विज्ञापन

24 जुलाई को रिलीज होनी थी फिल्म, CBFC ने लगाए 25 कट, नाराज डायरेक्टर ने बताया 20-25 करोड़ का हुआ नुकसान

द इंडिया स्टोरी के डायरेक्टर ने फिल्म ना रिलीज होने पर कहा- 17 जुलाई को उन्होंने मेरे साथ हिंदी की स्क्रीनिंग की थी.

24 जुलाई को रिलीज होनी थी फिल्म, CBFC ने लगाए 25 कट, नाराज डायरेक्टर ने बताया 20-25 करोड़ का हुआ नुकसान
24 जुलाई को रिलीज होनी थी द इंडिया स्टोरी
नई दिल्ली:

खाद्य पदार्थों में मिलावट पर बनी फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी' 24 जुलाई को 3 भाषाओं में रिलीज होनी थी पर रिलीज हुई सिर्फ हिंदी में वो भी 25 कट के साथ बाकी दो भाषाओं यानी तमिल और तेलुगु में फिल्म रिलीज हो ही नहीं पाई क्योंकि फिल्म की टीम के पास उतना वक्त ही नहीं था कि सेंसर सर्टिफिकेट मिलने के बाद वो बताए गए बदलावों को पूरा कर सकें इसलिए फिल्म को सिर्फ हिंदी में बदलाव करके जल्दी से रिलीज कर दिया गया. फिल्म के निर्देशक चेतन डीके सेंसर बोर्ड से काफी नाराज नजर आए और एनडीटीवी से खास बातचीत में उन्होंने फिल्म को तमिल और तेलुगु भाषाओं में फिल्म को तय तारीख यानी 24 जुलाई को रिलीज करने में असमर्थता दिखाई. पेश है फिल्म के निर्देशक चेतन डीके के साथ बातचीत के कुछ अंश -

सवाल: चेतन, सबसे पहले मैं आपसे यही पूछूंगा कि पिक्चर 24 जुलाई को रिलीज हो रही है और मेरी जानकारी के मुताबिक 22 जुलाई की रात को आपको सर्टिफिकेट मिला और आपको बहुत सारे बदलाव बताए गए?

जवाब: जी सर, बहुत सारे... 25 कट दिए सर, 25 कट. और ये जो फिल्म है उसमें ना तो ब्लड है, ना कुछ है. उसमें जो इंफॉर्मेशन है, जो आजकल खान-पान है, उससे रिलेटेड फिल्म है. दूसरी बात ये है कि मैंने 2 जून को सेंसर सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई किया था. मेरी फिल्म तीन लैंग्वेज में है हिंदी, तमिल और तेलुगु. मेरा नुकसान कम से कम 20-25 करोड़ का हुआ है. 17 जुलाई को उन्होंने मेरे साथ हिंदी की स्क्रीनिंग की थी. बाकी जो दो लैंग्वेज बचीं, उसमें हिंदी के उन्होंने 25 कट दिए. उन्होंने आज बोला ऐसे करके लाओ, कल बोला ऐसे करके लाओ, और 22 जुलाई को रात को 8:30 बजे मुझे सेंसर दिया. वो भी सिर्फ हिंदी का दिया. अब बीच में सिर्फ एक ही दिन बचा है और वो बोल रहे हैं कि कल तेलुगु और तमिल की स्क्रीनिंग करो. वो जो 25 कट उन्होंने दिए थे, उन्हें रिपेयर करने के लिए दो दिन लगते हैं. तो मेरा तमिल-तेलुगू का नुकसान हो गया है. मेरी फिल्म रिलीज नहीं हो पाई, कल सिर्फ हिंदी रिलीज हो रही है.

ये भी पढे़ं- अरुण गोविल के सपोर्ट में रामायण की सीता, रामायणम् की साई पल्लवी और यश के रोल पर दीपिका चिखलिया ने कहा- कर्ली बालों वाली सीता

सवाल: तो फिल्म की ड्यूरेशन पे क्या फर्क पड़ा है?

जवाब: ड्यूरेशन पर मतलब, मेरे कुछ अच्छे सीन्स चले गए हैं, जो चार-पांच मिनट की चीजें थीं. 

सवाल: पहले कितने मिनट की फिल्म थी?

जवाब: पहले मेरी फिल्म कम से कम 2 घंटे 16 मिनट की थी. अभी 2 घंटे 10 मिनट 13 सेकंड है. 

सवाल: ये सीन्स इन्होंने डिलीट करने के लिए बोले हैं या म्यूट करने के लिए बोले हैं?

