विज्ञापन

Online Scam में भी मिल सकता है आपका पैसा वापस, जानिए क्या है ये तरीका

Reserve Bank of India के नियमों के अनुसार, किसी भी ट्रांजैक्शन के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए आपके पास अधिकतम 120 दिनों का समय होता है.

Online Scam में भी मिल सकता है आपका पैसा वापस, जानिए क्या है ये तरीका
चार्जबैक क्या है और कब काम आता है?

आज के समय में ऑनलाइन शॉपिंग जितनी आसान हो गई है, उतनी ही तेजी से ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी बढ़ रहे हैं. कई लोग अनजाने में फर्जी वेबसाइट, नकली ऑफर या धोखाधड़ी वाले लिंक का शिकार हो जाते हैं. लेकिन राहत की बात यह है कि अगर समय रहते सही कदम उठाए जाएं, तो खोया हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना खत्म नहीं होती.

बैंकों ने इसके लिए एक खास प्रक्रिया बनाई है, जिसे 'चार्जबैक' कहा जाता है. यह प्रक्रिया ग्राहकों को कुछ शर्तों के तहत अपने पैसे को वापस पाने का मौका देती है. इसमें सबसे अहम भूमिका होती है समय पर रिपोर्ट करना, सही जानकारी देना और तय नियमों का पालन करना.

Latest and Breaking News on NDTV

चार्जबैक क्या है और कब काम आता है?

चार्जबैक एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें आपका बैंक व्यापारी, बैंक से संपर्क करके ट्रांजैक्शन को रिवर्स करने की कोशिश करता है. यह सुविधा हर मामले में नहीं, बल्कि कुछ खास स्थितियों में लागू होती है. जैसे अगर आपके बिना अनुमति के आपके कार्ड से पेमेंट हो जाए, आपने पैसे दे दिए लेकिन प्रोडक्ट या सेवा नहीं मिली, या जो सामान मिला वह वादे के मुताबिक नहीं है तो आप चार्जबैक की रिक्वेस्ट कर सकते हैं. 

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ने आपके कार्ड की जानकारी का गलत इस्तेमाल किया या आपने कोई सामान खरीदा लेकिन वह कभी डिलीवर ही नहीं हुआ, तो यह चार्जबैक के तहत आता है. इसी तरह अगर आपको नकली या गलत प्रोडक्ट मिला है, तो भी आप शिकायत कर सकते हैं.

पैसा वापस पाने के लिए क्या करें?

अगर आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड हुआ है, तो सबसे पहला कदम है तुरंत अपने बैंक की हेल्पलाइन पर संपर्क करना और ट्रांजैक्शन को 'डिस्प्यूट' यानी विवादित बताना. 

आजकल ज्यादातर बैंक यह सुविधा फोन, मोबाइल ऐप या ब्रांच विजिट के जरिए देते हैं. शिकायत दर्ज करते समय यह सुनिश्चित करें कि आपको एक सर्विस रिक्वेस्ट नंबर (SRN) मिले, क्योंकि यही आपकी शिकायत का सबूत होता है. 

इसके बाद आपको एक चार्जबैक या डिस्प्यूट फॉर्म भरना होता है, जिसमें ट्रांजैक्शन की पूरी जानकारी देनी होती है जैसे तारीख, राशि, व्यापारी का नाम और शिकायत का कारण. 

इसके साथ आपको जरूरी सबूत भी जमा करने होते हैं, जैसे स्क्रीनशॉट, पेमेंट रसीद, ईमेल या ऑर्डर कन्फर्मेशन. यह सबूत आपके केस को मजबूत बनाते हैं और बैंक को जांच में मदद करते हैं. फॉर्म जमा होने के बाद बैंक जांच शुरू करता है और व्यापारी के बैंक से संपर्क करता है. यह प्रक्रिया कुछ हफ्तों तक चल सकती है, जो केस और सबूतों पर निर्भर करती है.

ChatGPT का नया फीचर जो बचा सकता है जान, खतरा महसूस होते ही आपके परिवार को करेगा अलर्ट

RBI के नियम

Reserve Bank of India के नियमों के अनुसार, किसी भी ट्रांजैक्शन के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए आपके पास अधिकतम 120 दिनों का समय होता है. अगर आप इस समय सीमा के बाद शिकायत करते हैं, तो पैसा वापस मिलने की संभावना कम हो जाती है. इसलिए जितना जल्दी हो सके, शिकायत करना जरूरी है. जल्दी रिपोर्ट करने से बैंक आगे होने वाले किसी भी गलत इस्तेमाल को रोक सकता है और तेजी से कार्रवाई शुरू कर सकता है.

साइबर फ्रॉड की शिकायत कहां करें?

बैंक को जानकारी देने के साथ-साथ साइबर फ्रॉड की शिकायत करना भी जरूरी है. इसके लिए आप 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं या सरकारी पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर शिकायत दर्ज कर सकते हैं. जल्दी रिपोर्ट करने से कई बार फ्रॉड ट्रांजैक्शन को फ्रीज किया जा सकता है, जिससे पैसा निकलने से पहले ही रोका जा सकता है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com