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हम न कभी रुके, न कभी झुके, मुश्किल समय में भी मजबूती से खड़े रहे : AGM में गौतम अदाणी

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने AGM 2026 में कहा कि कठिनाइयों के बावजूद ग्रुप कभी नहीं रुका और भारत के भविष्य पर अटूट विश्वास बनाए रखा.

हम न कभी रुके, न कभी झुके, मुश्किल समय में भी मजबूती से खड़े रहे : AGM में गौतम अदाणी
शेयरहोल्डर्स के भरोसे, सब्र और हिम्मत के लिए धन्यवाद
नई दिल्‍ली:

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने Annual General Meeting 2026 के अवसर पर कहा कि हम न कभी रुके, न कभी झुके, मुश्किल समय में भी मजबूती से खड़े रहे हैं. बहस की बजाए हमारा फोकस काम पर है. अदाणी ग्रुप इस अटूट विश्वास पर कायम रहा कि भारत का भविष्य इंतजार नहीं कर सकता.  

हम न तो झुके और न ही रुके

2026 की सालाना आम बैठक में गौतम अदाणी ने बताया, 'वित्त वर्ष 2025-26 एक ऐसा साल था, जब दुनिया और ज्‍यादा बंटी हुई नजर आई. एनर्जी सिक्योरिटी के मुश्किल मॉडल राष्ट्रीय रणनीति के केंद्र में आ गए और टेक्नोलॉजी देश की संप्रभुता का अभिन्न हिस्सा बन गई. हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद, आपका अदाणी ग्रुप इस अटूट विश्वास पर कायम रहा कि भारत का भविष्य इंतजार नहीं कर सकता. जब दूसरे लोग बहस कर रहे थे, तब आपका ग्रुप निर्माण कार्य में जुटा रहा और एनर्जी, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, यूटिलिटीज और इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में दुनिया के सबसे इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म के तौर पर अपनी यात्रा को आगे बढ़ाता रहा... हम न तो झुके और न ही रुके, क्योंकि हमारी पहचान हमारे आस-पास के शोर-शराबे से नहीं, बल्कि हमारी प्रतिक्रिया की मजबूती से होती है. चुनौती की तेजी से नहीं, बल्कि हमारे मकसद की स्पष्टता से; आलोचनाओं से नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के प्रति हमारे गहरे विश्वास से होती है.'

भारत के निर्माण कार्य को जारी रखने का जनादेश

गौतम अदाणी ने कहा, 'इस विश्वास का एक उदाहरण इस साल की शुरुआत में हमारा 25,000 करोड़ रुपये का राइट्स इश्यू था. ऐसे समय में जब कुछ लोगों ने शक पैदा करने की कोशिश की, आपने पूरे भरोसे के साथ जवाब दिया. आपने भागीदारी के साथ जवाब दिया और हमें भारत के निर्माण कार्य को जारी रखने का जनादेश दिया. राष्ट्र-निर्माण की भावना के अनुरूप, इस साल मेरे संबोधन का विषय इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को तेज करने और इंटेलिजेंस का लाभ उठाने पर केंद्रित है.'

इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास की असली रीढ़ की हड्डी

गौतम अदाणी ने इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास की असली रीढ़ की हड्डी बताया, जिसमें सड़क, पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स, बिजली घर, ट्रांसमिशन नेटवर्क, रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, गैस पाइपलाइन, लॉजिस्टिक्स हब, पानी की व्यवस्था और औद्योगिक सिस्टम जैसी जरूरी संपत्तियां शामिल हैं. वहीं दूसरी तरफ, उन्होंने दूसरे स्तंभ यानी इंटेलिजेंस का मतलब समझाते हुए कहा, 'इसका सीधा संबंध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा एनालिसिस जैसी एडवांस  टेक्नोलॉजी की बढ़ती भूमिका से है. इन सभी एडवांस डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल अब हमारे पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क और संपत्तियों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने, काम को और तेज करने तथा सही फैसले लेने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है.'

देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया रिकॉर्ड 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च

गौतम अदाणी ने ग्रुप द्वारा किए जा रहे निवेश की भारी-भरकम रकम के बारे में बताते हुए कहा, 'वित्त वर्ष 2026 के दौरान हमारे ग्रुप ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्च पर 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है. यह खर्च इस साल भारत में पूरे प्राइवेट सेक्टर द्वारा किए गए कुल नए निवेश का 30 प्रतिशत से भी अधिक था. यह निवेश केवल एक वित्तीय उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की ग्रोथ जर्नी में ग्रुप के गहरे और लंबे समय के भरोसे का प्रतीक है. इतनी बड़ी पूंजी का इस्तेमाल इस बात को साबित करता है कि हमारा ग्रुप देश के आर्थिक विकास के अगले चरण को मजबूत करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.'

