बर्गर आज सिर्फ एक फास्ट-फूड नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी और मुनाफेदार फूड कैटेगरीज में से एक बन चुका है. इसका वैश्विक कारोबार हर साल सैकड़ों अरब डॉलर का रेवन्यू जनरेट हो रहा है. बर्गर के कारोबार को लेकर कई रिसर्च सामने आए हैं. अलग-अलग रिसर्चों में किए दावों में अनुमान लगाया गया है कि इसका कारोबार सैकड़ों अरब डॉलर का है. बर्गर बनाने वाली कंपनियां आज मालामाल हो गई है. कुछ हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 में वैश्विक हैमबर्गर मार्केट लगभग USD 216 बिलियन (करीब 215 अरब डॉलर) का आंका गया.
वहीं, कुछ अन्य ग्लोबल रिसर्च अनुमानों के अनुसार वर्ष 2026 में Hamburger market मार्केट करीब USD 759.45 बिलियन के भारी-भरकम स्तर तक पहुंच चुका है.
McDonald's रेस में सबसे आगे
फूड मार्केट के इस 'बर्गर किंगडम' में कुछ चुनिंदा ब्रांड्स ही राज कर रहे हैं. McDonald's इस रेस में सबसे आगे है, जिसने अपने बेहतरीन फ्रेंचाइजी मॉडल से अरबों डॉलर कमाए हैं. इसके बाद Burger King और Wendy's है जिसने वैश्विक स्तर पर अपना मजबूत फुटप्रिंट बनाकर भारी मुनाफा बटोरा है.
इन बड़े दिग्गजों के अलावा कई क्षेत्रीय श्रृंखलाओं ने भी स्थानीय स्वादों के दम पर तगड़ा कैश फ्लो जनरेट किया है.
बर्गर खपत की रफ्तार 578 प्रति सेकेंड
रोजाना बर्गर की खपत की बात करें तो दुनिया भर में बर्गर की दीवानगी काफी ज्यादा है. इसकी दैनिक खपत के आंकड़े हैरान करने वाले हैं. एक व्यापक अनुमान (Indicative Estimate) के मुताबिक, दुनिया भर में रोज 50 मिलियन (5 करोड़) से ज्यादा हैमबर्गर खाए जाते हैं. अगर इसे कैलकुलेट किया जाए बर्गर खाए जाने की रफ्तार लगभग 578 बर्गर प्रति सेकंड है.
अब सवाल है कि बर्गर चेन कंपनियों के मालिक और निवेशक आखिर इतने मालामाल कैसे होते हैं? इसका राज इनके बिजनेस मॉडल में छिपा है. यह कंपनियां सिर्फ बर्गर बेचकर नहीं, बल्कि स्केल (बड़े पैमाने पर विस्तार), फ्रेंचाइजी फीस, रियल एस्टेट होल्डिंग्स, मजबूत डिलीवरी नेटवर्क और 'रिपीट कंजम्पशन' (ग्राहकों का बार-बार आना) के चक्र से एक ऐसी ऑटोमैटिक 'कैश मशीन' खड़ी कर लेती हैं, जो हर सेकंड मुनाफा कमाती है.
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