युद्ध विराम के बाद ग़ाज़ा में क्या करेगा इज़राइल?

इजरायल-हमास के बीच अभी सीजफायर चल रहा है. लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल है कि युद्ध विराम खत्म होने के बाद इज़राइल ग़ाज़ा में क्या करेगा?

युद्ध विराम के बाद ग़ाज़ा में क्या करेगा इज़राइल?

चार दिनों का युद्ध विराम दो दिन और बढ़ाया गया. इसे 6 दिन से भी आगे बढ़ाए जाने की चर्चा और कोशिश है. लेकिन याद रखना होगा कि ये स्थायी युद्ध विराम नहीं है. जो सबसे बड़ा सवाल है कि युद्ध विराम आज ख़त्म हो, कल ख़त्म हो या चंद दिनों के बाद ख़त्म हो उसके बाद इज़राइल ग़ाज़ा में क्या करेगा? इस सवाल पर आगे आएंगे पहले थोड़ी चर्चा जो अब तक हुआ है और जो हो रहा है.

मौजूदा युद्ध विराम बंधकों की रिहाई से जुड़ा हुआ है. तभी इज़राइल ने कहा कि हर 10 बंधकों की रिहाई के बदले वह युद्ध विराम एक दिन के लिए बढ़ाएगा. साथ ही हर एक बंधक के बदले 3 फिलिस्तीनी क़ैदियों को भी छोड़ेगा. इसी फॉर्मूले पर 6 दिनों का युद्ध विराम क़ायम हुआ. आगे भी होगा तो इसी तरह के फ़ॉर्मूल पर होगा. हो सकता है कि हर बंधक के बदले फिलिस्तीनी क़ैदियों की रिहाई 3 से बढ़ा कर कुछ अधिक कर दी जाए. क्योंकि हमास ऐसा कह चुका है कि वह हर बंधक के बदले अधिक क़ैदियों की रिहाई चाहता है. हो सकता है कि इज़राइल इसके लिए मान भी जाए क्योंकि उसके पास क़रीब 8 हज़ार के आसपास फिलिस्तीनी क़ैदी हैं. इनमें से बहुतों के ख़िलाफ़ कम गंभीर मामले हैं. इनमें बड़ी तादाद में महिलाएं और नाबालिग बच्चे भी हैं. 

अगर युद्ध विराम की शर्त बंधकों की रिहाई तक ही सीमित रहती है तो फिर ये अधिक लंबा चलने वाला नहीं. युद्ध विराम के पहले चार दिनों में हमास ने 50 इज़राइली बंधकों के साथ-साथ 19 अन्य देशों के बंधकों को भी रिहा किया. 5 वें दिन 12 और बंधकों को छोड़ा गया.  छठे दिन में तादाद कमोबेश यही है. यानि हमास के कब्ज़े में जो 240 बंधक हैं उनमें से 90 की रिहाई के बाद 150 बंधक बचे. हर दिन 10 बंधकों की रिहाई के फ़ॉर्मूले पर आगे बढ़ा गया तो भी युद्ध विराम 10 से 15 दिनों तक ही चल सकता है. वो भी तब जब हमास सभी बंधकों को छोड़ने को तैयार हो. एक जानकारी ये भी कहती है कि हमास के सैन्य विंग अल कासिम का मुखिया याह्या सिनवार सभी बंधकों की रिहाई को तैयार नहीं. माना जा रहा है कि वह कुछ बंधकों को मानवीय ढाल के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए अपने पास रखेगा. ख़ासतौर पर जो इज़राइल की सेना से जुड़े बंधक हैं जिनको हमास शायद ही छोड़े. एक चुनौती ये भी है कि सभी के सभी बंधक हमास के ही पास नहीं हैं. इस्लामिक जेहाद के पास भी हैं. इतना ही नहीं, 7 अक्टूबर के आतंकी हमले में बड़ी तादाद में जो आतंकवादी शामिल हुए थे, कुछ बंधक वैसे आतंकवादियों के पास भी होने की सूचना है. ऐसे में हर बंधक को छुड़ाने के लिए मौजूदा फ़ॉर्मूला काम करेगा या नहीं ये कहना मुश्किल है. हर बंधक वहां सुरक्षित हों ये भी ज़रुरी नहीं.

इन सब बातों के बीच एक बात तो साफ़ है कि युद्ध विराम तो महज़ कुछ दिन चलने वाला है. इस बीच ग़ाज़ा में जितनी अधिक से अधिक मदद सामग्री पहुंच जाए उतना अच्छा. ग़ाज़ा में 16 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं. वे दक्षिणी ग़ाज़ा के शरणार्थी शिविरों में या फिर सड़कों पर रहने को बाध्य हैं. हर दिन क़रीब 200 ट्रक राहत सामग्री ग़ाज़ा पट्टी पहुंचाई जा रही है. युद्ध विराम ख़त्म होने के बाद ज़ाहिर सी बात है कि राहत पहुंचने पर भी भारी असर पड़ेगा.

तो अब आते हैं इस सवाल पर कि युद्ध विराम ख़त्म होने के बाद इज़राइल ग़ाज़ा में क्या करेगा? पीएम बेंजामिन नेतन्याहू साफ़ कर चुके हैं कि इज़राइल हमास का ख़ात्मा कर ही मानेगा. उसकी सैन्य शक्ति तो इस तरह तबाह करेगा कि हमास फिर इज़राइल की सुरक्षा के लिए कभी ख़तरा न बने. तो सवाल है कि हमास को ख़त्म करने के लिए इज़राइल क्या करेगा? 

