सोने की कीमतों में लगातार तेज उछाल ने इस बार आम लोगों से लेकर बड़े निवेशकों तक सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. पिछले कुछ समय से सोने की कीमतों में आई तेजी ने आम आदमी की पहुंच से इसे दूर करना शुरू कर दिया है. भारत जैसे देश में, जहां सोना सिर्फ गहना नहीं बल्कि इमोशनल और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक भी माना जाता है, वहां बजट 2026 से जुड़ी चर्चाओं में गोल्ड ड्यूटी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है. शादियों का सीजन हो या निवेश का मौका, हर कोई बस एक ही सवाल पूछ रहा है क्या इस बजट में सोना सस्ता होगा?
अब सबकी नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर हैं कि क्या वह इस बार सोने पर कस्टम ड्यूटी घटाकर राहत देंगी या मौजूदा स्ट्रक्चर ही जारी रहेगा? आइए समझते हैं वित्त मंत्री के पिटारे से इस बार ज्वेलरी इंडस्ट्री और मिडिल क्लास के लिए क्या निकलेगा....
सोने की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल
पिछले एक साल में शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन सोना लगातार चमकता रहा. दुनिया में चल रही अस्थिरता, अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती और कमजोर डॉलर जैसी वजहों से सोने की कीमतों (Gold Prices)में जोरदार तेजी आई. पिछले साल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 67% तक महंगा हुआ और रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.
भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना
भारत में सोने की मांग हमेशा मजबूत रहती है. अनुमान है कि भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना है, जिसकी कीमत ट्रिलियन डॉलर में आंकी जाती है. यानी सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का बड़ा हिस्सा है. इसलिए अगर सोने की कीमत थोड़ी भी ऊपर-नीचे होती है, तो उसका असर बहुत बड़े स्तर पर पड़ता है.
बजट और कस्टम ड्यूटी का कनेक्शन
जुलाई 2024 में सरकार ने सोने पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 15% से घटाकर 6% कर दी थी. इस कदम का मकसद तस्करी रोकना और घरेलू बाजार में कीमतों को काबू में रखना था. शुरुआत में इसका असर भी दिखा. घरेलू कीमतों में थोड़ी गिरावट आई और गहनों की बिक्री बढ़ी.
लेकिन जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ती गईं, घरेलू बाजार में भी सोना फिर महंगा हो गया. अब इंडस्ट्री से जुड़े लोग मांग कर रहे हैं कि ड्यूटी को और घटाकर 3% किया जाए ताकि कीमतों का दबाव कम हो सके.
सरकार ने ड्यूटी घटाकर तस्करी रोकने की कोशिश की थी, लेकिन महंगे सोने ने अवैध कारोबारियों के लिए बड़ा मौका पैदा कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक किलो सोना तस्करी कर लाने पर लाखों रुपये का फायदा हो सकता है. यही वजह है कि एयरपोर्ट्स पर लगातार सोना पकड़ने के मामले सामने आ रहे हैं.एक्सपर्टेस का कहना है कि जब तक भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दामों में बड़ा फर्क रहेगा, तब तक सोने की तस्करी को पूरी तरह रोकना मुश्किल रहेगा.
सोने के गहनों की बिक्री में 20% तक गिरावट की संभावना
ड्यूटी घटने के बाद थोड़े समय के लिए गहनों की बिक्री बढ़ी थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तेज रफ्तार ने इस फैसले का असर खत्म कर दिया. घरेलू बाजार में सोने के दाम तेजी से बढ़े, जिसके कारण गहनों की मांग में गिरावट देखी गई.अनुमान है कि अगर कीमतें ऐसे ही ऊंची रहीं तो इस फाइनेंशियल ईयर में सोने के गहनों की बिक्री में 20% तक गिरावट आ सकती है. हालांकि, ग्लोबल डिमांड की तुलना में भारत में गिरावट कम रही, जिससे पता चलता है कि भारतीय उपभोक्ता अभी भी सोने को प्राथमिकता देते हैं.
बजट से ज्वेलरी इंडस्ट्री की क्या है डिमांड?
ज्वेलरी इंडस्ट्री सरकार से उम्मीद कर रही है कि बजट में सोना, चांदी और प्लैटिनम पर लगने वाली ड्यूटी कम की जाए. उनका मानना है कि ऐसा होने से सामान बनाने की लागत घटेगी, एक्सपोर्ट बढ़ेगा और भारत विदेशी बाजार में ज्यादा मजबूत बन पाएगा.साथ ही, कारीगरों के लिए ट्रेनिंग, नई तकनीक और आसान कस्टम प्रोसेस जैसे कदम भी ज्वेलरी इंडस्ट्री को मजबूत बना सकते हैं.
क्या ड्यूटी में फिर कटौती होगी?
हालांकि ज्वेलरी इंडस्ट्री की मांगें तेज हो रही हैं, लेकिन कई जानकार मानते हैं कि सरकार इस बार ड्यूटी में बड़ी कटौती नहीं करेगी. देश के बढ़ते आयात खर्च (Import Expenditure) और चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को देखते हुए सरकार सावधानी बरत सकती है. पिछले साल सोने की आयात मात्रा थोड़ी कम हुई थी, लेकिन ऊंची कीमतों की वजह से कुल खर्च फिर भी बढ़ गया.इसलिए संभावना यही जताई जा रही है कि ड्यूटी फिलहाल 6% के आसपास ही बनी रह सकती है.
सोने की कीमतें सिर्फ निवेशकों के लिए ही नहीं, बल्कि आम परिवारों के लिए भी अहम हैं. शादी-ब्याह से लेकर बचत तक, सोना भारतीय जीवन का हिस्सा है. बजट 2026 में ड्यूटी को लेकर लिया गया फैसला सीधे लोगों की जेब, ज्वेलरी इंडस्ट्री और तस्करी जैसे मुद्दों को प्रभावित करेगा.अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार महंगाई, रेवेन्यू और आम लोगों के हितों के बीच कैसे बैलेंस बैठाती है.
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