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This Article is From Apr 29, 2022

जम्मू-कश्मीर से निकली इस 'धारा' को तुरंत 'भारत' से जोड़ने की ज़रूरत!

मनीष शर्मा
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    अप्रैल 29, 2022 22:29 pm IST
    • Published On अप्रैल 29, 2022 21:52 pm IST
    • Last Updated On अप्रैल 29, 2022 22:29 pm IST

पिछले कुछ दिनों में COVID-19 के केस बढ़ने के साथ ही कोरोना की अगली लहर को लेकर भी देशवासियों में फिर से कुछ डर पैदा हो गया, लेकिन इसी दौरान भारतीय क्रिकेट में वह लहर ज़रूर आ गयी, जिसका इंतज़ार देश को कई दशकों से था. वह लहर, जिसे देखने के लिए आंखें तरस गई थीं, आंखों का पानी सूख गया था. जम्मू-कश्मीर से दो साल पहले अनुच्छेद 370 हटने के बाद यह 'धारा 150 (गति)' रूपी लहर इसी राज्य से निकली है. और इस 'प्रवाह धारा' ने सभी को मदहोश कर दिया है! दशकों से वैश्विक मीडिया तेज़ गेंदबाजों को लेकर भारतीय कप्तानों से, पूर्व दिग्गजों से सवाल पूछता रहा है. पड़ोसी देश के पुराने दिग्गजों से सालों से तंज और नसीहतें सुननी पड़ रही हैं, लेकिन अब ऐसा लगा है कि भारत को वह जवाब मिल गया है, जिससे वह दुनिया से कह सकता है कि अब इस तरह के सवाल जल्द ही बंद हो जाएंगे कि पाकिस्तान की तरह भारत में तेज़ गेंदबाज क्यों पैदा नहीं होते!

बहती हवा-सा एक आकर्षक रन-अप, और तेज़ गेंदें फेकने की भूख, विकेट लेने के बाद इसका 'स्वाद' लेने का उड़ती घटा जैसा जोशीला, खुद को शाबासी देने का अनूठा अंदाज़ और लगातार 150 किमी प्रति घंटा से ऊपर की रफ्तार के सम्मिश्रण के साथ स्टम्प्स से कुछ इंच पहले ही पिच की मिट्टी से मिलन करने वालीं तीखी यॉर्कर काफी हद तक एकबारगी वकार यूनुस की याद दिला देती हैं. हालांकि, इस याद भर को छोड़कर दोनों के बीच फिलहाल तो कोई तुलना नहीं है, लेकिन भविष्य के गर्भ में खूबसूरत संभावनाएं ज़रूर छिपी हैं! ऐसी संभावनाएं, जिन्हें बहुत ही सलीके से सजाने, संवारने और बहुत ही 'तरीके' से ध्यान रखे जाने की ज़रूरत है.

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श्रेयस अय्यर जैसा बल्लेबाज़ शॉट खेलने के लिए जगह बनाने जाता है, तो कब गेंद 'रूम' को चीरती हुई विकेटों में समा जाती है, उन्हें पता ही नहीं चलता. अहम बात यह है कि सफेद गेंद की तुलनात्मक रूप से दबी हुई सीम (सिलाई) के साथ यॉर्कर में स्विंग भी दिख रहा है. यहां कभी-कभी बीच में 10 फीसदी ही सही, रिवर्स स्विंग की मामूली झलक भी दिखती है. और फिलहाल सिर्फ 22 साल का यह पेसर जब कुछ साल बाद और ज़्यादा मज़बूत टांगों व कंधों के साथ लाल गेंद के साथ टेस्ट क्रिकेट में दुनिया के दिग्गज बल्लेबाज़ों की परीक्षा लेगा, तो नज़ारा क्या होगा, इस तस्वीर की कल्पना करते ही रोमांच पैदा होने लगता है.

