INR vs USD: डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है.आज यानी 14 जुलाई, मंगलवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 48 पैसे टूटकर 96.16 पर पहुंच गया. सोमवार को रुपया 95.68 पर बंद हुआ था, यानी एक ही दिन में इसमें बड़ी गिरावट देखने को मिली. रुपये में यह कमजोरी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. लगातार तीसरी रात अमेरिका की ओर से ईरान पर हमले किए गए हैं, जिससे लोगों को डर है कि दोनों देशों के बीच बना युद्ध विराम टूट सकता है.
इस वजह से पूरी दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है और तेल की कीमतों में तेजी आ गई है. इसके साथ ही निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के लिए अमेरिकी डॉलर खरीदना शुरू कर दिया, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और रुपये पर दबाव बढ़ गया.
कच्चे तेल की तेजी भारत के लिए चिंता
ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 2 फीसदी बढ़कर 84.98 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया. होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के कारण बाजार में चिंता बढ़ी हुई है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है और इसका सीधा असर रुपये पर पड़ता है.
एक्सपर्ट की क्या है राय?
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के हेड ऑफ ट्रेजरी और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारत का आयात खर्च बढ़ेगा. इससे देश के व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा की स्थिति पर दबाव आता है, जिसका असर रुपये पर दिखाई दे रहा है.
कुछ समय पहले भारतीय रिजर्व बैंक के डॉलर इन्फ्लो बढ़ाने वाले कदमों की वजह से रुपया 94 के करीब तक मजबूत हुआ था. हालांकि उन कदमों से मिलने वाला पूरा फायदा अभी आना बाकी है, लेकिन इस बीच कच्चे तेल की कीमतें फिर बढ़ने लगी हैं. यही वजह है कि रुपये पर एक बार फिर दबाव लौट आया है.
क्या रुपया नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच सकता है?
फिलहाल रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.96 के काफी करीब पहुंच गया है, जो मई के बीच में दर्ज किया गया था. हालांकि बाजार के जानकारों का मानना है कि अभी जल्द ही रुपया नया रिकॉर्ड निचला स्तर नहीं छुएगा, क्योंकि जरूरत पड़ने पर भारतीय रिजर्व बैंक बाजार में दखल दे सकता है.
अमेरिका की ब्याज दरों का भी असर
इस बीच अमेरिका में सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी बढ़ी है. वहां महंगाई बढ़ने की चिंता के बीच फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने कहा है कि आने वाले समय में ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं. इससे अमेरिकी डॉलर को और मजबूती मिली है, जिसका असर रुपये समेत एशिया की कई करेंसी पर देखने को मिल रहा है.
डॉलर इंडेक्स फिलहाल 101.17 पर कारोबार कर रहा था. अब बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका और ईरान के बीच हालात और भारतीय रिजर्व बैंक के अगले कदम पर रहेगी. अगर कच्चा तेल महंगा बना रहता है और डॉलर मजबूत होता है, तो रुपये पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है.
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