Crude Oil Price Update: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. पिछले दो सत्रों में तेल के दाम लगभग 6% तक गिर चुके हैं, जिससे ब्रेंट क्रूड अब 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गया है. इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित शांति समझौते की उम्मीद मानी जा रही है.
क्यों गिर रहे हैं कच्चे तेल के दाम?
आज यानी बुधवार, 6 मई को तेल की कीमतों में गिरावट का लगातार दूसरा दिन रहा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयानों ने बाजार में यह उम्मीद जगा दी है कि मिडिल ईस्ट (Middle East) में तेल की सप्लाई जल्द ही बहाल हो सकती है. ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ एक स्थायी समझौते की दिशा में बात चल रही है.
'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर लगा अस्थायी ब्रेक
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया (Truth Social) पर जानकारी दी है कि 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को थोड़े समय के लिए रोका जा रहा है. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध के बाद, ईरान के प्रतिनिधियों के साथ एक अंतिम समझौते पर चर्चा चल रही है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की 'नाकेबंदी' (Blockade) पूरी तरह जारी रहेगी.
आज 6 मई को क्या हैं तेल के भाव?
जुलाई डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 1.38% ($1.52) गिरकर $108.35 प्रति बैरल पर आ गया.
अमेरिकी क्रूड (WTI) 1.47% ($1.50) की गिरावट के साथ $100.77 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है.
बता दें कि मंगलवार को भी इन कीमतों में करीब 4% की भारी गिरावट दर्ज की गई थी. यानी 2 दिन में 6% कच्चा तेल फिसला है.
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) द्वारा जारी डेटा के मुताबिक,30 अप्रैल 2026 तक इंडियन बास्केट कच्चे तेल की कीमत 118.70 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई है. अप्रैल 2026 के महीने के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत 114.48 डॉलर प्रति बैरल रही है. भारतीय रिफाइनरियों द्वारा आयात किए जाने वाले इस कच्चे तेल में स्वीट ग्रेड (ब्रेंट डेटेड) और सोर ग्रेड (ओमान और दुबई का औसत) का मिश्रण शामिल होता है, जिसमें अप्रैल 2026 के लिए इनका अनुपात 61.02 : 38.98 रहा है.
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट
बता दें कि दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से यह रास्ता काफी हद तक बंद है. इसी रुकावट की वजह से पिछले हफ्ते तेल की कीमतें मार्च 2022 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं. अब तनाव कम होने की खबर से कीमतों में राहत मिल रही है.
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