विज्ञापन

युद्ध का माहौल... सोना 70 फीसदी चढ़ा और औंधे मुंह गिरा! क्‍या 1980 जैसा फिर होगा?

Iran-Israel War Impact on Gold: साल 1980 में युद्ध के दौर में सोने की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी थीं और फिर अचानक गिर गई थीं, क्या वैसा अब दोबारा हो सकता है?

युद्ध का माहौल... सोना 70 फीसदी चढ़ा और औंधे मुंह गिरा! क्‍या 1980 जैसा फिर होगा?

Iran-Israel War Impact on Gold: शेयर बाजार में उथल‑पुथल हो या देशों के बीच जंग का माहौल, ऐसे समय में निवेशकों को सबसे सेफ निवेश सोना ही लगती है. माना जाता है कि जब हालात बिगड़ते हैं, तो सोना चमकने लगता है. लेकिन क्या सोना हर बार पूरी तरह सेफ है? जवाब है नहीं. इतिहास बताता है कि कुछ मौके ऐसे भी आए हैं जब सोने ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है. दरअसल आज जब मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा हुआ है, तो एक्सपर्ट साल 1980 को याद कर रहे हैं. उस साल सोने की कीमत करीब 70% तक बढ़ गई थी, क्योंकि दुनिया में युद्ध, तेल का संकट और महंगाई का डर था. लोगों ने सोच‑समझे बिना सोने में पैसा डाल दिया. लेकिन इसके बाद हालात बदले, ब्याज दरें बढ़ीं और डर कम हुआ. नतीजा ये हुआ कि सोने की कीमत अचानक गिर गई और कई निवेशकों को भारी नुकसान हुआ.

अब सवाल ये है कि क्या 2026 में भी वैसा ही बड़ा क्रैश आ सकता है? एक्सपर्ट भी समय-समय पर निवेशकों को सलाह देते हुए नजर आए कि सोना एक सेफ ऑप्शन है, लेकिन सिर्फ डर के माहौल में आंख मूंदकर निवेश करना सही नहीं होता. ग्लोबल मार्केट, ब्याज दरें सभी मिलकर तय करते हैं कि सोना आगे क्या करेगा.

1980 में जब सोना बना था रॉकेट

साल 1979 के आखिर में दुनिया में हालात बहुत खराब थे. ईरान में क्रांति की वजह से तेल की कीमतें अचानक बढ़ गई थीं और उधर सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया था. चारों तरफ टेंशन और युद्ध जैसी स्थिति थी. ऐसे माहौल में निवेशक डर गए और उन्होंने शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में लगाना शुरू कर दिया. नतीजा ये हुआ कि जो सोना 1979 के आखिर तक करीब 500 डॉलर प्रति औंस था, वो कुछ ही हफ्तों में तेजी से बढ़कर 850 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया. यानी सोने की कीमत करीब 70 फीसदी उछल गई. उस समय लोगों को लगने लगा था कि सोने की कीमतें अब नहीं गिरेंगी, लेकिन आगे चलकर हालात कुछ और ही हो गए. 

ये भी पढ़ें- विदेश यात्रा कम कर हर साल इतने करोड़ बचा सकते हैं भारतीय, PM मोदी की अपील के बीच समझें कैलकुलेशन

यूएस फेड ने तोड़ी सोने की कमर

जब सोने की कीमत 850 डॉलर तक पहुंच गई, तब अमेरिका के रिजर्व बैंक फेडरल रिजर्व ने बाजार की दिशा ही बदल दी. महंगाई को काबू में करने के लिए फेड ने ब्याज दरें बढ़ाकर 20% कर दीं. इसका सीधा असर सोने पर पड़ा. जैसे ही ब्याज दरें बढ़ीं, लोगों को सोने की बजाय डॉलर में पैसा लगाना फायदेमंद लगने लगा. डॉलर मजबूत हुआ और सोने की डिमांड गिर गई. नतीजा ये हुआ कि साल 1980 के आखिर तक सोना 850 डॉलर से गिरकर 600 डॉलर पर आ गया और कुछ ही सालों में 300 से 400 डॉलर के दायरे में सिमट गया. यानी जिन लोगों ने ऊंचे दामों पर सोना खरीदा था, उन्हें बाद में नुकसान उठाना पड़ा.

क्या इतिहास दोहराया जाएगा?

सवाल ये है कि क्या आज सोने में वही हालात बन रहे हैं, जैसे 1980 में बने थे, जब कीमतें बहुत ऊपर जाकर अचानक गिर गई थीं. बाहर से देखने पर हालात थोड़े मिलते-जुलते जरूर हैं. तब भी युद्ध और अनिश्चितता थी, आज भी रूस‑यूक्रेन युद्ध और ईरान‑इजरायल तनाव है और सोना रिकॉर्ड लेवल के पास है.

लेकिन असल में आज और 1980 में बड़ा फर्क है. 1980 में आम लोग ज्यादा सोना खरीद रहे थे, जबकि आज भारत, चीन और तुर्की जैसे देशों के रिजर्व बैंक खुद बड़ी मात्रा में सोना जमा कर रहे हैं. इससे सोने की कीमतों को बड़ा सपोर्ट मिल रहा है. दूसरा बड़ा फर्क ब्याज दरों का है. साल 1980 में महंगाई इतनी ज्यादा थी कि फेड को ब्याज दरें 20% तक ले जानी पड़ी थीं, जिससे सोना टूटा था. आज ब्याज दरें करीब 5% के आसपास हैं और आगे इनके घटने की उम्मीद है. जब ब्याज दरें गिरती हैं, तो सोना आमतौर पर और मजबूत होता है.

ये भी पढ़ें- Work From Home: वर्क फ्रॉम होम के लिए कितना तैयार है भारत? PM मोदी की अपील के बीच जानिए देश का मूड

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Gold Price Crash 1980, Gold Investment Strategy, Iran-Israel War Impact On Gold, US Fed Interest Rates Gold, Safe Haven Asset Gold
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com