Airports Development on PPP Mode: शिव की नगरी वाराणसी और हरि की नगरी तिरुपति समेत 11 बड़े शहरों के एयरपोर्ट्स को प्राइवेट हाथों में सौंपा जाएगा. PPP यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत प्राइवेट कंपनियां इन एयरपोर्ट्स का कायाकल्प करेगी. अनुमान है कि इन एयरपोर्ट्स के विकास के लिए प्राइवेट कंपनियां 8,622 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. इन 11 एयरपोर्ट्स को 50 साल के लिए लीज पर दिया जाएगा. आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक, नागर विमानन मंत्रालय ने देश के 11 एयरपोर्ट्स के लिए प्राइवेट पार्टनर्स को नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है.
सरकार के इस फैसले पर हमने पॉलिसी एक्सपर्ट प्रभात सिन्हा से बात की तो उन्होंने इसे एक समझदारी भरा कदम बताया. उन्होंने कहा, 'सरकार एक बड़े एयरपोर्ट के साथ कुछ छोटे एयरपोर्ट ग्रुप करने वाली है. इससे उनका भी विकास होगा. पैसेंजर्स के नजरिये से सोचा जाए तो बस एक कंसर्न है कि निजी कंपनियां यात्रियों के लिए चार्जेस न बढ़ाएं, बस इसे सरकार मॉनिटर करे.

बता दें कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) ने 4 अगस्त को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी. आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर की अगुवाई वाली PPPAC ने केंद्रीय क्षेत्र वाली PPP प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन किया.
5 ग्रुप में 11 एयरपोर्ट्स, एक मोटी कमाई वाला, बाकी...
प्रस्ताव के मुताबिक, 11 एयरपोर्ट्स को 5 ग्रुप में बांटा जाएगा. एक ग्रुप में शामिल सभी एयरपोर्ट्स को किसी एक ही कंपनी को दिया जाएगा. एयरपोर्ट्स का प्रबंधन करने वाली निजी कंपनियां किराये, पार्किंग चार्जेस और अन्य शुल्क से कमाई कर सकेंगी. इस प्रस्ताव के तहत 5 बड़े एयरपोर्ट्स को 6 छोटे एयरपोर्ट्स के साथ ग्रुप किया गया है. यानी हर ग्रुप में एक एयरपोर्ट मोटी कमाई वाला होगा.
- अमृतसर और कांगड़ा-गग्गल एक ग्रुप में रखा गया है.
- वाराणसी, गया और कुशीनगर दूसरे ग्रुप में होंगे.
- भुवनेश्वर और हुबली एक ग्रुप में शामिल किया गया है.
- रायपुर और औरंगाबाद एक ग्रुप में होंगे.
- तिरुचिरापल्ली और तिरुपति एयरपोर्ट्स को 5वें ग्रुप में रखा गया है.

ऐसा नहीं है कि बोली लगाने वाले एक ही कंपनी को सभी 5 ग्रुप यानी सभी 11 एयरपोर्ट्स का मैनेजमेंट सौंपा जाएगा. बाजार में केंद्रीकरण और ज्यादा कर्ज के जोखिमों को कम करने के लिए इसकी सीमा तय की जाएगी.
एयरपोर्ट अथॉरिटी के कर्मचारियों का क्या होगा?
एयरपोर्ट्स के निजी हाथों में जाने की चर्चा होते ही सवाल ये उठता है कि AAI यानी एयरपोर्ट अथॉरिटी के कर्मचारियों का क्या होगा. तो जवाब ये ही कि एक साल सभी कर्मचारी बने रहेंगे और इसके बाद अगले 3 साल तक भी कम से कम 60 फीसदी कर्मचारी नई कंपनी के साथ जुड़े रहेंगे. सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने एयरपोर्ट्स को निजी कंपनियों को सौंपे जाने के बाद AAI के मौजूदा कर्मचारियों को शामिल करते हुए एक साल की संयुक्त प्रबंधन अवधि का प्रस्ताव रखा है. इसके बाद परिचालक कंपनी को तीन साल तक भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के 60 प्रतिशत कर्मचारियों को बनाए रखना होगा.
दस्तावेज के मुताबिक, 'पिछले अनुभवों से पता चलता है कि परिचालक कंपनी के साथ इस तरह की व्यवस्था AAI कर्मचारियों को स्वीकार्य रही है.' पिछली बार की प्रक्रिया में एक साल की संयुक्त प्रबंधन अवधि और दो साल तक नौकरी में बनाए रखने की शर्त थी.
मौजूदा दौर के लिए 11 हवाई एयरपोर्ट्स का चयन एएआई ने चरणबद्ध और आंकड़ा आधारित प्रक्रिया के जरिये किया. पहले 12 बड़े एयरपोर्ट्स का आकलन यात्री यातायात, भूमि उपलब्धता, वाणिज्यिक क्षमता और वित्तीय प्रदर्शन समेत विभिन्न मानकों पर किया गया. इसके बाद 136 छोटे हवाई अड्डों का बड़े हवाई अड्डों के साथ समूह बनाने की संभावना के आधार पर मूल्यांकन किया गया. सरकार ने इससे पहले 2018-19 में भी AAI के 6 हवाई अड्डों को पीपीपी मॉडल के तहत निजी कंपनियों को सौंपा था.
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