बजट 2026 के बाद टैक्स देने वालों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार उनकी बचत बढ़ेगी. अगर आप सैलरीड हैं या पेंशनर हैं, तो आपके लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने स्टैंडर्ड डिडक्शन की सुविधा को पहले की तरह ही जारी रखा है. हालांकि इस साल इसकी लिमिट में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन पिछले बजट में तय किए गए नियम ही वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भी लागू होंगे. स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट और इसको लेकर क्या हैं इनकम टैक्स के नियम आइए समझते हैं...
किसे मिलेगा ₹75,000 की छूट का पूरा फायदा?
इनकम टैक्स के मौजूदा नियमों के हिसाब से, सैलरी पाने वाला कोई भी व्यक्ति अपनी पसंद के टैक्स सिस्टम (New or Old Tax Regime) के आधार पर इस छूट का दावा कर सकता है. अगर आप 'न्यू टैक्स रिजीम' को चुनते हैं, तो आप एक साल में ₹75,000 तक की स्टैंडर्ड डिडक्शन ले सकते हैं.
वहीं, अगर आप पुराने टैक्स सिस्टम में रहना चाहते हैं, तो वहां यह लिमिट ₹50,000 तय की गई है.
यह फायदा सिर्फ उन लोगों के लिए है जिन्हें सैलरी या पेंशन मिलती है. अगर आप अपना बिजनेस चलाते हैं, फ्रीलांसर हैं या प्रोफेशनल हैं, तो आप इस छूट का लाभ नहीं उठा सकते.
टैक्स कम करने में कैसे मदद करता है स्टैंडर्ड डिडक्शन?
स्टैंडर्ड डिडक्शन एक ऐसी फिक्स छूट है जिसे आपकी कुल सैलरी या पेंशन में से सीधे घटा दिया जाता है. इसके लिए आपको ऑफिस में कोई रसीद या निवेश के दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होती. इसे एक उदाहरण से समझते हैं:
मान लीजिए कि आपकी सालाना सैलरी ₹12.5 लाख है. न्यू टैक्स रिजीम में ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद आपकी टैक्सेबल इनकम सिर्फ ₹11.75 लाख रह जाएगी. चूंकि अब आपकी आय ₹12 लाख से कम हो गई है, इसलिए आप सेक्शन 87A के तहत टैक्स छूट (Rebate) के हकदार बन जाएंगे और आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा.
पेंशन पाने वाले सीनियर सिटिजन के लिए क्या हैं नियम?
रिटायर्ड कर्मचारियों और सीनियर सिटिजन के लिए भी अच्छी खबर है. पुराने नियोक्ता (Employer) से मिलने वाली पेंशन को टैक्स के नजरिए से 'सैलरी' ही माना जाता है, इसलिए सीनियर सिटिजन पर भी वही टैक्स नियम लागू होते हैं जो नौकरीपेशा लोगों पर होते हैं.
अगर आपने साल में नौकरी बदली है, तो क्या होगा?
कई बार लोग एक ही साल में दो या तीन कंपनियां बदलते हैं और उन्हें अलग-अलग जगह से सैलरी मिलती है. ऐसे में यह ध्यान रखना जरूरी है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा सिर्फ एक बार ही मिलता है, चाहे आपके मालिक कितने भी रहे हों.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह छूट व्यक्ति के आधार पर तय होती है न कि नौकरियों के आधार पर. इसलिए साल भर की आपकी कुल सैलरी चाहे जितनी भी हो, आप न्यू रिजीम में ₹75,000 और ओल्ड रिजीम में ₹50,000 से ज्यादा की कटौती क्लेम नहीं कर सकते.
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