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AI का गुब्बारा फूटते ही भारत में जमकर आएगा विदेशी निवेश? अमेरिकी मार्केट से मिले बड़े संकेत

अमेरिका में एआई ट्रेड कमजोर होने की वजह से नैस्डैक में बड़ी गिरावट आई है. ऐसे में भारतीय मार्केट में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का निवेश बढ़ने की उम्मीद है.

AI का गुब्बारा फूटते ही भारत में जमकर आएगा विदेशी निवेश? अमेरिकी मार्केट से मिले बड़े संकेत
अमेरिकी टेक मार्केट में आई गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार को विदेशी निवेशकों से उम्मीदें बढ़ गईं हैं.

भविष्य को देखते हुए एआई तकनीक में दुनियाभर के देशों ने जमकर निवेश किया है. लेकिन अब एक्सपर्ट की मानें तो एआई का गुब्बारा जो पिछले कुछ समय से हवा में लगातार घूम रहा था, वो अब पिचकने लगा है. दरअसल अमेरिका के टेक इंडैक्स नैस्डैक में करीब 5 फीसदी की गिरावट आई है. इसके देखकर कई बड़े देश एआई के भविष्य को लेकर परेशान हो उठे हैं. 

एआई का गुब्बारा फूटते ही भारत में बढ़ेगा विदेशी निवेश

एक्सपर्ट इसके पीछे इसी गुब्बारे की निकली हवा को वजह मान रहे हैं. अगर ये एआई ट्रेंड ऐसे ही कमजोर होता रहा तो भारत के शेयर मार्केट में विदेशी निवेशक एक बार फिर जमकर निवेश बढ़ा सकते हैं, जिससे देश के फॉरेक्स रिजर्व में तगड़ा उछाल आ सकता है. 

विदेशी निवेशकों को लेकर देश की चिंता

एनएसडीएल के अनुसार विदेशी निवेशक पिछले कुछ सालों से भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. मई 2026 की बात करें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 32,963 करोड़ रुपये मार्केट से निकाल लिए. इसके अलावा जून के पहले हफ्ते में भी यही सिलसिला लगातार जारी रहा, जिसमें विदेशी निवेशकों ने 42,926 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए. साल 2026 के आंकड़ें देखें तो विदेशी निवेशक भारतीय मार्केट से टोटल 2,83,662 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं.

विदेशी निवेशकों की इस निकासी के पीछे की वजह एआई को माना जा रहा है. एक्सपर्ट का मानना है कि निवेशक भारत से पैसा निकालकर अमेरिकी टेक और एआई कंपनियों में लगा रहे हैं. मालूम हो कि देश के करंट अकाउंट डेफिसिट और बैलेंस ऑफ पेमेंट को रोकने में विदेशी निवेशकों का रोल अहम होता है. 

आरबीआई के कदम से थमी रुपये की गिरावट

हालांकि पिछले दिनों आरबीआई और सरकार ने रुपये की गिरावट को थामने के लिए कुछ अहम कदम उठाए. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार सरकार ने गवर्नमेंट सिक्योरिटी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक को ब्याज और कैपिटल गेंस की छूट दी. साथ ही आरबीआई ने कमर्शियल बैंकों के विदेशी डिपॉजिट्स पर हेजिंग की कॉस्ट खुद उठाने और फॉरेक्स स्वैप विंडो बढ़ाने का ऐलान किया. अब इन कदमों का असर देखने को मिल रहा है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल टाइम लो लेवल 96.96 पर चला गया था, वो 5 जून को रिकवरी कर 94.94 पर बंद हुआ.

ग्लोबल मोर्चे पर परेशानी लगातार बनी हुई

भारत के सेंसेक्स और निफ्टी में वैश्विक टेंशन और उठा-पटक की वजह से गिरावट का दौर जारी है. हालांकि अर्थव्यवस्था के लिए जीडीपी और महंगाई के आंकड़े कुछ खुशखबरी जरूर लेकर आए हैं. इससे बाजार में बड़ी गिरावट नहीं देखने को मिली. एक्सपर्ट का मानना है कि अमेरिका-ईरान के बीच जब तक पीस डील साइन नहीं हो जाती, दुनियाभर के मार्केट में टेंशन का माहौल बरकरार रहेगा. 

एक्सपर्ट और अमेरिकी बाजार के ट्रेड को देखें तो ये बात सही लगती है कि जैसे ही एआई को लेकर स्थिति साफ होगी, वैसे ही विदेशी निवेशकों का रुख बदलेगा. एआई ट्रेड एक अहम फैक्टर है जो विदेशी पैसे को भारत से दूर खींच रहा है. 

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