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मिडिल ईस्ट युद्ध की आग में तप रहा कच्चा तेल! 6 दिन में 6 जहाजों पर हमला, 100 डॉलर के पार पहुंचा भाव

US-iran war News:स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 6 दिनों में 6 जहाजों पर हमले के बाद कच्चा तेल $100 के पार निकल गया है. भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें फरवरी के मुकाबले 48% बढ़ चुकी हैं. जानें क्या होगा पेट्रोल-डीजल के दामों पर असर.

मिडिल ईस्ट युद्ध की आग में तप रहा कच्चा तेल! 6 दिन में 6 जहाजों पर हमला, 100 डॉलर के पार पहुंचा भाव
Strait of Hormuz Tension: युद्ध के पिछले 50 दिनों में सप्लाई बाधित होने के कारण 60 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सप्लाई रुक चुकी है.

Crude Oil Price Today: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन गया है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में आग लगा दी है. दुनिया भर के व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' (Strait of Hormuz) इस समय ईरान और अमेरिका के बीच टकराव का मुख्य केंद्र बन गया है. पिछले 6 दिनों में ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने इस रास्ते से गुजर रहे 6 कार्गो जहाजों पर हमला किया है.

ब्रिटेन की संस्था UKMTO के मुताबिक, 18 अप्रैल को दो भारतीय जहाजों (वीएलसीसी समनार हेराल्ड और जग अर्नव) पर हमला हुआ, जिसके बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा. वहीं 23 अप्रैल 2026 को फिर से एक भारतीय जहाज समेत 3 कार्गो जहाजों को निशाना बनाया गया.

तेल की सप्लाई बाधित, $106 तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड

ईरान युद्ध के बीच शांति वार्ता में हो रही देरी की वजह से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर करीब 2000 जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें 20,000 नाविक सवार हैं. इस रास्ते से दुनिया की 20% कच्चे तेल की सप्लाई होती है, जो फिलहाल बाधित है. इसी अनिश्चितता के कारण गुरुवार को ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स (Brent Oil Futures) की कीमत बढ़कर 103 से 106 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गई है.

भारत पर महंगाई की मार, कच्चे तेल की औसत कीमत $115.8 प्रति बैरल

भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल देश के लिए बड़ी चिंता है.PPAC की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 में कच्चा तेल भारतीय बास्केट $69.01 प्रति बैरल था, जो 21 अप्रैल 2026 को $102.46 पर पहुंच गया. यानी सीधे 48.47% की बढ़ोतरी हुई है. इस महीने 21 अप्रैल तक कच्चे तेल की औसत कीमत $115.8 प्रति बैरल बनी हुई है.

यूएई के मंत्री डॉ. सुल्तान अल जाबेर के अनुसार, युद्ध के पिछले 50 दिनों में सप्लाई बाधित होने के कारण 60 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सप्लाई रुक चुकी है.

सरकार के सामने नई चुनौती, क्या फिर कम होंगे दाम?

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बोझ से जनता को राहत देने के लिए भारत सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) 10 रुपये प्रति लीटर घटाई थी. लेकिन अब कच्चे तेल की कीमतें जिस तेजी से बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए सरकार को एक बार फिर दखल देना पड़ सकता है.

राज्यों पर टैक्स कम करने का दबाव

जहां केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी कम की है, वहीं राज्यों ने अभी तक वैट (VAT) या सेल्स टैक्स (Sales Tax) में कोई बड़ी कटौती नहीं की है. नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने भी राज्यों से एटीएफ (ATF) पर वैट कम करने की अपील की है ताकि हवाई सफर महंगा न हो. आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्यों ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर टैक्स से 3,02,058.5 करोड़ रुपये कमाए थे.

वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में  14 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं. इनमें 3 बड़े क्रूड ऑयल टैंकर्स और एक एलपीजी (LPG) टैंकर शामिल है. अगर यह तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में देश में ईंधन की कीमतों और सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है.

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