगर मामले में बैंक कोई कदम नहीं उठाता है तो फिर आप सीधे रिजर्व बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आरबीआई लोकपाल के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं. पिछली हिस्ट्री को देखें तो आरबीआई ऐसे मामलों में बैंकों पर बड़ा जुर्माना लगाता है.
5. पुलिस की मदद कब लें?
अगर मान लीजिए एजेंट धमकी देने के साथ मारपीट या फिर घर में जबरन घुसते हैं तो फिर तुरंत इसकी जानकारी पास के थाने में दें. फिर बैंक या आरबीआई के फैसले का इंतजार ना करें. पुलिस स्टेशन में जाकर एफआईआर दर्ज कराएं. इसके साथ ही मानहानि या फिर मानसिक परेशानी के लिए कंज्यूमर कोर्ट भी जा सकते हैं.
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