तीन बुनियादी कदम

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने बताया, 'मैं उन तीन बुनियादी कदमों के बारे में बात करता हूं, जो हम ऐसे संगठन बनाने के लिए उठा रहे हैं, जो अगले दशक में हमारे विजन को हकीकत में बदलेंगे. पहला- हम अपने काम करने के तरीके को आसान बना रहे हैं. हम अपने हेडक्वार्टर और साइट्स, दोनों जगहों पर तीन-स्तरीय (three-layer) स्ट्रक्चर लागू कर रहे हैं, ताकि अफसरशाही कम हो, जवाबदेही बेहतर हो और फैसले लेने और उन्हें लागू करने के बीच की दूरी कम हो. हर भूमिका, हर प्रोसेस और हर स्तर से कुछ न कुछ वैल्यू मिलनी चाहिए. जो काम मुख्य काम (core activities) नहीं हैं, उन्हें हमारे GCC या चुने हुए पार्टनर्स को सौंप दिया जाएगा. दूसरा- हम अपने कॉन्ट्रैक्टर्स के साथ काम करने का तरीका बदल रहे हैं. हम उन्हें देश-निर्माण में लंबे समय के पार्टनर के तौर पर देखते हैं. तीसरा- और सबसे अहम बात यह है कि हम अपने बदलावों में वर्कर की गरिमा (dignity) को सबसे ऊपर रख रहे हैं. हमारे अपने और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले लगभग 4 लाख लोगों में से करीब 85% लोग हमारी साइट्स पर जमीनी स्तर पर काम करते हैं. यही वे लोग हैं, जो हमारे प्लांट्स को हकीकत का रूप देते हैं, और हम यह पक्का करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हर वर्कर के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो. इसका मतलब है रहने की साफ-सुथरी जगह, साफ-स्वच्छ खाना, मेडिकल सुविधाएं, काम करने के लिए सुरक्षित माहौल और समय पर सही वेतन मिले.'

शेयरहोल्डर्स के भरोसे, सब्र और हिम्मत के लिए धन्यवाद

गौतम अदाणी ने कहा, 'अपने शेयरहोल्डर्स से मैं कहना चाहता हूं कि आपके भरोसे, सब्र और हिम्मत के लिए धन्यवाद. आप न सिर्फ हमारी कामयाबी के समय में, बल्कि मुश्किल दौर में भी हमारे साथ खड़े रहे, आपका भरोसा ही हमारी ताकत है. बड़े पैमाने पर काम अकेले नहीं होता, यह सहयोग और इस साझा विश्वास से होता है कि भारत का आगे बढ़ना किसी एक संस्था से कहीं ज्‍यादा बड़ी बात है.'

देश के शानदार अध्याय अभी लिखे जा रहे

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन ने कहा, 'अपने परिवारों से मैं कहना चाहता हूं कि हमारी सार्वजनिक कामयाबी के पीछे का बोझ आप ही उठाते हैं. आप हमें जमीन से जुड़े रहने की ताकत और आगे बढ़ते रहने के लिए भावनात्मक आधार देते हैं. भारत के प्रति, हम उस देश की सेवा करने के सौभाग्य के लिए बहुत आभारी हैं, जिसके सबसे शानदार अध्याय अभी लिखे जा रहे हैं और जिसके सबसे अहम पन्ने अभी आने बाकी हैं. तो आइए, यह साल ऐसा हो जब हमें हमारे किये कामों के लिए याद किया जाए. हमने तब निर्माण किया, जब निर्माण करना सबसे मुश्किल था; हमने तब भरोसा किया, जब भरोसा करना सबसे मुश्किल था; और हमने साबित किया कि हिम्मत और डटे रहना ही हमारे जीने का तरीका है.'

गुजरात के कच्छ में 'कर्मा उत्सव' पहल

अदाणी ग्रुप के चेयनमैन ने बताया, 'स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) की बात करें, तो हम ग्रामीण भारत में 1.2 लाख से ज़्यादा युवाओं को हुनरमंद बना रहे हैं, उनकी आकांक्षाओं को रोजगार के काबिलियत में और उस काबिलियत को सम्मान में बदल रहे हैं. इस साल, हमने ट्रेनिंग को सिर्फ एक गतिविधि के तौर पर देखने के बजाय इसे एक बड़े पैमाने की क्षमता (इंडस्ट्रियलाइज़्ड कैपेबिलिटी) के तौर पर विकसित किया है, जिससे हजारों घंटे की ट्रेनिंग दी जा रही है और वर्कफोर्स की तैयारी को मजबूत किया जा रहा है. साथ ही, गुजरात के कच्छ में 'कर्मा उत्सव' पहल के तहत ITI को गोद लेने से रोजगार का एक मजबूत स्थानीय जरिया बन रहा है, जिससे टैलेंट का पलायन कम हो रहा है. इसलिए, जब मैं हमारी यात्रा को देखता हूं, तो मुझे एक ही मकसद नजर आता है- ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना, जो भारत को आगे बढ़ाए और ऐसे संस्थान बनाना जो समाज के हर स्तर पर इंसानी सम्मान सुनिश्चित करें. इसी भावना के साथ हम भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, और इसलिए मुझे कुछ धन्यवाद के शब्दों के साथ अपनी बात खत्म करने दें.'

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