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श्रीलंका, बांग्‍लादेश, पाकिस्‍तान हो या कोरिया-जापान, इस संकट से सब हल्‍कान, भारत ने यूं निकाला समाधान

सरकार का कहना है कि वेस्ट एशिया संकट के दौरान दुनिया के कई देशों में फ्यूल की कीमतें बढ़ीं और सप्लाई पर असर पड़ा. लेकिन भारत ने इसका बोझ आम लोगों पर नहीं डाला और पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता बनाए रखी.

श्रीलंका, बांग्‍लादेश, पाकिस्‍तान हो या कोरिया-जापान, इस संकट से सब हल्‍कान, भारत ने यूं निकाला समाधान
वेस्ट एशिया संकट के दौरान भारत ने आम लोगों पर फ्यूल की बढ़ी लागत का बोझ नहीं डाला और पेट्रोल, डीजल व एलपीजी की सप्लाई सामान्य बनाए रखी.
(NDTV File Photo)

मिडिल ईस्‍ट में ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल का युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज स्‍ट्रेट बंद होने के चलते दुनियाभर के कई देशों को तेल और गैस का संकट झेलना पड़ा. कुछ तो आज भी पूरी तरह नहीं उबर पाए हैं, लेकिन भारत इससे काफी हद तक बचा रहा. हालांकि बाद के दिनों में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के दाम यहां भी बढ़े. बाकी देशों का हाल बुरा रहा. कहीं ऑयल इमरजेंसी तक लागू करना पड़ गया, कहीं हफ्ते में काम के दिन कम कर दिए गए, कहीं वर्क फ्रॉम होम का आदेश तो कहीं फ्यूल राशनिंग. भारत में ऐसा कुछ नहीं करना पड़ा. 

सरकार के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद वेस्ट एशिया संकट की वजह से दुनिया भर में ऑयल और गैस की कीमतें बढ़ गईं. इससे कई देशों की इकोनॉमी पर असर पड़ा. लेकिन भारत ने इसका बोझ सीधे आम लोगों पर नहीं डाला. सरकार और पब्लिक सेक्टर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इस लागत को अपने स्तर पर संभाला.

कई देशों में फ्यूल संकट, भारत में सप्लाई रही सामान्य

सरकार के मुताबिक, श्रीलंका में दोबारा पेट्रोल की राशनिंग शुरू करनी पड़ी. पाकिस्तान ने फ्यूल बचाने के लिए स्कूल बंद किए, कामकाज के दिन कम किए और क्रिकेट मैच बिना दर्शकों के कराए. म्यांमार में ऑड-ईवन ड्राइविंग और क्यूआर कोड के जरिए फ्यूल दिया गया. बांग्लादेश ने ऑयल डिपो पर सैनिक तैनात किए. वहीं इथियोपिया ने फ्यूल की सप्लाई सिर्फ सुरक्षा बलों और जरूरी इंडस्ट्री तक सीमित कर दी. जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सरकारी मदद दी. यूरोप के कई देशों ने भी लोगों को राहत देने के लिए अरबों यूरो खर्च किए. वहीं न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के कुछ हिस्सों में फ्यूल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई.

भारत में नहीं लगी राशनिंग

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि भारत ने न तो कोई इमरजेंसी घोषित की, न ही घरों के लिए फ्यूल की राशनिंग की. स्कूल बंद नहीं किए गए, कामकाज के दिन कम नहीं हुए और ड्राइविंग पर भी कोई रोक नहीं लगाई गई. मंत्रालय के मुताबिक, सिर्फ कमर्शियल और बल्क एलपीजी के इस्तेमाल और डीजल व एविएशन फ्यूल के एक्सपोर्ट पर कुछ समय के लिए रोक लगाई गई थी. इसका मकसद घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देना था, न कि राशनिंग करना.

सरकार ने कहा कि शुरुआती चिंता के बाद भी घरों तक एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लगातार जारी रही. पेट्रोल पंप खुले रहे और बड़े देशों की तुलना में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में सबसे कम बढ़ोतरी हुई. मंत्रालय के अनुसार, 25 जून को भारत ने कमर्शियल और बल्क एलपीजी पर लगाए गए प्रतिबंध भी हटा दिए. सरकार का कहना है कि यह पिछले 10 साल में एनर्जी सिक्योरिटी और रणनीतिक तैयारी पर किए गए निवेश का नतीजा है.

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