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निकहत जरीन: मां थीं बॉक्सर बनने के खिलाफ, समाज की तोड़ी बेड़ियां, दो बार विश्व चैंपियन बन रचा इतिहास

Nikhat Zareen: निकहत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी काबिलियत से हर किसी को परिचित कराया और 2023 में भी निकहत का शानदार सफर जारी रहा और वह लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनीं.

निकहत जरीन: मां थीं बॉक्सर बनने के खिलाफ, समाज की तोड़ी बेड़ियां, दो बार विश्व चैंपियन बन रचा इतिहास
Nikhat Zareen:

Nikhat Zareen: जब निकहत जरीन ने बॉक्सिंग की दुनिया में करियर बनाने की ठानी, तो सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं. निकहत की मां तक नहीं चाहती थीं कि वह बॉक्सिंग की रिंग में उतरे. हालांकि, निकहत ने मजबूत इरादे और बुलंद हौसलों के दम पर न सिर्फ समाज की बेड़ियों को तोड़ा, बल्कि रिंग में उतरकर विश्व की कई दिग्गज बॉक्सरों को चारों खाने चित भी किया. निकहत का जन्म 14 जून, 1996 को तेलंगाना के निजामाबाद में हुआ. निकहत के चाचा खुद एक बॉक्सिंग कोच थे और वह निकहत के भाइयों को बॉक्सिंग की बारीकियां सिखाया करते थे.

निकहत की भी रुचि इस खेल के प्रति बचपन से ही बढ़ने लगी. 13 साल की उम्र में उन्होंने बॉक्सिंग में करियर बनाने की ठान लीं. हालांकि, उनकी खुद की मां नहीं चाहती थीं कि बेटी बॉक्सिंग के रिंग में उतरे. पिता को छोड़कर परिवार के बाकी सदस्यों को भी निकहत के बॉक्सिंग रिंग में उतरने पर ऐतराज था.

हालांकि, निकहत इस खेल में अपना करियर बनाने का सोच चुकी थीं. शुरुआत में निकहत ने बॉक्सिंग की बारीकियां अपने चाचा से ही सीखीं. पढ़ाई के साथ-साथ बॉक्सिंग ट्रेनिंग कर पाना निकहत के लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. निकहत ने दिन-रात कड़ी ट्रेनिंग की और इस खेल में अपनी पहचान बनाने के सफर पर निकल पड़ीं.

2011 में उन्होंने महिला जूनियर और यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता. वहीं, 2014 में निकहत ने यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक अपने नाम किया. हालांकि, अभी निकहत ने बॉक्सिंग की दुनिया में पांव जमाना शुरू ही किया था कि कंधे की चोट ने उन्हें पीछे धकेल दिया. दाहिने कंधे की हड्डी टूटने की वजह से उन्हें सर्जरी से गुजरना पड़ा.

मगर निकहत हार मानने वालों में से नहीं थीं. एक साल तक बॉक्सिंग रिंग से दूर रहने के बाद निकहत लौटीं और उन्होंने मेमोरियल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर शानदार वापसी की. साल 2021 में निकहत ने बैकॉक में खेली गई एशियाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता.

वहीं, साल 2022 में निकहत ने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की. इस्तांबुल में वह दमदार प्रदर्शन करके पहली बार विश्व चैंपियन बनीं और उन्होंने स्वर्ण पदक जीता. इसी साल निकहत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी काबिलियत से हर किसी को परिचित कराया. 2023 में भी निकहत का शानदार सफर जारी रहा और वह लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनीं. निकहत मैरी कॉम के बाद विश्व चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली महज दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनीं. निकहत को साल 2022 में भारतीय सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.

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