प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है. पांच साल तक लागू रहने वाली इस योजना का उद्देश्य लिथियम और निकेल जैसे खनिजों की घरेलू प्रोसेसिंग विकसित करना, आयात पर निर्भरता घटाना और इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी स्टोरेज तथा रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना है.
PM मोदी ने बताए फायदे
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत को भविष्य की तकनीकों के लिए जरूरी महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग के मामले में दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. उन्होंने बताया कि लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी हैं, लेकिन भारत अभी भी प्रोसेस्ड खनिजों के आयात पर काफी निर्भर है.
Do you feel India should depend on other countries for processing the critical minerals that power our future? I certainly don't! Lithium, nickel, cobalt…these are essential for EVs, batteries, electronics and defence. Yet, we remain heavily dependent on imports of refined materials. To address this, the Cabinet has approved a scheme to change this. Key highlights: New critical mineral processing plants. Capital subsidy to boost investment. Greater domestic value addition. Stronger supply chains. The principle is clear...India must have capabilities to build technologies of the future! https://t.co/deencvjivt
— Narendra Modi (@narendramodi) November 4, 2026
देश में स्थापित होंगे चार प्रोसेसिंग प्लांट
सरकार के आधिकारिक बयान के मुताबिक, योजना के तहत देश में चार महत्वपूर्ण खनिज प्रोसेसिंग संयंत्र स्थापित किए जाएंगे. इनमें:
- दो लिथियम प्रोसेसिंग प्लांट होंगे, जिनकी न्यूनतम क्षमता 30 किलो टन होगी.
- दो निकेल प्रोसेसिंग प्लांट होंगे, जिनकी न्यूनतम क्षमता 50 किलो टन होगी.
निकेल प्रोसेसिंग के दौरान कोबाल्ट का उत्पादन सह-उत्पाद के रूप में भी होगा.
इन संयंत्रों में लिथियम और निकेल अयस्कों तथा इंटरमीडिएट उत्पादों को उच्च शुद्धता वाले रसायनों में बदलने की क्षमता विकसित की जाएगी. इससे भारत वैश्विक क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन में अधिक मूल्यवर्धन कर सकेगा.
निवेश पर 30% तक पूंजीगत सब्सिडी
योजना के तहत पात्र निवेश पर 30% तक पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी. परियोजना के प्रकार के अनुसार सहायता की अधिकतम सीमा तय की गई है. लिथियम प्रोसेसिंग के लिए 500 करोड़ रुपये की सहायता, जबकि निकेल प्रोसेसिंग के लिए 900 करोड़ रुपये की सीमा तय की गई है.
लाभार्थियों का चयन दो चरणों में होगा. पहले चरण में तकनीकी योग्यता का आकलन किया जाएगा और दूसरे चरण में वित्तीय बोली प्रक्रिया होगी. सबसे कम पूंजीगत सहायता मांगने वाले योग्य आवेदकों का चयन किया जाएगा.
प्रोत्साहन राशि परियोजना के अलग-अलग चरणों में हासिल उपलब्धियों के आधार पर तीन किस्तों में जारी की जाएगी.
भारत क्यों बढ़ाना चाहता है घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता?
लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग फिलहाल दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में केंद्रित है. इससे वैश्विक सप्लाई चेन भू-राजनीतिक तनाव, कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति बाधाओं के प्रति संवेदनशील रहती है.
भारत उच्च शुद्धता वाले लिथियम और निकेल इंटरमीडिएट उत्पादों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता विकसित होने से आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के साथ स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल सकती है.
EV, बैटरी और रक्षा क्षेत्र को मिलेगा फायदा
पीएम मोदी के मुताबिक, योजना से इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा विनिर्माण और स्पेशियलिटी स्टील जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलेगा. फिलहाल इन क्षेत्रों की सप्लाई चेन आयातित कच्चे माल और प्रोसेस्ड खनिजों पर निर्भर है.
भारत में लिथियम और निकेल प्रोसेसिंग क्षमता विकसित होने से बैटरी निर्माण उद्योग को मजबूती मिल सकती है और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की लागत प्रतिस्पर्धा बेहतर हो सकती है.
सरकार का मानना है कि यह योजना आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ाएगी. इससे देश में क्रिटिकल मिनरल की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने, आयात निर्भरता घटाने और वैश्विक आपूर्ति में रुकावटों के असर को कम करने में मदद मिलेगी.
यह भी पढ़ें | केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए दिवाली से पहले बड़ा तोहफा, महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं