- भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडराया नया खतरा! वित्त मंत्रालय ने मानसून और वैश्विक संकट को लेकर दी चेतावनी.
- अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत, लेकिन 3 बड़े खतरे बढ़ा सकते हैं मुश्किलें. वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में बड़ा संकेत
- महंगाई से राहत, लेकिन मानसून और युद्ध बन सकते हैं नई चुनौती..
वर्ल्ड ऑर्डर में लगातार उठापटक के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है. कारोबार बढ़ रहा है, उद्योगों में गतिविधियां जारी हैं और निर्यात भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. लेकिन वित्त मंत्रालय का कहना है कि आने वाले महीनों में तीन बड़े खतरे देश की आर्थिक रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं. ये खतरे हैं- कमजोर मानसून, एल नीनो का असर और दुनिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव.
वित्त मंत्रालय की ताजा मंथली इकोनॉमिक रिव्यू में कहा गया है कि 2025-26 में शानदार प्रदर्शन के बाद 2026-27 की शुरुआत भी अच्छी रही है. हालांकि कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जो बताते हैं कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार पहले के मुकाबले थोड़ी धीमी पड़ सकती है.
रिपोर्ट के मुताबिक ई-वे बिल, फैक्ट्रियों में बढ़ती गतिविधियां, बिजली की खपत और ऑटोमोबाइल की बिक्री जैसे आंकड़े बताते हैं कि देश में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं.
हालांकि दूसरी तरफ कुछ ऐसे संकेत भी मिले हैं जो चिंता बढ़ाते हैं. कोर इंडस्ट्री की ग्रोथ, ईंधन की खपत, हवाई यात्रियों की संख्या और रोजगार से जुड़े कुछ संकेतकों में नरमी देखने को मिली है.
महंगाई पर राहत
महंगाई को लेकर फिलहाल राहत की खबर है. वित्त मंत्रालय का कहना है कि दुनिया में कच्चे तेल और दूसरी कमोडिटी की कीमतें कम होने से भारत में महंगाई पर दबाव घट सकता है. यूरिया जैसे जरूरी इनपुट भी सस्ते हुए हैं, जिससे आयातित महंगाई कम रहने की उम्मीद है.
सरकार का मानना है कि जरूरी कृषि उत्पादों का पर्याप्त भंडार और सप्लाई बनाए रखने के लिए उठाए गए कदम भी कीमतों को काबू में रखने में मदद करेंगे.

विदेशी निवेश
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निवेश बढ़ रहे
रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्योगों में निवेश लगातार बढ़ रहा है और सरकार के सुधारों का भी असर दिखाई दे रहा है. इससे औद्योगिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं.
विदेशी मोर्चे पर भी भारत की स्थिति अच्छी बताई गई है. निर्यात मजबूत है, विदेशी निवेश आ रहा है और देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार भी मौजूद है.
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है. इससे भारत को बड़ी राहत मिली है क्योंकि तेल सस्ता होने से महंगाई और आयात बिल दोनों पर दबाव कम होता है.

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मध्य पूर्व तनाव के बावजूद आर्थिक मजबूती
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल की सप्लाई प्रभावित होती है या मध्य-पूर्व में फिर तनाव बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें दोबारा बढ़ सकती हैं. इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा.
वित्त मंत्रालय का कहना है कि मध्य-पूर्व में लंबे समय तक चले तनाव के बावजूद भारत ने अपनी आर्थिक मजबूती बनाए रखी. सरकार ने समय रहते ऐसे कदम उठाए जिससे ऊर्जा संकट का असर सीमित रहा.
विदेशी निवेशक सरकारी बॉन्ड खरीद रहे
रिपोर्ट में एक और अच्छी खबर यह है कि विदेशी निवेशक फिर से भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में लौट रहे हैं. मंत्रालय का मानना है कि आने वाले समय में शेयर बाजार में भी विदेशी निवेश बढ़ सकता है.

सबसे बड़ी चिंता बनी मानसून
हालांकि सबसे बड़ी चिंता इस समय मानसून को लेकर है. रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई और अगस्त में बारिश बेहतर रहने की उम्मीद है, लेकिन मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है. ऐसे में बारिश कब, कहां और कितनी होगी, इसका अनुमान लगाना पहले से ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है.
इसी वजह से वित्त मंत्रालय ने जल संरक्षण, पानी के दोबारा इस्तेमाल और जल जीवन मिशन के बजट का बेहतर उपयोग करने पर जोर दिया है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अब खेती की नीति में बदलाव की जरूरत है. किसानों को ऐसी फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जिन्हें कम पानी की जरूरत हो और जो बदलते मौसम का बेहतर सामना कर सकें.
रिपोर्ट में वित्त मंत्रालय ने साफ कहा है कि दुनिया में तेजी से बदलते हालात और जलवायु से जुड़ी चुनौतियां आने वाले वर्षों में नई आर्थिक मुश्किलें पैदा कर सकती हैं. ऐसे में भारत को पहले से तैयारी करके अपनी आर्थिक मजबूती बनाए रखनी होगी.
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