- सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर 1 मई से शुरू होने वाले अगले पखवाड़े के लिए एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाई है.
- डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 23 रुपये प्रति लीटर व एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर 33 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है.
- पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य बनी हुई है. घरेलू खपत के लिए एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव किया है. वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि केंद्र सरकार ने 1 मई से शुरू होने वाले अगले पखवाड़े के लिए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को घटाया है. जबकि पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी अभी भी शून्य बनी हुई है. डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी की दर 23 रुपये प्रति लीटर होगी. (SAED - 23 रुपये; RIC- शून्य). इसके अलावा, ATF के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी की दर 33 रुपये प्रति लीटर होगी. (केवल SAED). पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी की दर अभी भी शून्य बनी हुई है.
कुछ खास प्रोडक्ट्स पर SAED लगाती है सरकार
दरअसल स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) एक लचीला टैक्स है, जिसे सरकार कुछ खास प्रोडक्ट्स पर लगाती है. मुख्य रूप से घरेलू कच्चे तेल और एक्सपोर्ट किए जाने वाले पेट्रोलियम फ्यूल जैसे पेट्रोल, डीजल और ATF पर पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लगाई जाती है.
अप्रैल में बढ़ाई गई थी एक्सपोर्ट ड्यूटी
- अप्रैल में, केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी थी, जिसमें हाई-स्पीड डीजल पर लेवी बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर 42 रुपये प्रति लीटर कर दी गई थी.
- इस बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 22 अप्रैल को एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसका मकसद फ्यूल की परिभाषाओं और रेगुलेटरी प्रावधानों को बदलते इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स के साथ तालमेल बिठाना है.
- नए नियमों के तहत, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) को अब सिंथेटिक फ्यूल के साथ मिलाया जा सकता है. इस कदम का मकसद वैकल्पिक और मिश्रित एविएशन फ्यूल के बढ़ते इस्तेमाल के बीच फ्यूल स्टैंडर्ड्स में स्पष्टता लाना है.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) द्वारा जारी एक गजट नोटिफिकेशन में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (मार्केटिंग का रेगुलेशन) आदेश, 2001 में किए गए संशोधन का विवरण दिया गया है. नए G.S.R. 301(E) नोटिफिकेशन के तहत, एविएशन टर्बाइन फ्यूल की परिभाषा का विस्तार किया गया है.
अब इसे हाइड्रोकार्बन के एक जटिल मिश्रण के रूप में पहचाना जाता है जो IS 1571 विनिर्देशों के अनुरूप है, या IS 17081 में निर्दिष्ट सिंथेसाइज़्ड हाइड्रोकार्बन के साथ इसका मिश्रण है.
एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाने के मायने क्या?
इससे कंपनियों के लिए राहत की बात है. डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाने से रिफाइनरी कंपनियों का मार्जिन सुधरेगा और उन्हें एक्सपोर्ट करने में राहत मिलेगी. दरअसल जब वैश्विक बाजार में कीमतें ज्यादा होती हैं, तो कंपनियां ज्यादा मुनाफे के लिए बाहर माल भेजती हैं. एक्सपोर्ट ड्यूटी में फेरबदल का मकसद यह तय करना है कि घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो और पर्याप्त स्टॉक बना रहे.
जानिए एक्साइज ड्यूटी क्या होता है
एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) एक अप्रत्यक्ष कर है, जो देश के भीतर निर्मित वस्तुओं पर केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाता है. यह उत्पादन स्तर पर लगता है, न कि बिक्री पर. अभी यह मुख्य रूप से पेट्रोल, डीजल और शराब पर लागू है, क्योंकि इन्हें GST से बाहर रखा गया है.
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