- रोल्स रॉयस भारत को अपना तीसरा घरेलू बाजार बनाने की योजना बना रही है. इससे जेट इंजन में अवसर खुलेंगे
- रोल्स रॉयस भारत में 2030 तक अपनी आपूर्ति श्रृंखला की सोर्सिंग को कम से कम दोगुना करने का लक्ष्य रखती है
- कंपनी का निजी क्षेत्र का पावर सिस्टम कारोबार 2026-27 तक भारत में सरकारी आपूर्ति से अधिक होने की उम्मीद है
ब्रिटिश एयरो-इंजन निर्माता रोल्स रॉयस, ब्रिटेन के बाद भारत को अपना तीसरा 'घरेलू बाज़ार' बनाने की कोशिश कर रही है, जिससे जेट इंजन, नौसेना प्रणोदन और अन्य क्षेत्रों में रोमांचक अवसर खुलेंगे. भारत में ब्रिटिश उच्चायोग ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए ये जानकारी दी. भारत में ब्रिटिश उच्चायोग ने कहा कि यह उन्नत इंजीनियरिंग और इनोवेशन में बढ़ते सहयोग का सबूत है.
खास बात यह है कि भारत रोल्स रॉयस के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है, यहां इंजीनियरिंग सेंटर, सप्लाई चेन पार्टनरशिप और इंडियन एयरोस्पेस तथा रक्षा संस्थाओं के साथ सहयोग मौजूद हैं.
British aero‑engine maker @RollsRoyce is looking to position India as its third 'home market' beyond the UK, unlocking exciting opportunities across jet engines, naval propulsion, and more!
— UK in India🇬🇧🇮🇳 (@UKinIndia) January 12, 2026
A clear reflection of the growing 🇬🇧🇮🇳 cooperation in advanced engineering & innovation. pic.twitter.com/RPvzbHaUF9
इससे पहले, रोल्स रॉयस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) टुफन एर्गिनबिलगिक ने भारत को "घरेलू बाज़ार" बनाने की कंपनी की महत्वाकांक्षाओं का खुलासा किया था, जिससे देश के प्रति कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और मजबूत हुई.
एर्गिनबिलगिक भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) पर हस्ताक्षर के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की पहली आधिकारिक यात्रा पर उनके साथ आए उद्योग प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में भारत आए थे.

कंपनी ने हाल ही में भारत में अपने नव विस्तारित वैश्विक क्षमता एवं इनोवेशन केंद्र का उद्घाटन किया है, जिसमें नागरिक अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र को सहयोग देने वाली डिजिटल क्षमताएं, उद्यम सेवाएं और इंजीनियरिंग टीमें मौजूद हैं.

बहुराष्ट्रीय एयरोस्पेस और पावर सिस्टम कंपनी रोल्स-रॉयस को उम्मीद है कि 2026-27 तक भारत में उसका निजी क्षेत्र का 'पावर सिस्टम' कारोबार सरकारी आपूर्ति से अधिक हो जाएगा. कंपनी भारत में एमटीयू ब्रांड के तहत अपने पावर सिस्टम उत्पाद और समाधान बेचती है. वह डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर साइट, फैक्ट्रियों और अन्य संस्थागत बैकअप तैनाती के लिए पावर समाधान की तेजी से बढ़ती मांग पर बड़ा दांव लगा रही है.
ब्रिटेन और भारत ने पिछले साल ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते से बाजार तक पहुंच बढ़ेगी, शुल्कों में कटौती होगी और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना हो जाएगा. जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की लंदन यात्रा के दौरान इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर मुहर लगी थी.
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