इज़राइल डिफेंस फ़ोर्स की तीन बटाइलियन तीन अलग अलग तरफ़ से उत्तरी ग़ाज़ा को अपने कब्ज़े में ले चुकी है. वहां हमास के जितने भी ओवरग्राउंड कैपेब्लिटीज़ है वह उसे ख़त्म करने का दावा कर रही है. अल शिफ़ा अस्पताल में उसके कमांड हेडक्वार्टर तक पहुंचने का भी दावा किया है. कई सुरंगों का पता लगाने उन्हें हमास से मुक्त कराने का भी दावा किया है. हालांकि, इज़राइल मानता है कि हमास की भूमिगत ताक़त को अभी तक नष्ट नहीं किया जा सका है. और इसके अलावा जो सबसे बड़ी बात वो ये कि दक्षिणी ग़ाज़ा में आईडीएफ़ का ज़मीनी ऑपरेशन अभी बाक़ी है. इज़राइल का कहना है कि जिस तरह उत्तरी ग़ाज़ा के ग़ाज़ा सिटी में हमास का मुख्यालय है उसी तरह दक्षिणी ग़ाज़ा के खान यूनुस में भी हमास का बड़ा कमांड ऑफ़िस है. अल क़ासिम के प्रमुख याह्या सिनवार के भी खान यूनुस में ही होने की जानकारी है. 

ज़ाहिर है कि युद्ध विराम की समाप्ति के बाद आईडीएफ़ की रणनीति सैन्य अभियान को दक्षिणी ग़ाज़ा में खान यूनुस जैसे इलाक़े में लेकर जाने की है. वह ये कब करेगी, समय वो ख़ुद चुनेगी. इस तरह के संकेत भी मिल रहे हैं कि दक्षिणी ग़ाज़ा में इज़राइली सेना का अभियान दो से तीन महीने लंबा हो सकता है. उत्तर की तरह वह दक्षिणी ग़ाज़ा में भी हमास के ठिकानों को तबाह करेगी. ऐसा वह जब भी करेगी तो सवाल है कि लाखों लोग जो उत्तरी ग़ाज़ा से दक्षिणी ग़ाज़ा जाकर शरण लिए हैं वे कहां जाएंगे? और जो दक्षिणी ग़ाज़ा के मूल बाशिंदे हैं वे भी कहां जाएंगे? ख़ासतौर पर तब जब शरणार्थी शिविरों की हालत खस्ता है. लाखों लोगों को वहां जगह भी नहीं मिली है. किसी तरह जान बचा कर भागे हैं. उत्तर से आए शरणार्थी हों या दक्षिणी ग़ाज़ा के वासी, क्या उन सबको उसी तरह दक्षिण से उत्तरी ग़ाज़ा जाने को कहा जाएगा जैसे कि उत्तरी ग़ाज़ा से दक्षिणी ग़ाज़ा जाने को कहा गया? 

नई दिल्ली स्थित इज़राइल दूतावास में किए गए एक प्रेस कांफ्रेंस में इसका सीधी उत्तर नहीं मिला. इतना ज़रुर कहा गया कि बहुत सी ऐसी सुरक्षित जगहें हैं जहां ग़ाज़ा के निवासियों को जाने के कहा जा सकता है. इसमें भूमध्यसागर का तटीय इलाक़ा भी हो सकता है. कुछ अंदरुनी इलाक़े भी हो सकते हैं. आपको याद होगा कि इज़राइल की सैन्य योजना से जुड़ा एक दस्तावेज़ लीक हुआ था जिसमें ग़ाज़ा के लोगों को मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप में धकेलने की बात थी. हालांकि इज़राइल पीएमओ ने इसका खंडन किया था. मिस्र ने भी इस पर आपत्ति जतायी थी. लेकिन सवाल है कि जब पूरा ग़ाज़ा सिमट कर दक्षिणी ग़ाज़ा में आ गया है तो ऐसे में दक्षिण से वे कहां जाएंगे. इतनी जगह और जीवन संबंधी ज़रुरत कहां पूरी हो सकती हैं जहां इनको जाने को कहा जाए? इज़राइल ने ग़ाज़ा वासियों को सिनाई इलाक़े में भेजे जाने की बात से इंकार किया है. लेकिन सवाल ये भी है कि जब बड़ा ज़मीनी हमला होगा तो लाखों लोग सुरक्षित जगह की तलाश में कहीं तो भागेंगे. अगर वे लाखों की तादाद में राफ़ाह सीमा की तरफ़ भागे तो क्या उनको अपनी सीमा में घुसने से रोकने के लिए इजिप्ट बंदूक गोली का इस्तेमाल करेगा? ये बेशक अभी एक हाइपोथेकिटक सवाल लग सकता है लेकिन हो सकता है कि ऐसी स्थिति आए. 

अगर ताक़त के बल ग़ाज़ा के लोगों को रोकने की कोशिश होती तो ज़ाहिर सी बात है कि वे दो तरफ़ से गोलियों से घिरेंगे. एक तरफ़ इज़राइल की सेना होगी तो दूसरी तरफ़ इजिप्ट के सुरक्षाकर्मी जो उनकी अपनी सीमा में जबरन घुसने से रोकेंगे. अगर ऐसा होता है तो स्थिति और भयावह हो सकती है. उम्मीद की जानी चाहिए कि ऐसा न हो. ऐसी किसी स्थिति से पहले को समझौता हो जाए और पूर्ण युद्ध विराम लागू हो जाए. और जब तक ऐसा नहीं होता, तमाम सवाल बने रहेंगे.

उमाशंकर सिंह NDTV में सीनियर एडिटर (पॉलिटिकल एंड फॉरेन अफेयर्स) हैं...

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