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'भरोसे को रिवॉर्ड क्‍यों नहीं', दुनिया हंसती रही पर इसी विचार से कुणाल शाह ने Cred बना रच दिया इतिहास

कुणाल शाह की कंपनी 'क्रेड' (Cred), जिसकी शुरुआत 2018 में हुई थी, ने 3,200 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल किया और मेटा (Meta) से 900 मिलियन डॉलर जुटाए हैं. इस कहानी के पीछे उनका एक यूनीक विचार रहा है.

'भरोसे को रिवॉर्ड क्‍यों नहीं', दुनिया हंसती रही पर इसी विचार से कुणाल शाह ने Cred बना रच दिया इतिहास
'ट्रस्ट' के रिवॉर्ड से वॉट्सऐप के ग्लोबल हेड बनने तक, कुणाल शाह की नई छलांग
Source: NDTV Graphics/Canva

Kunal Shah, The Cred Story:  साल था 2015, कुणाल शाह अपना पहला बड़ा स्‍टार्टअप 'फ्रीचार्ज' (FreeCharge) को अलविदा कह चुके थे. मोबाइल, DTH रिचार्ज, बिजली-पानी बिल पेमेंट, ऑनलाइन शॉपिंग वगैरह पर डिस्काउंट कूपन देने वाली कंपनी फ्रीचार्ज लोगों के बीच खूब पॉपुलर थी. 2017 में इसे एक्सिस बैंक ने खरीद लिया. टेक जगत देख रहा था कि कुणाल आखिर फ्रीचार्ज छोड़ कहां गायब हो गए और आगे क्‍या करेंगे. इधर, कुणाल कुछ वक्त तक शांत रहे. बाजार को समझा. थोड़ा बहुत निवेश वगैरह किया. इस बीच मन में एक सवाल कौंधता रहा- 'आखिर समाज में ईमानदारी और भरोसे (Trust) को रिवॉर्ड क्यों नहीं दिया जा सकता?'

इसी एक विचार ने Cred को जन्‍म दिया. उनके पास करीब 1 मिलियन डॉलर की अपनी पर्सनल पूंजी थी, जिसके साथ उन्होंने 2018 में 'क्रेड' (CRED) की नींव रखी. मकसद साफ था- समय पर क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने वाले 'अच्छे नागरिकों' की एक फैमिली बनाना.  क्रेड ने लोगों को कैशबैक और कूपन्‍स देना शुरू किया. लोगों के लिए ये नया अनुभव था. वो किसी भी बैंक का क्रेडट कार्ड बिल भरते थे, बदले में क्रेड उन्‍हें पैसे दे रहा था. 

लोग हंसते थे, पूछते थे- बिजनेस मॉडल क्‍या है भई?

शुरुआती सालों में आलोचक अक्सर हंसते थे और पूछते थे, 'क्रेड का बिजनेस मॉडल क्या है?' लेकिन कुणाल शाह खु को लीक से हटकर सोचने वाले उद्यमी बताते हैं. उन्हें लोगों के तानों या सवालों ने परेशान नहीं किया. साल 2019 से 2025 के बीच, जब दुनिया कोविड-19 के लॉकडाउन से जूझ रही थी, कुणाल और उनकी टीम ने चुपचाप नए प्रोडक्ट्स की झड़ी लगा दी. 

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Photo Credit: NDTV Graphics

एक विज्ञापन और जबरदस्‍त मार्केटिंग 

सिर्फ इंदिरा नगर के 'गुंडों' (राहुल द्रविड़) वाले क्रिएटिव विज्ञापनों से आईपीएल के दौरान सुर्खियां बटोरीं. आपको शायद याद भी हो! दरअसल, जैसा कि राहुल द्रविड़ को क्रिकेट जगत में उनकी शांत, गंभीर और बेहद शालीन छवि के लिए जाना जाता है, लेकिन इस विज्ञापन में उन्‍हें बेंगलुरु के भारी ट्रैफिक में फंसा हुआ दिखाया गया. वे गुस्से में चिल्लाते हैं, गाड़ी का साइड मिरर तोड़ते हैं, और हाथ में बल्ला लेकर गाड़ी की रूफ से बाहर निकलकर कहते हैं- 'इंदिरा नगर का गुंडा हूं मैं!'

इस पूरे विज्ञापन का आइडिया ये था कि कुछ चीजें इतनी अविश्वसनीय होती हैं कि उन पर भरोसा करना मुश्किल होता है. विज्ञापन के अंत में क्रेड के मुख्य फीचर को जोड़ा गया- 'क्रेड पर क्रेड कॉइंस का इस्तेमाल करना उतना ही अविश्वसनीय है, जितना राहुल द्रविड़ का गुस्सा होना.'

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ये विज्ञापन आते ही भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली ने ट्वीट किया, 'राहुल भाई का ये रूप कभी नहीं देखा. इसके बाद तो ये एड इतना वायरल हुआ कि 'इंदिरा नगर का गुंडा' लाइन एक कल्ट मीम बन गई. 

फिलहाल मुख्‍य कहानी पर लौटते हैं.  

सालाना रेवेन्‍यू 3,200 करोड़ के पार, उपलब्धियों की झड़ी

विज्ञापनों के जरिये क्रेड लोकप्रिय होता चला गया. सालाना रेवेन्यू को करीब 3,200 करोड़ रुपये (~$325M) तक पहुंचा दिया. पेमेंट्स, लेंडिंग, इंश्योरेंस और वेल्थ मैनेजमेंट सेक्‍टर्स में पैर पसारते हुए क्रेड ने 1.7 करोड़ से अधिक मेंबर्स जोड़ लिए. साल 2026 कुणाल के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ है. 

इस साल क्रेड ने न केवल अपना पहला मुनाफे वाला तिमाही (Profitable Quarter) दर्ज किया, बल्कि हाल ही में टेक दिग्गज 'मेटा प्लेटफॉर्म्स' (Meta Platforms) से सीरीज एच (Series H) राउंड में 900 मिलियन डॉलर (लगभग 8,550 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम निवेश हासिल किया. 

इस सफर के दौरान कुणाल ने सिर्फ एक सफल बिजनेस ही नहीं बनाया, बल्कि खुद में भी बड़ा बदलाव करते हुए 35 किलो वजन घटाया और पांच बार ESOP Buyback करके अपनी टीम को भी अमीर बनाया. 

कहानी में अब आया है असली ट्विस्ट  

कुणाल शाह ने घोषणा की है कि वे क्रेड में सीईओ की अपनी ऑपरेटिंग भूमिका से पीछे हट रहे हैं। उनकी जगह मितेन संपत अंतरिम सीईओ का पद संभालेंगे. कुणाल अब सिलिकॉन वैली और वैश्विक टेक जगत के सबसे बड़े मंचों में से एक पर कदम रख रहे हैं. मेटा ने इन्‍वेस्‍टमेंट डील के तहत कुणाल शाह को वॉट्सऐप (WhatsApp) का नया ग्लोबल हेड नियुक्त किया है. वे विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्होंने पिछले 7 वर्षों से वॉट्सऐप लीड कर रहे हैं. 

मेटा (Meta) क्रेड में एक माइनॉरिटी इन्वेस्टर के रूप में शामिल हुई है और कुणाल ने साफ किया है कि मेंबर्स का डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और मेटा की उस तक कोई पहुंच नहीं होगी.

लिंक्डइन पर अपनी इस नई पारी की शुरुआत करते हुए कुणाल ने लिखा, 'आज के वॉट्सऐप और इसकी वास्तविक क्षमता (Full Potential) के बीच का फासला बहुत बड़ा है.'

मार्क जुकरबर्ग और क्रिस कॉक्स जैसे दिग्गजों के साथ काम करने के लिए उत्साहित कुणाल शाह अब भारत के स्टार्टअप ईकोसिस्टम से निकलकर दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप की नई दिशा तय करने के लिए तैयार हैं. 

ये तो हो गई कुणाल शाह की मेहनत, लगन और कामयाबी की कहानी, लेकिन इस कहानी का एक स्‍याह पक्ष भी है, जो कि आपको आपके अपने डिजिटल मीडिया प्‍लेटफॉर्म NDTV की वेबसाइट पर बिजनेस सेक्‍शन में ही मिलेगी. 

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