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This Article is From Aug 29, 2020

हिटलर के सम्मान को ठुकराने वाले 'दद्दा' को देश ने क्या दिया?

Sanjay Kishore
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    August 29, 2020 12:57 IST
    • Published On August 29, 2017 18:23 IST
    • Last Updated On August 29, 2017 18:23 IST

National Sports Day: आज खेल दिवस है. शुक्र है कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद (Major Dhyan Chand) के जन्मदिन को खेल दिवस के रूप में मनाने की परंपरा कायम रखी गई है. 'शुक्र है' इसलिए कह रहा हूं क्योंकि सियासी नफ़े-नुकसान ने कई शख़्सियतों को भारत रत्न बना दिया लेकिन उस खिलाड़ी को देश वो सम्मान आज भी नहीं दे पाया है जो दुनिया के सबसे बड़े तानाशाह एडॉल्फ़ हिटलर तक के प्रस्ताव को ठुकरा आया था. साल 1936 की बात है. तारीख थी 15 अगस्त. दुनिया का सबसे बड़े लोकतंत्र के जन्म में अभी 11 साल बाक़ी थे. बर्लिन ओलिंपिक का हॉकी फ़ाइनल मुकाबले में मेज़बान जर्मनी और भारत आमने-सामने थे.

स्टेडियम में एडॉल्फ़ हिटलर भी मौजूद था. जर्मन टीम हर हाल में मैच जीतना चाहती थी. खिलाड़ी धक्का-मुक्की पर उतर आए. जर्मन गोलकीपर टीटो वॉर्नहॉल्त्ज से टकराने से ध्यानचंद के दांत टूट गए. लेकिन वे जल्दी मैदान पर लौटे. ध्यानचंद की कप्तानी में भारत ने जर्मनी को 8-1 से रौंद डाला. तीन गोल ध्यानचंद ने और दो गोल उनके भाई रूपसिंह ने किए. ब्रिटिश-इंडियन सेना के एक मामूली मेजर ने उस दिन हिटलर का दर्प कुचल दिया. हिटलर ने ध्यानचंद को जर्मन नागरिकता और जर्मन सेना में कर्नल बनाने का प्रस्ताव दिया जिसे 31 साल के ध्यानचंद ने विनम्रता से ठुकरा दिया. बर्लिन ओलिंपिक में भारत ने 38 गोल किए और सिर्फ़ एक गोल खाया. ध्यानचंद के स्टिक से 11 गोल निकले. बर्लिन ओलिंपिक के पहले अंतर्राष्ट्रीय दौरों पर ध्यानचंद ने 175 में से 59 गोल किए.

यह भी पढ़ें : हॉकी खिलाड़ियों ने कहा, सचिन से पहले ध्यानचंद को मिलना था भारत रत्न..

वियना में हैं चार हाथों वाले 'हॉकी के जादूगर' ध्यानचंद!वीडियो : वर्ष 2016 में सिंधु, दीपा, साक्षी और जीतू को मिला था सम्‍मानसंजय किशोर एनडीटीवी के खेल विभाग में डिप्टी एडिटर हैं...डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) :

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