लुटियंस में फिर लौटेगी रौनक, 4 दिन में 250-300 करोड़ के नुकसान, CJP प्रोटेस्ट से CP में 80% तक घट गया था कारोबार
दिल्ली में पिछले कई दिनों से चल रहा सीजेपी (CJP) प्रोटेस्ट और छात्र आंदोलन समाप्त हो गया है. इस आंदोलन के चलते लुटियंस और सेंट्रल दिल्ली के बाजारों को गंभीर कारोबारी संकट से जूझना पड़ा. सुरक्षा कारणों से लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और मेट्रो स्टेशनों के बंद होने से दिल्ली के सबसे लोकप्रिय बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही पिछले कुछ दिनों से थमी सी रही. इसके चलते व्यवसाइयों को करोड़ों का नुकसान हुआ. अब आंदोलन समाप्त होने के बाद व्यवसाइयों को एक बार फिर दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस की रौनक लौटने की उम्मीद है.
4 दिनों में 250 से 300 करोड़ रुपये का फटका
देश के सबसे बड़े कारोबारी संगठन, कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बीते 3-4 दिनों में दिल्ली के बाजारों को करीब 250 से 300 करोड़ रुपये के कारोबार का भारी नुकसान हुआ है. प्रदर्शन के कारण कनॉट प्लेस, जनपथ, पालिका बाज़ार और बंगाली मार्केट सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. अनिश्चितता के माहौल के चलते पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक और सदर बाजार जैसे थोक बाजारों में भी ग्राहकों (फुटफॉल) की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.
रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स का कारोबार 80% तक ठप
न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) का अनुमान है कि होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और क्लब्स का बिजनेस 80 फीसदी तक प्रभावित हुआ है. आम दिनों के मुकाबले 20 फीसदी ग्राहक भी यहां नहीं पहुंच रहे हैं. मशहूर खानपान केंद्र 'बंगाली बाजार' में भी खरीदारों की चहल-पहल 80 प्रतिशत तक घट गई है.
NDTA के महासचिव विक्रम बधवार ने कहा, 'ये माहौल दशकों बाद देखने को मिला है. जंतर-मंतर से लेकर आसपास के इलाकों में भारी जमावड़ा है. सुरक्षा चिंताओं के कारण दिल्ली पुलिस द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से पूरे कनॉट प्लेस में सन्नाटा पसरा हुआ है. इस नुकसान से उबरने में कारोबारियों को काफी समय लगेगा.'
पहले मेट्रो बंद, फिर शाम 6:30 बजे दुकानें बंद होने से बढ़ी परेशानी
गर्मियों के दिनों में ज्यादातर लोग और पर्यटक शाम 5:00 से रात 8:30 बजे के बीच खरीदारी करने निकलते हैं. लेकिन तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए कारोबारियों को शाम 6:30 बजे ही दुकानों के शटर गिराने का निर्देश दिया गया.
सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली मेट्रो के 16 से 17 स्टेशन अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए. इससे न केवल देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय खरीदारों का आना-जाना बंद हुआ, बल्कि दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों का काम पर आना और समय से घर लौटना भी मुश्किल हो गया.
कारोबारियों का रुख- व्यापार से पहले सुरक्षा जरूरी
NDTA के सदस्यों और अन्य व्यापारियों का मानना है कि बिजनेस के नुकसान के बावजूद सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है. कारोबारियों का कहना है कि अगर माहौल सुरक्षित नहीं रहेगा तो कुछ घंटे अतिरिक्त दुकान खोलने का कोई अर्थ नहीं है. व्यापारियों को उम्मीद है कि शनिवार की शाम आंदोलन खत्म होने के बाद अब रविवार से स्थिति सामान्य होगी और दिल्ली का ये दिल एक बार फिर अपनी पुरानी रौनक में लौटेगा.
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