जवाब: सर, पहले उन्होंने कहा कि इसे म्यूट करो, तो हम म्यूट करके ले गए. फिर बोले कि सेंसर पर बात आएगी क्योंकि बीप डालेंगे या म्यूट करेंगे तो लोग बोलेंगे कि सेंसर ने यह भी म्यूट किया है. उन्होंने कहा कि एक दिन बचा है और आप आर्टिस्ट को बुलाकर डबिंग रिकॉर्ड करो और अभी म्यूट मत करो. अब आप ही बताइए, इन 25 कट में इतने सारे आर्टिस्ट हैं, उनको मैं डबिंग के लिए कब बुलाऊँ जबकि बीच में सिर्फ 23 तारीख है और 24 को फिल्म रिलीज तय है? यह बिल्कुल इम्पॉसिबल चीज़ है. 

सवाल: सीबीएफसी ने २२ की  रात को आपको सर्टिफिकेट दिया?

जवाब: हाँ, वो भी सिर्फ हिंदी का दिया, तमिल-तेलुगू का नहीं दिया. तमिल-तेलुगू के बारे में बोले कि वो 25 कट आप वापस डीसीपी में वैसे ही कट करके कल सुबह 10:00 बजे स्क्रीनिंग करो. सर, दो भाषाओं में इतनी जल्दी यह काम करना दुनिया में किसी के लिए भी इम्पॉसिबल है. एक रात में 25 कट करके, एडिट करके सुबह स्क्रीनिंग कैसे हो सकती है? इसी वजह से मेरी तमिल और तेलुगू फिल्म कल रिलीज नहीं हो रही है और मुझे कम से कम 20-25 करोड़ का नुकसान हुआ है.

सवाल: तो मुझे ये बताइए कि जब आपने 2 जून को सबमिशन किया था तो क्या आप सीबीएफसी के साथ फॉलोअप कर रहे थे?

जवाब: किया सर, मैं खुद आठ-नौ बार उधर गया. मेरे प्रोडक्शन से भी लोग आठ-नौ बार गए. उनको रिक्वेस्ट की, सारी चीजें की, और वो बस "देता हूं, देता हूं" कहते रहे. जब गले पर बात आई, तो 22 तारीख की रात को हम इतने टेंशन में थे कि हमें पता ही नहीं था कि वे सेंसर देंगे भी या नहीं. अगर कोई दूसरा होता तो वह जान दे देता. सीबीएफसी वाले खुद जिम्मेदारी नहीं ले रहे हैं. हम इतनी मेहनत और कष्ट करके फिल्में बनाते हैं, तो उन्हें जल्दी काम करना चाहिए ना?

सवाल: इस देरी का कारण आपको क्या लगता है? क्यों उन्होंने देरी की होगी?

जवाब: वे उतने ध्यान से काम नहीं कर रहे हैं. उन्हें इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि प्रोड्यूसर कैसे और क्यों फिल्म बनाता है. उनके हिसाब से उनका टाइमिंग है, काम हो तो ठीक वरना आप मरो. मेरे सामने हैदराबाद से एक सीधे-साधे एक्टर और डायरेक्टर आए थे, जो 10 बार चक्कर काट रहे थे और बस से ट्रैवल कर रहे थे. सेंसर मिलने तक मैंने तीन दिन खाना नहीं खाया, न ही मेरे सात-आठ प्रोड्यूसर सोए. हमने फिल्म की मेकिंग और जीएसटी पकड़कर 32 करोड़ रुपये इन्वेस्ट किए हैं, और तमिल-तेलुगू का सेंसर न मिलने की वजह से मेरा कल का रिलीज रुक गया है. आप सोचिए मेरा कितना नुकसान हुआ है.

सवाल: तो अब आगे क्या करेंगे? कल तो आप रिलीज नहीं कर पाएंगे पिक्चर?

जवाब: नहीं-नहीं, हिंदी तो कर रहा हूं.

सवाल: हां, हिंदी कर रहे हैं, पर बाकी भाषाओं का क्या?
जवाब:
अब क्या करूँ, मेरा नुकसान हो गया है, इन्हें कोई परवाह नहीं है. प्रोड्यूसर का नुकसान हो गया तो हो गया, इन्हें इससे कोई मतलब नहीं है.

ये भी पढे़ं- रामायण के जटायु, जामवंत और शूर्पणखा अब कैसे दिखते है, इंटरनेट पर वायरल वीडियो, इस अंदाज में एक्टर्स आए नजर

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
The India Story, Cbfc, Bollywood
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com