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RBI Rules for Loan Recovery: 'वसूली भाई' पर RBI की सख्‍ती, लोन रिकवरी अब 'तमीज' से, दादागीरी नहीं चलेगी, बेवक्‍त कॉल की भी मनाही!

RBI के DRAFT RULES के अनुसार, वसूली भाई यानी लोन रिकवरी एजेंट की हर हरकत के लिए बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा. हर नोटिस पर शिकायत अधिकारी का नाम और नंबर देना अनिवार्य होगा.

RBI Rules for Loan Recovery: 'वसूली भाई' पर RBI की सख्‍ती, लोन रिकवरी अब 'तमीज' से, दादागीरी नहीं चलेगी, बेवक्‍त कॉल की भी मनाही!
Loan recovery rules: केंद्रीय बैंक ने रिकवरी एजेंट्स पर सख्‍ती के लिए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं

अगर किसी ने बैंक से लोन लिया है और किसी वजह से किस्‍त (EMI) चुकाने में देरी हो गई है, तो अब रिकवरी एजेंट उनसे बदतमीजी नहीं करेंगे. सबके सामने उनकी इज्‍जत नहीं उछालेंगे. लोन एजेंट को बस आराम से समझाने और टाइम से किस्‍त भरने की रिक्‍वेस्‍ट करने की अनुमति होगी. वे न तो डराएंगे, न धमकाएंगे और न ही धमकी भरे कॉल कर पाएंगे. कॉल करेंगे भी तो ये नहीं कि जब मन किया, घुमा दिया फोन और धमकाने लगे. रिकवरी एजेंट शाम 7 बजे के बाद कॉल नहीं कर सकेंगे. ऐसा इसलिए क्‍योंकि लोन वसूली के नियमों को 'मानवीय' बनाने के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं. 

दरअसल, केंद्रीय बैंक RBI ने बैंकों की ओर से लोन वसूली के लिए रिकवरी एजेंट्स की नियुक्ति और व्‍यवहार संबंधित नियमों को सख्‍त करने की दिशा में कदम उठाया है. RBI ने कर्जदारों का शोषण, उत्‍पीड़न रोकने के लिए RBI (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Second Amendment Directions, 2026 शीर्षक से एक ड्राफ्ट जारी किया  है. 

बीते 1 फरवरी को बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोन वसूली प्रक्रियाओं में प्रस्तावित सुधारों की घोषणा की थी, जिसके बाद RBI का ये ड्राफ्ट सामने आया है. वसूली की इस नई 'मर्यादा' में आपके लिए क्या-क्या बदला है, आइए इसे सरल भाषा में समझ लेते हैं.   

अब 'वसूली  भाई' नहीं, 'सर्टिफाइड' एजेंट आएंगे घर

अब बैंक किसी भी ऐरे-गैरे व्यक्ति को आपके घर वसूली के लिए नहीं भेज पाएंगे. वे प्रॉपर ट्रेंड होंगे. हर रिकवरी एजेंट के पास IIBF (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस) का सर्टिफिकेट होना अनिवार्य होगा.

बैकग्राउंड चेक और पहचान को लेकर भी नियमों का प्रस्‍ताव है. बैंकों को एजेंट नियुक्त करने से पहले उनका पूरा बैकग्राउंड चेक (Due Diligence) करना होगा. बैंक को अपनी वेबसाइट और ऐप पर अधिकृत एजेंटों की पूरी लिस्ट डालनी होगी. ऐसे में आप तुरंत चेक कर पाएंगे कि आपके दरवाजे पर खड़ा व्यक्ति असली है या फर्जी.

खुशियों में खलल डाला, तो खैर नहीं!

अक्सर देखा जाता था कि रिकवरी एजेंट त्योहारों या शादी-ब्याह के मौके पर पहुंचकर तमाशा करते थे. अब RBI ने इस पर 'लक्ष्मण रेखा' खींच दी है. 

  • शादी या गम का मौका: शादी, त्यौहार या परिवार में किसी की मृत्यु जैसे संवेदनशील मौकों पर एजेंट आपको परेशान नहीं कर सकेंगे.
  • धमकी, गाली-गलौज पर पाबंदी: एजेंट अभद्र भाषा, धमकी या डराने-धमकाने वाले हथकंडे नहीं अपना सकते.
  • सोशल मीडिया हैरेसमेंट: सोशल मीडिया पर मैसेज भेजकर या बार-बार कॉल करके परेशान करना अब 'क्रूर व्यवहार' माना जाएगा.

शिकायत पेंडिंग, तो वसूली पर ब्रेक

लोन लेने वालों के लिए ये सबसे बड़ा और राहत देने वाला बदलाव होगा. अगर आपने किसी एजेंट की बदतमीजी के खिलाफ बैंक में शिकायत की है और उसकी जांच चल रही है, तो जब तक शिकायत का निपटारा नहीं हो जाता, बैंक आपसे वसूली की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा सकता. एजेंट की हर हरकत के लिए बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा. हर नोटिस पर शिकायत अधिकारी का नाम और नंबर देना अनिवार्य होगा.

एजेंट बदलते ही तुरंत मिलेगा SMS

वसूली के खेल में 'सरप्राइज विजिट' को खत्म करने के लिए RBI ने नियम बनाया है कि अगर बैंक आपके केस के लिए एजेंट बदलता है, तो इसकी जानकारी आपको तुरंत SMS या ईमेल के जरिए देनी होगी. बिना सूचना दिए नया एजेंट आपके पास नहीं आ सकता.

बैंक अक्सर लोन के साथ इंश्योरेंस, क्रेडिट कार्ड या इन्वेस्टमेंट प्लान लेने का दबाव बनाते हैं. अब नए नियमों के तहत आपकी स्पष्ट सहमति (Explicit Consent) के बिना बैंक आपको कोई भी एड-ऑन प्रोडक्ट 'चिपका' नहीं पाएगा.

अगर कोई एजेंट आपको परेशान करता है, तो आप बैंक के 'ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म' (शिकायत निवारण तंत्र) का सहारा लिया जा सकेगा. लोन वसूलना बैंक का अधिकार है, लेकिन कर्जदार की गरिमा (Dignity) को ठेस पहुंचाने की आजादी नहीं रहेगी. 

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