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दिल्‍ली में बिजली बिल बढ़ने वाला है! DERC की कानूनी हार, ट्रिब्‍यूनल ने बकाया चुकाने के लिए नहीं दी मोहलत

Power Bill Hikes Likely: DERC ने दलील दी थी कि यदि भुगतान की अवधि को बढ़ाया जाता है, तो इससे उपभोक्ताओं पर बोझ कम पड़ेगा और टैरिफ में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को रोका जा सकेगा. ट्रिब्‍यूनल इस दलील से सहमत नहीं हुआ.

दिल्‍ली में बिजली बिल बढ़ने वाला है! DERC की कानूनी हार, ट्रिब्‍यूनल ने बकाया चुकाने के लिए नहीं दी मोहलत
Delhi Power Bill Hike: दिल्‍ली में बिजली बिल बढ़ने वाला है क्‍या?

दिल्‍ली में आने वाले दिनों में बिजली महंगी हो सकती है. बिजली का टैरिफ बढ़ सकता है और इसी के साथ बढ़ सकता है, उपभोक्‍ताओं का बिजली बिल भी. अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) ने DERC यानी दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) की वो याचिका खारिज कर दी है, जिसमें बिजली डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों से जुड़े करीब 30,000 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने के लिए मोहलत मांगी गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, अपीलीय प्राधिकार में DERC को मिली इस कानूनी हार के बाद अंदेशा जताया जा रहा है कि ये बोझ उपभोक्‍ताओं तक भी पहुंच सकता है और राजधानी में बिजली के बिल बढ़ सकते हैं. 

DERC की अपील, पसंद नहीं आई दलील 

अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में DERC ने दलील दी थी कि यदि 30,000 करोड़ के भारी बकाये के भुगतान के लिए मोहलत बढ़ा दी जाए तो इससे उपभोक्ताओं पर बोझ कम पड़ेगा और टैरिफ में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को रोका जा सकेगा. न्यायाधिकरण इस दलील से सहमत नहीं हुआ. 

अब दिल्ली पावर रेगुलेटर को मौजूदा पुनर्भुगतान डेडलाइन (repayment schedule) का ही पालन करना होगा. इस फैसले से बिजली की दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश- अप्रैल 2028 तक खत्‍म हो बकाया 

ये फैसला अगस्त 2025 में जारी किए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद आया है, जिसमें कोर्ट ने सभी राज्यों के बिजली नियामकों को अप्रैल 2024 से पिछले बकाये को निपटाना शुरू करने और अप्रैल 2028 तक पूरा भुगतान करने का आदेश दिया था. इसके साथ ही, अदालत ने नियामकों को बकाया राशि वसूलने के लिए, यदि जरूरी हो, तो बिजली दरों (Tariff) में संशोधन करने यानी बढ़ाने की भी अनुमति दी थी.

बाकी राज्‍यों से क्‍यों अलग हैं दिल्‍ली की मुश्किलें? 

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने दिल्ली को एक कठिन स्थिति में डाल दिया. हाल के वर्षों में राजधानी में उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरों में कमी की गई थी, लेकिन उसी समय सिस्टम में बकाया राशि (Unpaid dues) लगातार जमा होती रही और बढ़ती चली गई. 

दिल्ली की स्थिति उन राज्यों से भी अलग है जहां बिजली वितरण कंपनियां सरकारी हैं. तमिलनाडु जैसे राज्यों में, सरकारों ने संकेत दिया है कि वे उपभोक्ताओं पर सीधा बोझ डालने के बजाय इस घाटे का कुछ हिस्सा खुद वहन कर सकती हैं.

इसके उलट, दिल्ली में प्राइवेट जैसी व्‍यवस्‍था है. यहां डिस्कॉम (जैसे BSES यमुना पावर लिमिटेड और BSES राजधानी पावर लिमिटेड) प्राइवेट तौर पर संचालित होती हैं. ऐसे में बड़े पैमाने पर सब्सिडी सहायता के बिना राज्य सरकार के लिए उपभोक्ताओं को पूरी तरह राहत देना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

दिल्‍ली सरकार बढ़ा दे सब्सिडी, तभी राहत 

जानकारों के अनुसार, बकाये की इस मोटी रिकवरी के लिए या तो बिजली की दरों में बढ़ोतरी करनी होगी या फिर दूसरे राज्‍य की सरकारों की तरह दिल्ली सरकार को सब्सिडी बढ़ानी होगी. एक बीच का रास्‍ता इन दोनों विकल्‍पों का मिक्‍स हो सकता है. यानी बकाये का कुछ हिस्‍सा सरकार सब्सिडी के तौर पर दे और कुछ हिस्‍सा कंपनियां टैरिफ में बढ़ोतरी कर भरपाई कर सकती है. कहा जा रहा है कि जब तक फंडिंग का कोई वैकल्पिक समाधान नहीं मिल जाता, तब तक दिल्ली में घरों और व्यवसायों के बिजली बिलों में बढ़ोतरी हो सकती है.    

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