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The Gold Story: तब इंदिरा, चिदंबरम, जेटली और अब PM मोदी, सोने पर सरकार की अपील नई बात नहीं! देश के खजाने से संबंध समझ लें

Not to Buy Gold Please... Govt. : सोना न खरीदने की अपील कोई नई बात नहीं, 1967 में इंदिरा गांधी से लेकर 2013 में चिदंबरम और 2015 में अरुण जेटली तक, सरकार की ओर से अपीलें होती रही हैं. अब PM मोदी ने 1 साल तक सोना न खरीदने की अपील की है. इसके पीछे जो गणित है, वो सरकारी खजाने से जुड़ा है. समझ लीजिए कैसे.

The Gold Story: तब इंदिरा, चिदंबरम, जेटली और अब PM मोदी, सोने पर सरकार की अपील नई बात नहीं! देश के खजाने से संबंध समझ लें
सोना न खरीदने की अपील कोई नई बात नहीं, पहले भी सरकारें करती रही हैं, यहां डिटेल में पढ़ें खबर

Govt Appeals not to Buy Gold: भारत में सोना केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि एक भावनात्‍मक जुड़ाव की चीज है. हालांकि जब-जब देश की अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल छाए हैं, तब-तब देश की सरकार ने सोने के प्रति भारतीयों के मोह को कम करने की कोशिश की है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गहराते वैश्विक आर्थिक संकट और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीयों से कम से कम एक साल तक सोना न खरीदने की अपील (PM Modi Gold Appeal) की है. इस अपील के समर्थन और विरोध पर खूब चर्चा भी हो रही है. हालांकि, ये ऐसा कोई पहला मौका नहीं है.

इससे पहले 1967 में इंदिरा गांधी ने 'राष्ट्रीय अनुशासन' के नाम पर, 2013 में तत्‍कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने 'आर्थिक जिम्मेदारी' के तौर पर और 2015 में अरुण जेटली ने डिजिटल गोल्ड के जरिए सोने के आयात को नियंत्रित करने की कोशिश की थी.

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इन सभी अपीलों के पीछे एक ही सबसे बड़ा कारण रहा है- भारत का विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाता घाटा (CAD).

4 प्‍वाइंट में समझें- सरकारी खजाने से कैसे है सीधा संबंध 

सोना खरीदने का सीधा संबंध हमारे विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) से होता है. इसे आसान कैलकुलेशन में समझने की कोशिश करते हैं.  

  • 1. डॉलर में भारी खर्च

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर है, लेकिन हम अपनी जरूरत का बहुत बड़ा हिस्‍सा आयात करते हैं. सोने के हर एक औंस (Ounce) का भुगतान हमें अमेरिकी डॉलर में करना पड़ता है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 72 बिलियन डॉलर के सोने का आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24% अधिक है. भारत की कुल आयात सूची में सोना अकेले लगभग 10% की हिस्सेदारी रखता है.

  • 2. चालू खाता घाटा (CAD) पर दबाव

जब हम निर्यात से कम कमाते हैं और आयात पर ज्यादा डॉलर खर्च करते हैं, तो 'चालू खाता घाटा' (CAD) बढ़ जाता है. IMF का अनुमान है कि 2026 में भारत का CAD बढ़कर 84.5 बिलियन डॉलर हो सकता है. सोने का 72 बिलियन डॉलर का आयात बिल इस घाटे की सबसे बड़ी वजह है.

  • 3. विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट

अप्रैल 2026 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 691 बिलियन डॉलर के आसपास आ गया है, जो कि फरवरी में 728 बिलियन डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच गया था. दूसरी ओर, ईरान युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 88% तेल आयात करता है, इसलिए डॉलर की प्राथमिकता तेल के लिए है, न कि सोने के लिए.

  • 4. सोना न खरीदने से क्या बचेगा?

अगर सोने के आयात में 30-40% की गिरावट आती है, तो देश के 25 अरब डॉलर बचेंगे. यदि गिरावट 50% होती है, तो 36 अरब डॉलर की बचत होगी. और यदि एक साल तक पूरा देश ही सोना न खरीदे, तो पूरे 72 बिलियन डॉलर (लगभग 6.84 लाख करोड़ रुपये) बच सकते हैं. ये राशि भारत के अनुमानित CAD का आधा हिस्सा कवर कर सकती है और रुपये को डॉलर के मुकाबले मजबूती देगी.

अब थोड़ा इतिहास में झांक लेते हैं..

