मौजूदा समय में भारत का घरेलू निवेश माहौल एक अहम बदलाव के दौर से गुजर रहा है. लोग अब धीरे-धीरे फिक्स्ड डिपॉजिट और फिजिकल एसेट्स, जैसे- केवल सोना और जमीन से आगे बढ़कर कैपिटल मार्केट का रूख कर रहे हैं. भले ही देश में निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन Bain & Company और Groww की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की असली चुनौती अब निवेश शुरू कराना नहीं, बल्कि निवेशकों को लंबे समय तक टिकाए रखने की है, ताकि कंपाउंडिंग का फायदा मिल सके.
रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 25 में भारत की घरेलू संपत्ति 1,300-1,400 लाख करोड़ रुपये के बीच रही, जो पिछले पांच सालों में लगभग 13% की दर से बढ़ी है. इसमें से निवेश करने लायक फाइनेंशियल एसेट्स लगभग 35% हैं.
किस सेगमेंट पर ज्यादा फोकस?
मौजूदा समय में भारतीय निवेशक सबसे ज्यादा म्यूचुअल फंड और शेयर मार्केट में लिस्टेड कंपनियों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं. ये ग्रोथ के मामले में बैंक डिपॉजिट से भी आगे निकल गए हैं. इसके बावजूद इन्वेस्ट करने लायक संपत्ति का केवल 15-20% ही कैपिटल मार्केट में लगाया जाता है, जबकि अमेरिका और कनाडा जैसी विकसित देशों में यह आंकड़ा 50-60% है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच सालों के दौरान म्यूचुअल फंड में निवेश 5-6% से बढ़कर 10-11% हो गया है, जो लगभग दोगुना है. म्यूचुअल फंड का AUM अब लगभग 41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. हालांकि, Bain का अनुमान है कि 2047 तक 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को पाने के लिए म्यूचुअल फंड की पहुंच को 35% घरों तक ले जाना होगा और साथ ही कैपिटल मार्केट एसेट्स को GDP के करीब 80% तक पहुंचना होगा.
SIP की रही अहम भूमिका
सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को इस बदलाव की रीढ़ माना जा रहा है. पिछले एक दशक में SIP इंवेस्टमेंट्स लगभग 25% CAGR से बढ़े हैं और अब म्यूचुअल फंड AUM का लगभग 31% हिस्सा SIP से आता है. इस बीच औसत SIP अमाउंट लगभग 3,000 रुपये है, जो नए और छोटे निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है.
टेक्नोलॉजी ने बदला खेल
छोटे शहरों, ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी निवेश का दायरा फैल रहा है. नए SIP रजिस्ट्रेशन का 55-60% हिस्सा B30 शहरों से आ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लगभग आधे निवेशक टियर-2 और छोटे शहरों से हैं. Groww जैसे प्लेटफॉर्म्स की इसमें अहम भूमिका रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, 30 साल से कम उम्र के निवेशक NSE में रजिस्टर्ड निवेशकों का लगभग 40% हैं. Groww के को-फाउंडर और CEO हर्ष जैन के मुताबिक, 'अब निवेश तक पहुंच चुनौती नहीं है. मोबाइल ऐप्स, क्षेत्रीय भाषाओं और छोटे SIP ने रास्ता आसान कर दिया है. असली फोकस अब लॉन्ग टर्म निवेश की आदतें बनाने पर है.'
बेहतर रेगुलेशन से बदलेगी तस्वीर
रिटेल निवेशकों को डेरिवेटिव ट्रेडिंग में वित्त वर्ष 22 से वित्त वर्ष 24 के बीच 2.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. इसके बाद SEBI ने सख्त नियम लागू किए. Bain का मानना है कि इससे निवेशक लॉन्ग-टर्म और कम जोखिम वाली रणनीतियों की ओर बढ़ेंगे.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं