Consumer Price Index Inflation Data March 2026: मिडिल ईस्ट में जियो-पॉलिटिकल टेंशन कम नहीं हो रही और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से सप्लाई चेन प्रभावित है. इस बीच मार्च में महंगाई भी बढ़ी है. हरी सब्जियां मार्च में महंगी हुई हैं, जबकि आलु-प्याज-लहसुन सस्ते हुए हैं. ये जानकारी सोमवार को जारी हुए खुदरा महंगाई के आंकड़े में सामने आई है. सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) ने सोमवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई के आंकड़े जारी किए, जिसके अनुसार मार्च में महंगाई 3.40% बढ़ी है, जो पिछले महीने की तुलना में बहुत थोड़ी ज्यादा है. फरवरी में ये आंकड़ा 3.21% रहा था.
महंगाई बढ़ी पर कंट्रोल लाइन से नीचे
खुदरा महंगाई बढ़ी तो है, फिर भी ये बहुत चिंता वाली बात नहीं है, क्योंकि अभी भी ये केंद्रीय बैंक RBI के महंगाई लक्ष्य 4% से नीचे है. रॉयटर्स के मुताबिक, 45 अर्थशास्त्रियों ने पोल में अनुमान लगाया था कि महंगाई दर आंशिक रूप से बढ़ कर 3.48 फीसदी तक जा सकती है, और आंकड़ा भी करीब आसपास ही रहा. दूसरी ओर ये ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्रियों के अनुमान के भी आसपास ही है. पिछले महीने (फरवरी) में महंगाई 3.21% पर थी. इस मामूली बढ़त के बावजूद, खुदरा महंगाई RBI के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य के भीतर बनी हुई है.
खाद्य महंगाई में उछाल
मार्च में खाद्य महंगाई (Food Inflation) बढ़कर 3.87% हो गई, जो फरवरी में 3.47% थी. खाद्य और पेय पदार्थ सेगमेंट (Food & Beverages segment) के लिए ये दर 3.71% रही. कोर इन्फ्लेशन की बात करें तो खाद्य और ईंधन की अस्थिर कीमतों को छोड़कर रहने वाली 'कोर इन्फ्लेशन' 3.3% पर स्थिर रही.
शहरी महंगाई फरवरी के 3.02% से बढ़कर 3.11% हो गई. इसी तरह, ग्रामीण महंगाई भी फरवरी के 3.37% से बढ़कर मार्च में 3.63% पर पहुंच गई.
किन चीजों के दाम बढ़े और घटे?
वस्तुओं और सब्जियों की टोकरी में कीमतों में सबसे अधिक उछाल इन चीजों में देखा गया.
- चांदी के आभूषण: 148.61%
- सोना/हीरा/प्लैटिनम ज्वेलरी: 45.92%
- नारियल: 45.52%
- टमाटर: 35.99%
- फूलगोभी: 34.11%
वहीं दूसरी ओर, मार्च के दौरान लहसुन, प्याज, आलू, अरहर (तुअर) दाल और लीची की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. आवास, पानी, बिजली, गैस और अन्य ईंधन की कीमतें 1.97% पर रहीं. वहीं कपड़े और जूतों की महंगाई 2.75% दर्ज की गई, जबकि पान और तंबाकू जैसे नशीले पदार्थों की कीमतें 4.23% रहीं.
ये भी पढ़ें: New Labour Code लागू होता तो नोएडा में नहीं होता मजदूरों का बवाल, समझिए कैसे ये कानून है 'रामबाण' इलाज
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं