विज्ञापन

Explainer: FDI नियमों में ढील से क्या सस्ता होगा मोबाइल-लैपटॉप? चीन को मिली राहत से 'मेक इन इंडिया' को मिलेगी रफ्तार

India FDI Rules for China: चीन से आने वाला निवेश सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि नई टेक्नोलॉजी भी लाएगा. जब चीनी कंपनियां भारत में अपने प्लांट लगाएंगी, तो भारत एक बड़े एक्सपोर्ट हब के तौर पर उभरेगा.

Explainer: FDI नियमों में ढील से क्या सस्ता होगा मोबाइल-लैपटॉप? चीन को मिली राहत से 'मेक इन इंडिया' को मिलेगी रफ्तार
India New Foreign Direct investment Norms for China: नए नियम के तहत अगर चीन या किसी विदेशी कंपनी में ऐसे देशों की 10% तक हिस्सेदारी है और वह नॉन-कंट्रोलिंग है, तो वह सरकारी मंजूरी के बिना ऑटोमैटिक निवेश कर सकेंगी.
नई दिल्ली:

सरकार ने चीन समेत भारत की सीमा से सटे यानी पड़ोसी देशों के लिए फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के नियमों(FDI Norms) में ढील दे दी है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में यह फैसला लिया गया. सरकार का कहना है कि इस बदलाव से भारत में निवेश बढ़ेगा, नई टेक्नोलॉजी आएगी और देश को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में मदद मिलेगी. इसे भारत और चीन के बीच सुधरते रिश्तों और 'मेक इन इंडिया' को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे मोबाइल-लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की लागत कम हो सकती है, क्योंकि कच्चे माल और कंपोनेंट्स की सप्लाई आसान हो जाएगी.यहां जानिए इस फैसले का आपके बजट और देश की इकोनॉमी पर क्या असर पड़ेगा...

क्या हैं FDI के नए नियम?

सरकार ने 2020 के Press Note 3 में बदलाव किया है.पहले नियम यह था कि भारत से सीमा  साझा करने वाले किसी भी देश की कंपनी, चाहे उसके पास एक शेयर ही क्यों न हो, उसे भारत में निवेश के लिए सरकार से अनिवार्य मंजूरी लेनी पड़ती थी.

अब नए नियम के तहत अगर चीन या किसी विदेशी कंपनी में ऐसे देशों की 10% तक हिस्सेदारी है और वह नॉन-कंट्रोलिंग है, तो वह सरकारी मंजूरी के बिना ऑटोमैटिक निवेश कर सकेंगी. हालांकि इन निवेशों पर सेक्टोरल कैप, एंट्री रूट और अन्य शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी. साथ ही निवेश से जुड़ी जानकारी DPIIT को पहले से रिपोर्ट करनी होगी.

किन देशों पर लागू होंगे ये नियम?

ये नियम उन सभी देशों पर लागू होंगे जो भारत के साथ जमीन सीमा साझा करते हैं. इनमें चीन, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, म्यांमार, अफगानिस्तान शामिल हैं. हालांकि इस फैसले को मुख्य रूप से चीन से निवेश आकर्षित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

किन सेक्टरों में तेजी से मंजूरी मिलेगी?

सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, कैपिटल गुड्स ,भारी मशीनरी , इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट और सोलर जैसे खास सेक्टरों में निवेश के प्रस्तावों पर मंजूरी अब  सिर्फ 60 दिनों के भीतर ने की व्यवस्था भी की है. हालांकि, इन मामलों में कंपनी में बहुमत हिस्सेदारी और कंट्रोल भारतीय नागरिकों या भारतीय कंपनियों के पास के पास होना जरूरी है.

क्या सस्ता होगा मोबाइल और लैपटॉप?

सरकार के इस फैसले का सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर पर पड़ेगा. अब तक मोबाइल और लैपटॉप के कंपोनेंट्स (पुर्जे) चीन से मंगवाने में काफी औपचारिकताएं होती थीं, लेकिन अब चीनी कंपनियों के लिए भारत में निवेश करना और प्लांट लगाना आसान होगा.अगर चीन की कंपनियां भारत में फैक्ट्रियां लगाती हैं, तो यहां मोबाइल-लैपटॉप के पार्ट्स बनने लगेंगे. जब सामान यहीं बनेगा, तो उसकी उत्पादन लागत (Production Cost) कम होगी.इससे इम्पोर्ट पर निर्भरता कम होगी और कीमतों पर दबाव घट सकता है. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में मोबाइल, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स की कीमतों में कमी आ सकती है.

मेक इन इंडिया और और रोजगार की नई लहर

एक्सपर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेश से भारत में नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लग सकते हैं. इससे भारत का ग्लोबल सप्लाई चेन में हिस्सा बढ़ेगा और देश एक्सपोर्ट हब के तौर पर मजबूत हो सकता है.साथ ही नए निवेश और औद्योगिक इकाइयों के विस्तार से लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की भी उम्मीद है.

भारत-चीन संबंध और निवेश का आंकड़ा

2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत-चीन संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे.इसके बाद भारत ने TikTok, WeChat और UC Browser समेत 200 से ज्यादा चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था.हालांकि हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखा गया है.

FDI के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक भारत में आए कुल FDI में चीन की हिस्सेदारी सिर्फ 0.32% (करीब 2.51 अरब डॉलर) रही है.

भारत-चीन व्यापार का हाल

हालांकि चीन से निवेश कम रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है.आंकड़ों की बात करें तो 2024-25 में भारत का चीन को निर्यात 14.5% घटकर 14.25 अरब डॉलर रहा.वहीं चीन से आयात 11.52% बढ़कर 113.45 अरब डॉलर पहुंच गया.इस वजह से व्यापार घाटा बढ़कर 99.2 अरब डॉलर हो गया.

वहीं अप्रैल-जनवरी 2025-26 के दौरान भारत का निर्यात 38.37% बढ़कर 15.88 अरब डॉलर रहा.आयात 13.82% बढ़कर 108.18 अरब डॉलर रहा.इस अवधि में व्यापार घाटा 92.3 अरब डॉलर रहा.

भारत में FDI का कुल आंकड़ा

भारत में अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच FDI निवेश 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो चुका है.सबसे ज्यादा निवेश जिन सेक्टरों में आया है,उनमें सर्विस सेक्टर,कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर,टेलीकॉम,ट्रेडिंग,कंस्ट्रक्शन डेवलपमेंट, ऑटोमोबाइल, केमिकल,फार्मास्युटिकल शामिल हैं.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com