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Rupee Crash: रुपये में रिकॉर्ड गिरावट, डॉलर के मुकाबले 56 पैसे से ज्‍यादा टूटा, समझिए कैसे आप पर होगा सीधा असर

रुपया कमजोर होने और तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है. अगर लंबे समय तक स्थिति बनी रही तो पेट्रोल-डीजल और परिवहन की लागत बढ़ने से आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा.

Rupee Crash: रुपये में रिकॉर्ड गिरावट, डॉलर के मुकाबले 56 पैसे से ज्‍यादा टूटा, समझिए कैसे आप पर होगा सीधा असर
Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भीषण तेजी और मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर देखने को मिला है. सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 46 पैसे की भारी गिरावट के साथ 92.20 के स्तर पर खुला और थोड़ी ही देर में ये गिरावट और बढ़ गई. सुबह 9:50 बजे डॉलर के मुकाबले रुपया 56 पैसे से ज्‍यादा की गिरावट के साथ रिकॉर्ड स्‍तर के करीब 92.49 पर पहुंच गया. 

सोमवार की गिरावट ने रुपये को ऐतिहासिक निचले स्तरों के करीब धकेल दिया है. जानकारों का मानना है कि तेल के झटके और वैश्विक अस्थिरता के बीच उभरते बाजारों (Emerging Markets) की मुद्राओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है.

कच्चे तेल की कीमतों में 25% का जोरदार उछाल

रुपये की इस कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची खलबली है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में 25% से अधिक की तेजी देखी गई और यह 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. पिछले दो हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है.

भारत पर क्या होगा असर?

रुपया कमजोर होने और तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है.  अगर लंबे समय तक स्थिति बनी रही तो पेट्रोल-डीजल और परिवहन की लागत बढ़ने से आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा. इसका असर कहीं न कहीं आम आदमी पर भी पड़ सकता है. 

होर्मुज जलडमरूमध्य और सप्लाई का डर

ईरान के शामिल होने के बाद मिडिल ईस्ट का संघर्ष और गहरा गया है. निवेशकों को डर है कि युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है. यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट' है. इसके अलावा, खाड़ी देशों द्वारा उत्पादन में की गई कटौती ने बाजार में तेल की कमी को और बढ़ा दिया है.

ईरान में सत्ता परिवर्तन और बाजार की चिंता

बाजार में घबराहट उस समय और बढ़ गई जब तेहरान ने घोषणा की कि मुजतबा खामेनेई अपने पिता अली खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में ईरान के अगले सर्वोच्च नेता होंगे. इस घटनाक्रम से निवेशकों को संकेत मिला है कि ईरान का कड़ा रुख बरकरार रहेगा, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता लंबे समय तक खिंच सकती है. इस अनिश्चितता के कारण ग्लोबल इन्वेस्टर्स जोखिम वाले संपत्तियों (रुपया और भारतीय शेयर बाजार) से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (डॉलर और सोना) की ओर भाग रहे हैं.

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