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1 अप्रैल से बदल गए कमाई के नियम, शेयर Buyback और डिविडेंड पर देना होगा ज्यादा टैक्स, F&O ट्रेडर्स की भी बढ़ी टेंशन,जानें हर बात

New Share Buyback Rule from April 1: 1 अप्रैल 2026 से शेयर बायबैक, डिविडेंड और F&O ट्रेडिंग पर नए टैक्स नियम लागू हो गए हैं. जानें कैसे बायबैक पर 30% तक टैक्स और बढ़े हुए STT से आपकी कमाई पर असर पड़ेगा.

1 अप्रैल से बदल गए कमाई के नियम, शेयर Buyback और डिविडेंड पर देना होगा ज्यादा टैक्स, F&O ट्रेडर्स की भी बढ़ी टेंशन,जानें हर बात
Share Buyback Tax Rules April 1: अब बायबैक से होने वाली कमाई पर एडिशनल टैक्स भी लगेगा और आप इसे अपने कैपिटल लॉस (घाटे) के साथ एडजस्ट नहीं कर पाएंगे.
नई दिल्ली:

आज 1 अप्रैल है और नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही आपके निवेश और कमाई से जुड़े कई नियम बदल गए हैं. अगर आप शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं, तो अब आपको शेयर बायबैक (Buyback), डिविडेंड (Dividend) और म्यूचुअल फंड से होने वाली इनकम पर नए तरीके से टैक्स देना होगा. इसके अलावा, फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग करना भी आज से महंगा हो गया है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आपकी जेब पर इन बदलावों का क्या असर पड़ेगा.

शेयर बायबैक (Share Buyback) का नया नियम

अब तक कंपनियां बायबैक का इस्तेमाल टैक्स बचाने के लिए करती थीं, लेकिन अब सरकार ने इसे पकड़ लिया है.

अगर प्रमोटर (10% से ज्यादा हिस्सेदारी वाले) बायबैक में शेयर बेचते हैं, तो उन्हें 30% तक टैक्स देना पड़ सकता है.

आम निवेशकों के लिए यानी नॉन-प्रमोटर शेयरधारकों के लिए इस पर 12.5% LTCG टैक्स लगेगा.

अब बायबैक से होने वाली कमाई पर एडिशनल टैक्स भी लगेगा और आप इसे अपने कैपिटल लॉस (घाटे) के साथ एडजस्ट नहीं कर पाएंगे. यानी अब बायबैक से मुनाफा कमाना पहले जितना आसान नहीं रहा.

डिविडेंड इनकम परअब नहीं मिलेगी ब्याज की छूट

अगर आपने शेयर खरीदने के लिए पैसे उधार लिए थे, तो पहले आपको मिलने वाले डिविडेंड पर 20% तक ब्याज की कटौती (Interest Deduction) का फायदा मिलता था. 1 अप्रैल से यह फायदा खत्म कर दिया गया है. अब अगर आप 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' के तहत डिविडेंड दिखाते हैं, तो आपको पूरी रकम पर टैक्स देना होगा, कोई छूट नहीं मिलेगी.

F&O ट्रेडिंग हुई महंगी, बढ़ गया STT

डेरिवेटिव मार्केट (F&O) में हाथ आजमाने वाले ट्रेडर्स के लिए आज से लागत बढ़ गई है.फ्यूचर्स (Futures) पर एसटीटी (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है.वहीं, ऑप्शंस (Options) प्रीमियम पर टैक्स 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है.एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे छोटे और रिटेल ट्रेडर्स की ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी, जिससे उनके मुनाफे पर थोड़ा असर पड़ सकता है.

विदेशी निवेशकों (FPI) पर क्या होगा असर?

टैक्स बढ़ने से शॉर्ट-टर्म विदेशी निवेश पर थोड़ा नेगटिव असर पड़ सकता है. डेटा के मुताबिक, जनवरी में ही विदेशी निवेशकों ने भारी निकासी की थी. अब बढ़ी हुई लागत की वजह से कुछ निवेशक भारत के बजाय ताइवान या दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों का रुख कर सकते हैं. हालांकि, लंबे समय के निवेशकों के लिए चिंता की बात नहीं है क्योंकि उनके फैसले कंपनी की ग्रोथ पर टिके होते हैं.

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