दिल्ली में सरकारी विभागों और दूसरी सरकारी संस्थाओं में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है. दिल्ली सरकार ने त्योहारों से पहले इन कर्मचारियों को बोनस देने का निर्देश दिया है. इसके लिए लेबर डिपार्टमेंट ने एडवाइजरी जारी की है. इसके तहत ठेकेदारों को वित्त वर्ष 2025-26 का बोनस 30 नवंबर 2026 तक देना होगा. नियम का पालन नहीं करने पर ठेकेदारों और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.
कर्मचारियों के बोनस पर दिल्ली सरकार सख्त
दिल्ली सरकार के लेबर डिपार्टमेंट ने सोमवार को सभी सरकारी विभागों, स्वायत्त संस्थाओं और पब्लिक सेक्टर कंपनियों (PSU) को यह निर्देश दिया. इसमें कहा गया है कि वे अपने यहां काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों को तय नियमों के मुताबिक बोनस दिलाना सुनिश्चित करें.
एडवाइजरी के मुताबिक, ठेकेदारों को वित्त वर्ष खत्म होने के आठ महीने के भीतर कर्मचारियों को बोनस देना जरूरी है. इसी नियम के तहत 2025-26 के बोनस भुगतान की आखिरी तारीख 30 नवंबर 2026 तय की गई है.
किन कर्मचारियों को मिलेगा बोनस?
दिल्ली सरकार की एडवाइजरी के मुताबिक, जिन आउटसोर्स कर्मचारियों की मासिक सैलरी 21,000 रुपये तक है और जिन्होंने साल में कम से कम 30 दिन काम किया है, वे बोनस पाने के हकदार होंगे.हालांकि, 21,000 रुपये से ज्यादा सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को बोनस देना या नहीं देना कंपनी या नियोक्ता की मर्जी पर निर्भर करेगा.
8.33% से 20% तक मिलेगा बोनस
नए नियमों के तहत कर्मचारियों को कम से कम 8.33% बोनस देना जरूरी है. यह रकम 100 रुपये से कम नहीं हो सकती. वहीं, अधिकतम बोनस 20% तक दिया जा सकता है.बोनस कैलकुलेशन 7,000 रुपये या संबंधित कर्मचारी की न्यूनतम मजदूरी, दोनों में से जो ज्यादा होगी, उसके आधार पर की जाएगी. दिल्ली सरकार ने साफ किया है कि यहां 21,000 रुपये की वेतन सीमा लागू रहेगी.
नए वेज कोड के तहत लागू हुए नियम
यह निर्देश वेज कोड 2019 के तहत जारी किया गया है. यह कोड 21 नवंबर 2025 से लागू हो चुका है. इसके लागू होने के बाद पहले का पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट, 1965 खत्म हो गया है. अब कर्मचारियों के बोनस से जुड़े नियम नए कोड के तहत लागू होंगे.
बोनस नहीं दिया तो ठेकेदारों पर होगी कार्रवाई
दिल्ली सरकार ने ठेकेदारों को साफ चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने पात्र कर्मचारियों को बोनस नहीं दिया तो उनके खिलाफ जुर्माना और बकाया रकम की वसूली जैसी कार्रवाई हो सकती है. इसके लिए वेज कोड 2019 के तहत क्लेम भी किया जा सकता है.
इतना ही नहीं, अगर ठेकेदार बोनस का भुगतान करने में नाकाम रहता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित मुख्य नियोक्ता (Principal Employer) की भी होगी. ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSH) कोड 2020 के तहत मुख्य नियोक्ता को इसके लिए जवाबदेह माना जाएगा.
सरकारी विभागों को भी दी गई जिम्मेदारी
एडिशनल लेबर कमिश्नर यू.के. सिन्हा की ओर से जारी एडवाइजरी में सभी मुख्य नियोक्ताओं से कहा गया है कि वे त्योहारों के दौरान अपने ठेकेदारों से सभी पात्र आउटसोर्स कर्मचारियों को बोनस दिलवाएं. सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारियों को समय पर उनका पैसा मिले और ठेकेदार भुगतान में मनमानी न कर सकें.
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