भारत में यूपीआई पेमेंट को और तेज और आसान बनाने के लिए वन क्लिक यूपीआई फीचर की तैयारी चल रही है. लेकिन NPCI का यही नया प्रस्ताव अब पेमेंट कंपनियों के बीच विवाद की वजह बन गया है. पेटीएम, मेटा समर्थित क्रेड, फ्लिपकार्ट की सुपर मनी समेत कई फिनटेक कंपनियों ने NPCI को पत्र लिखकर कहा है कि अगर यह फीचर लागू हुआ तो गूगल पे और फोनपे जैसे बड़े ऐप्स को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा. वहीं छोटे और नए यूपीआई ऐप्स के लिए मुकाबला करना और मुश्किल हो जाएगा.
वन क्लिक UPI फीचर क्या है?
NPCI एक नया फीचर लाने की तैयारी में है, जिसे फिलहाल यूपीआई मेटा या यूपीआई चेकआउट कहा जा रहा है. इसके तहत किसी मर्चेंट ऐप या वेबसाइट, जैसे अमेजन, स्विगी या जोमैटो पर यूजर अपना पसंदीदा यूपीआई आईडी या लिंक्ड बैंक अकाउंट एक बार सेव कर सकेगा.
इसके बाद हर बार पेमेंट करते समय अलग से फोनपे, गूगल पे, पेटीएम या किसी दूसरे यूपीआई ऐप को चुनने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यूजर सीधे पिन या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करके पेमेंट पूरा कर सकेगा. इससे पेमेंट पहले से ज्यादा तेज होगा, ऐप अप्रूवल का झंझट खत्म होगा. साथ ही ट्रांजैक्शन फेल होने की संभावना भी कम हो सकती है.
फिर पेटीएम और क्रेड को क्यों है आपत्ति?
पेटीएम, क्रेड, सुपर मनी और कुछ दूसरी फिनटेक कंपनियों का कहना है कि एक बार अगर कोई यूजर किसी एक यूपीआई ऐप को सेव कर देगा, तो वह बाद में उसे बदलने की संभावना बहुत कम होगी. कंपनियों का कहना है कि इससे ग्राहकों की पसंद एक ही ऐप पर टिक जाएगी. इसका सबसे ज्यादा फायदा उन ऐप्स को मिलेगा जिनके पास पहले से सबसे ज्यादा यूजर हैं. इन कंपनियों का मानना है कि नए और छोटे यूपीआई ऐप्स के लिए यूजर तक पहुंचना और उन्हें अपनी तरफ लाना काफी मुश्किल हो जाएगा. इससे मार्केट में कॉम्पिटिशन पर असर पड़ सकता है.
गूगल पे और फोनपे पहले से ही सबसे आगे...
अभी भारत में होने वाले कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन का करीब 80% हिस्सा सिर्फ फोनपे और गूगल पे के पास है. इसी वजह से विरोध करने वाली कंपनियों का कहना है कि नया सिस्टम लागू होने के बाद इन दोनों प्लेटफॉर्म का दबदबा और मजबूत हो सकता है. 23 जुलाई को NPCI को भेजे गए पत्र में इन कंपनियों ने कहा कि यह प्रस्ताव कॉम्पिटिशन को नुकसान पहुंचा सकता है और बाजार कुछ बड़े खिलाड़ियों तक सीमित हो सकता है.
यूपीआई कितना बड़ा नेटवर्क बन चुका है?
NPCI के आंकड़ों के मुताबिक जून में यूपीआई के जरिए 227 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन हुए. इनकी कुल वैल्यू 28 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रही. यही वजह है कि यूपीआई दुनिया के सबसे बड़े फास्ट पेमेंट नेटवर्क में शामिल हो चुका है.
यूपीआई में कुछ बड़े ऐप्स का बढ़ता दबदबा पहले भी चिंता का विषय रहा है. इसी कारण NPCI ने 2020 में किसी एक यूपीआई ऐप की मार्केट हिस्सेदारी 30% तक सीमित करने की योजना बनाई थी. हालांकि इसे कई बार टाल दिया गया. फिलहाल इसका पालन करने की नई डेडलाइन दिसंबर 2026 तय की गई है.
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