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रूस, चीन, सऊदी, इंडोनेशिया... BRICS देशों के साथ ट्रेड में भारत कहां खड़ा है?

BRICS Summit 2026: चीन और रूस से बढ़ते ट्रेड डेफिसिट के बीच जानिए भारत ने ब्रिक्स देशों के सामने क्या मास्टर प्लान बनाया है और किन 6 सेक्टरों के लिए बड़ी छूट मांगी है.

रूस, चीन, सऊदी, इंडोनेशिया... BRICS देशों के साथ ट्रेड में भारत कहां खड़ा है?
India BRICS Trade Deficit: रूस-चीन से का ट्रेड डेफिसिट

भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है. इस मौके पर भारत अपने पार्टनर देशों के सामने एक बड़ी मांग रख रहा है. भारत चाहता है कि उसे ब्रिक्स में आसानी से एंट्री मिले. इसके साथ ही, संगठन के भीतर सामान बेचने के समान मौके भी दिए जाएं. दरअसल, भारत और ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार तो तेजी से बढ़ा है, लेकिन यह एकतरफा ज्यादा नजर आता है.

व्यापार बढ़ा, लेकिन घाटा भी हुआ दोगुना

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 226.1 अरब डॉलर यानी करीब पर पहुंच गया है. हालांकि, ब्रिक्स देशों के साथ भारत का कुल व्यापार बढ़कर 417.5 अरब डॉलर हो गया है. पांच साल पहले यानी वित्त वर्ष 2020-21 यह आंकड़ा करीब 203 अरब डॉलर का था.

पिछले पांच सालों में भारत का निर्यात 48.8% बढ़कर 95.7 अरब डॉलर हुआ है. लेकिन इसी दौरान आयात 131.8% की भारी तेजी के साथ 321.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया. हैरान करने वाली बात ये है कि भारत के कुल निर्यात का सिर्फ 22% हिस्सा ही ब्रिक्स देशों में जाता है, जबकि भारत के कुल आयात का 40% से ज्यादा हिस्सा इन्हीं देशों से आता है.

कहां से आ रहा है सबसे बड़ा ट्रेड डेफिसिट?

रुबिक्स डेटा साइंसेज के एक अलग स्टडी के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का ट्रेड डेफिसिट 224 अरब डॉलर रहा. 2021 में यह आंकड़ा 117 अरब डॉलर था. इसमें सबसे बड़ा योगदान चीन (100 अरब डॉलर से अधिक) और रूस (करीब 55 अरब डॉलर) का है.

हर ब्रिक्स पार्टनर के साथ कहीं घाटा तो कहीं मुनाफा

ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा एक जैसा नहीं है. कुल घाटे का करीब आधा हिस्सा अकेले चीन से आता है, जबकि दूसरे नंबर पर रूस है. दिलचस्प बात यह है कि इजिप्ट और इथियोपिया के साथ भारत ट्रेड सरप्लस यानी मुनाफे में है. 2024-25 के बाद अब ब्रिक्स 11 देशों का समूह बन चुका है, जिसमें खाड़ी के तेल उत्पादक देशों से लेकर अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं.

इन 6 सेक्टरों के लिए भारत ने उठाई आसान नियमों की मांग

भारत इस शिखर सम्मेलन में लगातार मांग कर रहा है कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार के नियम आसान बनाए जाएं. भारत चाहता है कि फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग, केमिकल्स और डिजिटल सर्विस के लिए स्टैंडर्ड आसान हों और कस्टम क्लीयरेंस तेजी से मिले.

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