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Gold Investment Strategy: ट्रंप के बयान से सोने में तेजी कहीं खतरा तो नहीं? 2 एक्‍सपर्ट ने आसानी से समझा दिया

Gold Investment Strategy: जनवरी 2026 में सोने की कीमत सबसे ज्यादा लगभग 5,626 डॉलर प्रति औंस थी, जहां से अब तक करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है.

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Gold price news 2026: हाल ही में सोने की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला, जब इसकी कीमत 4,550 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई. एक ही दिन में करीब 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने सभी को चौंका दिया. इस तेजी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की अफवाहें रहीं. जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया कि ईरान ने ऊर्जा सप्लाई से जुड़ा एक 'प्रपोजल' दिया है, तो निवेशकों का भरोसा फिर से सोने की ओर बढ़ा. इससे पहले लगातार गिरावट के बाद ट्रेडर्स ने अचानक अपना रुख बदल लिया था और सोने में खरीदारी शुरू कर दी थी.

हालांकि, यह तेजी देखने में पॉजिटिव लगती है, लेकिन अगर बड़ी तस्वीर पर नजर डालें तो स्थिति अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं है. जनवरी 2026 में सोने की कीमत सबसे ज्यादा लगभग 5,626 डॉलर प्रति औंस थी, जहां से अब तक करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है. इस गिरावट ने निवेशकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले असली कारण क्या हैं.

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बेंगलुरू के स्टैटिजिक्ट नवीन PMT का मानना है कि मौजूदा उछाल असली भरोसे से ज्यादा खबरों के असर का नतीजा है. एक्सपर्ट की मानें तो बाजार इस समय 'युद्ध के डर' से 'शांति की उम्मीद' की ओर बढ़ रहा है. पहले जहां निवेशक तनाव के चलते सोना खरीद रहे थे.वहीं, अब शांति की उम्मीद ने भी कीमतों को बढ़ा दिया है. यह स्थिति थोड़ी असामान्य है क्योंकि आमतौर पर शांति की खबरें सोने की कीमतों को नीचे लाती हैं. इस बार उल्टा हो रहा है.

इस तेजी का एक बड़ा कारण शॉर्ट कवरिंग भी है यानी जिन निवेशकों ने सोने के गिरने पर दांव लगाया था. वे अब अपने सौदे बंद कर रहे हैं, जिससे कीमतें ऊपर जा रही हैं. इसके अलावा, तेल की कीमतों को लेकर चिंता कम होना और डॉलर के कमजोर होने की संभावना भी सोने को सपोर्ट दे रही है. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर सोना 4,600 डॉलर के ऊपर टिकता है, तो यह स्थिरता का संकेत हो सकता है, वरना कीमत फिर गिरकर 4,100 डॉलर तक जा सकती है.

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वहीं, ऑगमॉन्ट में रिसर्च हेड डॉ रेनिशा चैनानी के मुताबिक आमतौर पर राजनीतिक तनाव में सोना बढ़ता है, लेकिन इस बार निवेशक कैश जुटाने के लिए सोना भी बेच रहे हैं. इसे लिक्विडिटी प्रेशर कहा जाता है. इसके साथ ही बढ़ती महंगाई और ऊंची ब्याज दरें भी सोने पर दबाव बना रही हैं, क्योंकि इससे रियल यील्ड बढ़ती है और सोना कम आकर्षक हो जाता है.

हालांकि, हाल के समय में सेंट्रल बैंकों की खरीद थोड़ी धीमी दिख रही है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल एक अस्थायी ठहराव है. पिछले दो सालों में भारी खरीदारी के बाद यह एक सामान्य प्रक्रिया है. सेंट्रल बैंक अब भी लंबे समय के लिए सोने को एक सुरक्षित निवेश मानते हैं, खासकर डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए.

भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं बल्कि परंपरा और सुरक्षा का भी प्रतीक है. यहां लोग इसे बचत, जरूरत के समय सहारा और परंपरा के रूप में देखते हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, भले ही कुछ समय के लिए सोने में उतार-चढ़ाव रहे, लेकिन लंबे समय में यह अब भी एक मजबूत सुरक्षा कवच बना रहेगा.

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