भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है. इस मौके पर भारत अपने पार्टनर देशों के सामने एक बड़ी मांग रख रहा है. भारत चाहता है कि उसे ब्रिक्स में आसानी से एंट्री मिले. इसके साथ ही, संगठन के भीतर सामान बेचने के समान मौके भी दिए जाएं. दरअसल, भारत और ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार तो तेजी से बढ़ा है, लेकिन यह एकतरफा ज्यादा नजर आता है.
व्यापार बढ़ा, लेकिन घाटा भी हुआ दोगुना
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 226.1 अरब डॉलर यानी करीब पर पहुंच गया है. हालांकि, ब्रिक्स देशों के साथ भारत का कुल व्यापार बढ़कर 417.5 अरब डॉलर हो गया है. पांच साल पहले यानी वित्त वर्ष 2020-21 यह आंकड़ा करीब 203 अरब डॉलर का था.
-
Ashwini Vaishnaw की कुर्सी के पीछे की ओर क्यों लगी है कील? | EXCLUSIVE | NDTV World Summit 2026 -
रेलमंत्री वैष्णव ने बताया बुलेट ट्रेन में देरी की क्या रहीं वजहें, जापानी मंत्री के आरोपों का दिया जवाब -
AI पर भारत में आएगा कानून, NDTV World Summit में बोले अश्विनी वैष्णव- चंद हफ्तों में आएगा कंसल्टेशन पेपर -
NDTV World Summit 2026: सेमीकंडक्टर, AI और बुलेट ट्रेन पर क्या है भारत का मेगा प्लान? अश्विनी वैष्णव ने बताया -
NDTV World Summit | हाथ से निकल रही है AI की ताकत! Google DeepMind के पूर्व रिसर्चर ने दी चेतावनी -
'भारत के लिए खतरा बिल्कुल रियल': NDTV वर्ल्ड समिट में माइक्रोसॉफ्ट के AI विशेषज्ञ निकोलस बट्स -
भारत में कब बनेगी 'मेड इन इंडिया' चिप? NDTV World Summit में अश्विनी वैष्णव ने बताया -
हाथ से निकल रही है AI की ताकत! Google DeepMind के पूर्व रिसर्चर ने भारत में दी सबसे बड़ी चेतावनी -
AI एक्ट्रेस टिली नॉरवुड को क्यों पसंद हैं SRK? किस फिल्म के रीमेक में करना चाहती हैं काम? -
AI एक्ट्रेस टिली नॉरवुड को पसंद हैं शाहरुख खान, बोलीं- ‘ओम शांति ओम’ के रीमेक में करना चाहती हूं काम
पिछले पांच सालों में भारत का निर्यात 48.8% बढ़कर 95.7 अरब डॉलर हुआ है. लेकिन इसी दौरान आयात 131.8% की भारी तेजी के साथ 321.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया. हैरान करने वाली बात ये है कि भारत के कुल निर्यात का सिर्फ 22% हिस्सा ही ब्रिक्स देशों में जाता है, जबकि भारत के कुल आयात का 40% से ज्यादा हिस्सा इन्हीं देशों से आता है.
कहां से आ रहा है सबसे बड़ा ट्रेड डेफिसिट?
रुबिक्स डेटा साइंसेज के एक अलग स्टडी के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का ट्रेड डेफिसिट 224 अरब डॉलर रहा. 2021 में यह आंकड़ा 117 अरब डॉलर था. इसमें सबसे बड़ा योगदान चीन (100 अरब डॉलर से अधिक) और रूस (करीब 55 अरब डॉलर) का है.
हर ब्रिक्स पार्टनर के साथ कहीं घाटा तो कहीं मुनाफा
ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा एक जैसा नहीं है. कुल घाटे का करीब आधा हिस्सा अकेले चीन से आता है, जबकि दूसरे नंबर पर रूस है. दिलचस्प बात यह है कि इजिप्ट और इथियोपिया के साथ भारत ट्रेड सरप्लस यानी मुनाफे में है. 2024-25 के बाद अब ब्रिक्स 11 देशों का समूह बन चुका है, जिसमें खाड़ी के तेल उत्पादक देशों से लेकर अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं.
इन 6 सेक्टरों के लिए भारत ने उठाई आसान नियमों की मांग
भारत इस शिखर सम्मेलन में लगातार मांग कर रहा है कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार के नियम आसान बनाए जाएं. भारत चाहता है कि फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग, केमिकल्स और डिजिटल सर्विस के लिए स्टैंडर्ड आसान हों और कस्टम क्लीयरेंस तेजी से मिले.
ये भी पढ़ें- GDP के बाद GST आंकड़ों पर पूर्व वित्त सचिव ने उठाए सवाल, CBIC ने बताया ‘शरारतपूर्ण'
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं