'एक साल तक सोना न खरीदें'. रविवार की शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ये अपील की और ये देशभर में चर्चा का विषय बन गया. मार्केट में गोल्ड से जुड़े शेयर 12 फीसदी तक गिर गए. गांव हो या शहर, घर परिवार में इस बात की चर्चा होने लगी कि सोने के बिना शादियां कैसे होंगी! PM मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के चलते पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच देशवासियों से अपील की है कि कम से कम एक साल तक सोने की खरीदारी न करें, विदेश यात्राएं टाल दें और जहां तक संभव हो वर्क फ्रॉम होम को अपनाएं. इसमें सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की हो रही है कि आखिर PM मोदी ने सोना न खरीदने की अपील क्यों की. दरअसल, इस अपील के पीछे कोई पाबंदी नहीं, बल्कि देश की इकोनॉमी को किसी वैश्विक झटके से बचाने की दूरगामी सोच छिपी है.
सोना न खरीदने का संबंध सीधे-सीधे देश के फॉरेक्स बिल यानी विदेशी मुद्रा बिल और रिजर्व से जुड़ा है. आइए इसका गणित समझने की कोशिश करते हैं.
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार
ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 690.69 बिलियन डॉलर है. RBI के आंकड़े बताते हैं कि फरवरी में फॉरेक्स रिजर्व 728 बिलियन डॉलर के करीब पहुंच गया था, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के बीच अप्रैल में ये काफी कम होकर 691 बिलियन डॉलर के आसपास आ गया.
दूसरी ओर आईएमएफ (IMF) ने अनुमान लगाया है कि 2026 में भारत का करेंट अकाउंट डेफिसिट यानी चालू खाता घाटा (CAD) बढ़कर 84.5 बिलियन डॉलर हो सकता है, जो GDP का लगभग 2% है. चालू खाता घाटा बढ़ने का मतलब ये हुआ कि देश में जितना डॉलर आ रहा है, उससे ज्यादा डॉलर बाहर यानी विदेशों में जा रहा है.
72 बिलियन डॉलर: देश का घाटा बढ़ाने में सोना बड़ी वजह
देश का करेंट अकाउंट डेफिसिट यानी चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने के पीछे सोना एक बड़ी वजह है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 72 बिलियन डॉलर के सोने का आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24% अधिक है. गोल्ड के मामले में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है. इसमें से ज्यादातर सोना आयात किया जाता है और इसके हर औंस (ounce) का भुगतान डॉलर में करना पड़ता है.
FY26 का कुल आयात बिल: $775 बिलियन
- कच्चा तेल आयात: $134.7 बिलियन
- सोना आयात: $72 बिलियन
- खाद्य तेल: $19.5 बिलियन
- उर्वरक (Fertilisers): $14.5 बिलियन
विदेशी मुद्रा भंडार: ~$691 बिलियन (अप्रैल 2026)
आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत की कुल आयात सूची में सोना अकेले लगभग 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है. दूसरी ओर मौजूदा ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें 105 से 120 डॉलर प्रति बैरल के बीच झूल रही हैं. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत तेल आयात करता है, इसलिए देश के डॉलर भंडार (Foreign Exchange Reserves) पर पहले से ही भारी दबाव है.
सोना न खरीदने से देश के कितने पैसे बचेंगे?
अगर देशवासी प्रधानमंत्री की इस 'नैतिक अपील' को स्वीकार करते हैं और सोने की मांग में कमी आती है, तो इसका सीधा असर भारत के खजाने पर पड़ेगा.
- 20-25 बिलियन डॉलर की बचत: यदि सोने के आयात में केवल 30-40% की गिरावट आती है, तो देश के लगभग 25 अरब डॉलर बच सकते हैं.
- 36 बिलियन डॉलर की बचत: यदि सोने के आयात में 50% तक कर गिरावट आती है, तो 36 अरब डॉलर की बचत होगी.
- 72 बिलियन डॉलर की बचत: और अगर देश, एक साल तक सोना न खरीदे तो पूरे 72 बिलियन डॉलर बच सकते हैं. रुपये में ये राशि 6.84 लाख करोड़ के बराबर होती है.
ऐसा होने पर CAD में बड़ा सुधार होगा. ये बचत भारत के अनुमानित चालू खाता घाटे (Current Account Deficit - CAD) का लगभग आधा हिस्सा कवर कर सकती है, जिसके 2026 में 84.5 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
सीधी-सपाट बात करें तो सोने पर बचने वाले इन डॉलर्स का उपयोग कच्चे तेल, गैस और एनर्जी संबंधित अन्य जरूरतों के लिए भुगतान करने में किया जा सकेगा.
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