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2008 के संकट के बाद HDFC Bank का सबसे बड़ा दांव, विदेशी बॉन्ड्स के जरिए जुटाई 1.75 बिलियन डॉलर की फंडिंग

HDFC Bank Mega Fundraise: एचडीएफसी बैंक ने GIFT सिटी शाखा के जरिए विदेशी बॉन्ड से $1.75 बिलियन (करीब ₹14,600 करोड़) जुटाए हैं. 2008 के वित्तीय संकट के बाद बैंक की यह सबसे बड़ी विदेशी फंडिंग डील है.

2008 के संकट के बाद HDFC Bank का सबसे बड़ा दांव, विदेशी बॉन्ड्स के जरिए जुटाई 1.75 बिलियन डॉलर की फंडिंग
HDFC Bank Overseas Fundraise: भारतीय बैंक क्यों कर रहे विदेशी बाजार का रुख

HDFC Bank Mega Funding: देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank ने विदेशी बाजार से बड़ी फंडिंग जुटाई है. बैंक ने विदेशी बॉन्ड्स के जरिए 1.75 अरब डॉलर यानी करीब ₹14,600 करोड़ की फंडिंग हासिल की है. यह 2008 के संकट के बाद यह HDFC Bank की सबसे बड़ी विदेशी फंड जुटाने की डील है.

बैंक ने 20 अगस्त को बताया कि यह रकम सीनियर अनसिक्योर्ड बॉन्ड्स के जरिए जुटाई गई है. पिछले कुछ समय में कई भारतीय बैंक विदेशी कर्ज बाजार से फंड जुटा रहे हैं और अब HDFC Bank ने भी बड़ी डील के साथ इस बाजार में कदम बढ़ाया है.

GIFT City ब्रांच से जारी किए गए बॉन्ड्स

HDFC Bank ने यह बॉन्ड्स अपनी GIFT City ब्रांच के जरिए जारी किए हैं. इस फंड जुटाने की प्रोसेस को दो हिस्सों में बांटा गया है. यानी बैंक ने एक ही पीरिएड के बजाय अलग-अलग पीरिएड के दो बॉन्ड्स जारी किए हैं.पहले हिस्से में बैंक ने 3 साल की पीरिएड के बॉन्ड्स के जरिए 50 करोड़ डॉलर जुटाए हैं. वहीं, दूसरे और बड़े हिस्से में 5 साल की अवधि के बॉन्ड्स के जरिए 1.25 अरब डॉलर जुटाए गए हैं.

3 और 5 साल के बॉन्ड्स पर कितना ब्याज मिलेगा?

HDFC Bank के 3 साल वाले बॉन्ड्स पर 5.159 प्रतिशत कूपन तय किया गया है. वहीं, 5 साल वाले बॉन्ड्स पर निवेशकों को 5.401 प्रतिशत कूपन मिलेगा.इन दोनों बॉन्ड्स पर ब्याज का भुगतान हर 6 महीने में किया जाएगा. यानी निवेशकों को साल में दो बार ब्याज मिलेगा. इन दोनों बॉन्ड्स का निपटान 26 अगस्त को होगा. इसके बाद 3 साल की अवधि वाले बॉन्ड्स 26 अगस्त 2029 को मैच्योर होंगे.वहीं, 5 साल की अवधि वाले बॉन्ड्स की मैच्योरिटी 26 अगस्त 2031 को होगी. यानी बैंक ने विदेशी निवेशकों से अलग-अलग अवधि के लिए यह बड़ी फंडिंग जुटाई है.

बॉन्ड्स की प्राइस गाइडेंस कितनी रखी गई?

3 साल की अवधि वाले बॉन्ड्स के लिए T+88 बेसिस पॉइंट्स की प्राइस गाइडेंस रखी गई है. वहीं, 5 साल वाले बॉन्ड्स के लिए T+100 बेसिस पॉइंट्स की प्राइस गाइडेंस तय की गई है.

विदेशी बाजार से फंड क्यों जुटा रहे हैं भारतीय बैंक?

आजकल कई सरकारी और प्राइवेट बैंक विदेशों से पैसा जुटा रहे हैं. इसकी एक बड़ी वजह रिजर्व बैंक (RBI) का नया नियम है, जिसमें बैंकों को विदेश से एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग(ECB ) जुटाने के लिए विशेष छूट दी जा रही है,जो इस साल के अंत तक जारी रहेगी.

इससे पहले IDFC First Bank ने विदेशी बॉन्ड्स के जरिए 50 करोड़ डॉलर जुटाए थे. वहीं, Kotak Mahindra Bank ने भी अपनी पहली 5 साल की बॉन्ड जारी कर करीब 65 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाई थी.

अब HDFC Bank की 1.75 अरब डॉलर की यह फंडिंग डील इल लिस्ट की सबसे बड़ी डील बन गई है. 

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