अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने इस बात से इनकार किया है कि उनके खिलाफ आपराधिक आरोपपत्र को खारिज करने के अमेरिकी न्याय विभाग के फैसले के पीछे कोई वादा, समझौता या सौदा था. इसके साथ ही अमेरिकी अदालत में दाखिल हलफनामे में उन्होंने कहा है कि उन्हें इस संबंध में किसी भी तरह के लेन-देन की जानकारी नहीं है. यह हलफनामा अमेरिका में न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले की जिला अदालत के न्यायाधीश निकोलस गराउफिस के निर्देश पर दाखिल किया गया है. जिला न्यायाधीश ने आठ जुलाई को अदाणी से शपथ लेकर यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या आरोपों को वापस लेने के फैसले के संबंध में उन्हें किसी प्रस्ताव, समझौते या लाभ की जानकारी है.
अदाणी ने अपने हलफनामे में कहा है कि उन्हें 'किसी भी तरह के वादे, पेशकश, मांग, प्राप्ति, सहमति या स्वीकार' के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि आरोप हटाने के बदले में किसी मूल्यवान चीज के आदान-प्रदान से जुड़ा कोई समझौता हुआ था.
अमेरिकी न्याय विभाग ने वर्ष 2024 में तत्कालीन जो बाइडेन प्रशासन के दौरान दायर आरोपों को वापस लेने का अदालत से अनुरोध किया था. इन आरोपों में अदाणी और सात अन्य पर भारत में बिजली आपूर्ति अनुबंध हासिल करने के लिए करीब 25 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने और अमेरिकी बाजारों में पूंजी जुटाते समय निवेशकों को गुमराह करने का आरोप लगाया गया था.
अदाणी की तरफ से अमेरिकी प्रशासन के लगाए सभी आरोपों को खारिज किया जा चुका है.
आरोपपत्र सार्वजनिक होने से पहले अमेरीका में निवेश की योजना
अदाणी ने अपने हलफनामे में कहा है कि उनके समूह की अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश की योजना 13 नवंबर, 2024 को सार्वजनिक की गई थी, जो आरोपपत्र सार्वजनिक होने से पहले की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस निवेश योजना का आरोप हटाने के निर्णय से कोई संबंध नहीं है.
शपथ-पत्र के मुताबिक, अदाणी की कानूनी सलाहकार फर्म सुलिवन एंड क्रॉमवेल एलएलपी ने न्याय विभाग और प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) के अधिकारियों के साथ बैठकें कीं और विस्तृत दस्तावेज प्रस्तुत किए. हालांकि, बाद में विभाग ने स्पष्ट किया कि निवेश प्रस्ताव को मामले के निपटान निर्णय में शामिल नहीं किया जाएगा.
इससे पहले चार जुलाई को दायर एक हलफनामे में न्याय विभाग ने मीडिया में आई उन खबरों को खारिज किया था, जिनमें मामले को खत्म करने को निवेश प्रतिबद्धताओं से जोड़ा गया था.
विभाग ने कहा था कि अभियोजन कानूनी और साक्ष्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा था, क्योंकि कथित घटनाएं मुख्य रूप से भारत में हुई थीं, निवेशकों को नुकसान का कोई प्रमाण नहीं था और मामला भारत में भी जांच के दायरे में है.
किसी निवेश प्रस्ताव से आरोप हटाने का फैसला नहीं
विभाग के वरिष्ठ अधिकारी आर. ट्रेंट मैककॉटर ने अदालत को बताया था कि आरोप हटाने का फैसला उन्होंने स्वतंत्र रूप से लिया और इसका किसी निवेश प्रस्ताव से कोई संबंध नहीं था. उन्होंने कहा कि प्रतिभूति धोखाधड़ी का मामला कानूनी रूप से टिकने लायक नहीं था और आरोपियों के अमेरिकी अदालत में पेश होने की संभावना भी कम थी.
हालांकि, न्यायाधीश गराउफिस ने कहा था कि विभाग के ताजा हलफनामे से पहली बार यह संभावना सामने आई कि किसी तरह का समझौता हो सकता था, जबकि अदालत को कोई जानकारी नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि आरोप हटाने के अनुरोध को मंजूरी देने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इस निर्णय के पीछे के कारण वास्तविक हैं और कोई ‘अज्ञात' समझौता इसमें शामिल नहीं है.
उल्लेखनीय है कि नवंबर, 2024 में आरोप सार्वजनिक होने के बाद अदाणी समूह के शेयरों में तेज गिरावट आई थी और चार कारोबारी सत्रों में ही करीब 2.85 लाख करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण घट गया था.
अमेरिकी अदालत अब न्याय विभाग के आरोपों को स्थायी रूप से खारिज करने के अनुरोध पर निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों की दलीलों पर विचार कर रही है.
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