इंदिरा गांधी, जून 1967 

6 जून 1967 को तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीय अनुशासन और बलिदान के नाम पर देश‍वासियों ने सोना न खरीदने का आग्रह किया था. 

  • क्या अपील की: इंदिरा गांधी ने सार्वजनिक रूप से नागरिकों से 'किसी भी रूप में' सोना न खरीदने की अपील की थी.
  • क्यों की: उस वक्त भारत भीषण विदेशी मुद्रा संकट और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहा था. विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव था.
  • असर: सरकार ने 'गोल्ड कंट्रोल ऑर्डर्स' के तहत प्रतिबंध भी लगाए थे ताकि डॉलर की बचत की जा सके.

पी. चिदंबरम, जून, 2013

14 जून 2013 को तत्‍कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने एक साल सोना न खरीदने की अपील की थी. 

  • क्या अपील की: चिदंबरम ने कहा था, 'अगर भारत के लोग मेरी एक इच्छा पूरी कर सकें, तो वो ये है कि सोना न खरीदें.'
  • क्यों की: दिसंबर 2012 में CAD रिकॉर्ड 6.7% पर पहुंच गया था और रुपया डॉलर के मुकाबले तेजी से गिर रहा था.
  • असर: सरकार ने सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ाकर 8% कर दिया था ताकि लोग कम सोना खरीदें और व्यापार घाटा कम हो.

अरुण जेटली, फरवरी, 2015

तत्‍कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में सोने के मुद्रीकरण और डिजिटल निवेश को बढ़ावा देने का प्रस्‍ताव रखा था. 

  • क्या अपील की: जेटली ने फिजिकल गोल्‍ड खरीदने की बजाय गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) का प्रस्ताव रखा.
  • क्यों की: सरकार, घरों और मंदिरों में पड़े 20,000 टन (तब का अनुमान) निष्क्रिय सोने को अर्थव्यवस्था में लाने और आयात कम करना चाहती थी.
  • असर: 'इंडियन गोल्ड कॉइन' लॉन्च किया गया ताकि विदेशों से आने वाले सिक्कों की मांग घटे और घरेलू सोने को रीसायकल किया जा सके.

PM नरेंद्र मोदी, मई, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई की शाम देश के नागरिकों से आर्थिक देशभक्ति का आह्वान करते हुए एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की. 

  • क्या अपील की: पीएम मोदी ने नागरिकों से कम से कम एक वर्ष तक सोने की खरीद टालने और ईंधन की खपत कम करने का आग्रह किया है.
  • क्यों की: पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे भारत का आयात बिल $775 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है.
  • अपेक्षित असर: PM मोदी की अपील के पक्षधर इसे आर्थिक देशभक्ति के रूप में पेश कर रहे हैं, ताकि डॉलर को सुरक्षित रखा जा सके और युद्ध जैसी स्थितियों में रुपये की वैल्‍यू न गिरे.  

सोने में निवेश: इकोनॉमी के लिए 'फ्रीज' पैसा

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सोना खरीदना अर्थव्यवस्था के चक्र को धीमा करता है. एक्‍सपर्ट्स समझाते हैं कि यदि आप 1 लाख रुपये बैंक में जमा करते हैं, तो वह पैसा लोन के रूप में किसी बिजनेस या इंफ्रास्ट्रक्चर में लगता है. लेकिन सोने के रूप में तिजोरी में रखा पैसा 'फ्रीज' हो जाता है.

जमीन खरीदे जाने पर भी वहां खेती हो सकती है. मकान बने तो कंस्‍ट्रक्‍शन सामग्री और मजदूरी के लिए पैसा सर्कुलेट होगा.  फैक्ट्री से उत्पादन हो सकता है, लेकिन सोना देश की GDP में कोई सक्रिय मूल्य नहीं जोड़ता.

भारतीय घरों में आज लगभग 50,000 टन सोना है, जिसकी वैल्यू 10 ट्रिलियन डॉलर (करीब 830 लाख करोड़ रुपये) है, जो कि दुनिया के टॉप-10 सेंट्रल बैंकों के भंडार से भी ज्यादा है. सोने के प्रति भारतीयों का मोह कम नहीं होता. दूसरी ओर वैश्विक स्‍तर पर कच्‍चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं, जबकि गैस के दाम भी कमोबेश नियंत्रित हैं. हालांकि आगे के लिए आशंका जताई जा रही है कि तेल और गैस महंगे हो सकते हैं. 

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