विज्ञापन

भारत और EU के बीच का समझौता क्यों है 'मदर ऑफ ऑल डील्स'?

EU-India Trade Deal: यह डील केवल सामान बेचने तक सीमित नहीं है. इसमें ग्रीन एनर्जी, डिजिटल गवर्नेंस और डिफेंस जैसे वो क्षेत्र शामिल हैं, जो किसी देश के लिए आधुनिक समय में बहुत जरूरी हो गया है.

भारत और EU के बीच का समझौता क्यों है 'मदर ऑफ ऑल डील्स'?
  • भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने मदर ऑफ ऑल डील्स कहा है
  • यह डील 28 देशों के बाजार को जोड़ते हुए वैश्विक जीडीपी के बड़े हिस्से को बड़ा आकार देगी
  • यूरोप चीन पर अपनी सप्लाई चेन की निर्भरता कम करने के लिए भारत को भरोसेमंद पार्टनर मान रहा है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

EU-India Trade Deal: दुनिया के दो सबसे बड़े बाजार जब हाथ मिलाते हैं, तो हलचल सिर्फ व्यापार में ही नहीं, बल्कि जियो-पॉलिटिक्स में भी होती है. भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच चल रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मदर ऑफ ऑल डील्स करार दिया है. लेकिन सवाल वही है कि इस डील में ऐसा क्या खास है जो इसे बाकी समझौते से अलग बना रहा है. 

क्यों यह समझौता 'मदर ऑफ ऑल डील्स' है?

जब बात 28 देशों की आती है को इस एफटीए को महज एक ट्रेड एग्रीमेंट कहना गलत होगा. इसमें बाजार का महाकुंभ, चीन का ऑप्शन और तकनीक को बूस्ट देने वाली तमाम समझौते शामिल हैं. एक तरफ 140 करोड़ भारतीयों का उभरता हुआ मिडिल क्लास है, तो दूसरी तरफ 27 देशों का अमीर यूरोपीय बाजार. इन दोनों का मिलना वैश्विक जीडीपी के एक बड़े हिस्से को री-शेप करेगा.

यूरोपियन यूनियन की कुल जीडीपी की बात करें तो वो करीब 20 ट्रिलियन डॉलर है. भारत के साथ आने से 140 करोड़ लोगों की डिमांड इस डील को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' बना देती है.

यूरोप अब अपनी सप्लाई चेन के लिए चीन पर डिपेंडेंसी कम करना चाहता है. और इसके लिए भारत इस खाली जगह को भरने के लिए सबसे भरोसेमंद पार्टनर बनकर उभरा है.

यह डील केवल सामान बेचने तक सीमित नहीं है. इसमें ग्रीन एनर्जी, डिजिटल गवर्नेंस और डिफेंस जैसे वो क्षेत्र शामिल हैं, जो किसी देश के लिए आधुनिक समय में बहुत जरूरी हो गया है.

गेम-चेंजर पॉइंट्स

  • ऑटोमोबाइल्स सेक्टर में भारत यूरोपीय कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी घटा सकता है, जिससे सस्ती लग्जरी कारें और बेहतर इलेक्ट्रिक व्हीकल तकनीक देश को मिलेगी. 
  • सर्विसेज सेक्टर में भारतीय IT प्रोफेशनल्स और डॉक्टर्स के लिए यूरोप के दरवाजे खुलेंगे. इससे फायद यह होगा कि    रोजगार के नए अवसर और ईजी वीजा एक्सेस मिलेगा.
इस डील से यूरोप में भारत से जाने वाले कपड़े, दवाइयां, स्टील और पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाली ड्यूटी कम होगी, जिससे विदेशी बाजार में भारतीय सामान सस्ता और कॉम्पिटिटिव होगा.

एक बात साफ है यह केवल व्यापार के बारे में तो नहीं है. यह 21वीं सदी की वो आर्थिक कहानी है, जिससे आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था के मौर्चे पर शानदार नतीजे देखे जाएंगे.आसान भाषा में कहें तो ग्लोबल इकोनॉमी का केंद्र ही बदल जाएगा.

साल 2007 से इस डील पर बात चल रही है. यानी इस मदर ऑफ ऑल डील्स का रास्ता लंबा जरूर है, लेकिन दोनों देशों की जरूरतें इसे हकीकत बनाने के करीब ले जा रही हैं. यह डील देश के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए सबसे बड़ा बूस्टर डोज साबित होगी.

यह भी पढ़ें- EU-India Trade Deal: इटली, फ्रांस समेत 27 देशों से डील, केवल कारोबारी ही नहीं आम आदमी की जेब तक पहुंचेगा सीधा फायदा

यह भी पढ़ें- सफल भारत दुनिया को सुरक्षित बनाएगा,'मदर ऑफ ऑल डील' से पहले बोलीं यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com