भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा या नहीं? इस बहस के बीच प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव शक्तिकांत दास ने बड़ा भरोसा जताते हुए कहा है कि 'विकसित भारत' अब कोई दूर की कल्पना नहीं, बल्कि ऐसा लक्ष्य है जिसे देश हासिल करके रहेगा. उन्होंने कहा कि मजबूत आर्थिक विकास, निवेश, बेहतर शासन व्यवस्था और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदम भारत को इस मंजिल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे.
दिल्ली में आयोजित 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव और रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि साल 2047 तक विकसित भारत बनने की छलांग पूरी तरह संभव है.
उन्होंने कहा, "विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल कल्पना की दुनिया में नहीं है, बल्कि यह ऐसा लक्ष्य है जिसे भारत हासिल करेगा."
दास ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत प्रदर्शन कर रही है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है. ये मजबूत मांग और निवेश के अनुकूल माहौल का संकेत देती है. हालांकि उन्होंने आगाह किया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताएं दुनिया की आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं.
वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत की नीति कारगर रही: शक्तिकांत दास
उन्होंने कहा कि आज दुनिया युद्धों, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों जैसी चुनौतियों से जूझ रही है. ऐसे समय में कौटिल्य के विचार और उनकी आर्थिक समझ पहले से अधिक प्रासंगिक दिखाई देती है. दास के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनसे निपटने में भारत की नीतिगत मजबूती मददगार साबित हुई है.
शक्तिकांत दास ने कहा कि कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं सार्वजनिक कर्ज के बढ़ते बोझ से जूझ रही हैं, जबकि भारत की मजबूती का आधार बेहतर शासन, सरकारी क्षमता में वृद्धि और मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिरता है. उन्होंने कहा कि बाहरी क्षेत्र (एक्सटर्नल सेक्टर) के विवेकपूर्ण प्रबंधन ने भी देश की मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता को मजबूत किया है.
4 साल में औसत आर्थिक वृद्धि दर 7.9
शक्तिकांत दास बताया कि कोविड महामारी के बाद के दौर में भारत की अर्थव्यवस्था ने लगातार मजबूती दिखाई है. वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2026 के बीच देश की औसत आर्थिक वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रही है. उनके अनुसार, दीर्घकालिक उत्पादक क्षमता में किए जा रहे निवेश ने भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव को और मजबूत बनाया है.
विकसित भारत के रोडमैप पर बात करते हुए दास ने कहा कि देश स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है. इसके साथ ही जलवायु नेतृत्व, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की संभावनाओं का उपयोग और रणनीतिक आत्मनिर्भरता जैसे कदम भविष्य की आर्थिक वृद्धि को टिकाऊ बनाएंगे.
इस साल कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव का विषय "Resilience in an Age of Flux" रखा गया था. सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक झटकों, व्यापारिक विखंडन, निवेश, तकनीक और भारत की आर्थिक प्राथमिकताओं जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.
तीन दिन तक चले इस आयोजन में 180 से अधिक नीति निर्माता, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद, वित्तीय विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय विचारक शामिल हुए. इनमें करीब 30 देशों के 80 से अधिक विदेशी प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.
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