रिकॉर्डधारी दिग्गज कपिल देव और उनके दौर के बाद भारत के लिए कई मीडियम पेसर आए, लेकिन ये मध्यम तेज़ गति के गेंदबाज़ ही कहलाए और ये स्विंग और सीम पर ज़्यादा निर्भर रहे. इनकी नैसर्गिक ताकत तेज़ी नहीं थी. इनमें चेतन शर्मा, जवागल श्रीनाथ वगैरह रहे, लेकिन जब बात गति की आई, तो बहुत शोर एक समय मुनाफ पटेल का हुआ था, लेकिन लगातार चोट और खेल के प्रति गंभीर न होने से मुनाफ तारीफों की कसौटी पर खुद को साबित नहीं कर पाए. फिर ज़हीर खान और उनके बाद शमी आए, तो इनकी ताकत सीम और स्विंग ही है, लेकिन उमरान मलिक इनसे इतर गति के ट्रैक पर हैं और भारत की पाटा पिचों पर नामी-गिरामी बल्लेबाज़ों को स्टम्प्स से 'भगा' रहे हैं! और यह तस्वीर बहुत ही सुहावनी है, क्योंकि हालिया दशकों में शायद ही पहले भारत में ऐसा तेज़ गेंदबाज देखा गया, जो अपनी गति से बल्लेबाज़ों पर मनोवैज्ञानिक वार कर रहा है, उन्हें दोहरी मनोदशा में ले जा रहा है, या जिनके विकेट की वजह सिर्फ गति बन रही है.

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यकीन नहीं होता कि महज़ चंद साल पहले तक उमरान मलिक जम्मू-कश्मीर में सिर्फ टेनिस बॉल क्रिकेट खेलते थे. वह अभी तक सिर्फ तीन प्रथम श्रेणी मैच खेले हैं और एक लिस्ट-ए (घरेलू वन-डे), लेकिन IPL ने उनके लिए जो किया है, वह भारतीय क्रिकेट के लिए किसी करिश्मे से कम नहीं. उमरान की जम्मू से निकलकर IPL तक पहुंचने की कहानी एकदम फिल्मी है और आगे भी वह कई ऐसी कहानियां रचने जा रहे हैं, जो फिल्मी पर्दे की शानदार कहानी का सबब भी बन सकती हैं!

यहां से BCCI को उमरान को 'SPG' (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप - यानी स्तरीय पेस बॉलिंग कोच, सही ट्रेनर, वर्कलोड मैनेजमेंट, टीम इंडिया स्तर की ट्रेनिंग) के घेरे में लेने की ज़रूरत है, क्योंकि उनकी काबिलियत 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' है. वर्ना मार्गदर्शन के अभाव में और '90 या 2000 के पहले दशक में कई प्रतिभाएं तब हवा-हवाई हो गईं या उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सकीं, जब उस दौर में आज जैसी ज़्यादा क्रिकेट भी नहीं हुआ करती थी. IPL के पहले संस्करण में आज़मगढ़ से निकले लेफ्टी मीडियम पेसर कामरान खान और उससे कुछ साल पहले मुनाफ पटेल का उदाहरण इस बात का सबूत है, लेकिन कामरान का सूरज जितनी तेज़ी से चढ़ा था, उससे भी ज़्यादा तेज़ गति से अस्त भी हो गया!

अब जबकि इस साल टी-20 वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया की तुलनात्मक तेज़ और उछाल भरी पिचों पर खेला जाना है, तो इस युवा को टी-20 से तत्काल प्रभाव से जोड़कर तब तक देश की जर्सी का कुछ अनुभव दिलाए जाने की ज़रूरत है, और जून में श्रीलंका के खिलाफ खेले जाने वाले पांच टी-20, इसके बाद इंग्लैंड में तीन टी-20, एक टेस्ट और कुछ वन-डे मैचों का मंच हर हाल में सेलेक्टरों को उमरान मलिक को देना ही होगा, क्योंकि इस समय उमरान मलिक की आग उगल रही गेंदों का टेक्स्चर (बनावट, गठन) वी.वी.एस. लक्ष्मण की तरह वेरी-वेरी स्पेशल है. और जब नीली जर्सी में यह टेक्स्चर अपने चरम पर होगा, तो यह एक ऐसी तस्वीर होगी, जो भारतीय क्रिकेट में बमुश्किल ही पहले देखी गई! उम्मीद है, इस टेक्स्चर ने राष्ट्रीय चयन समिति के मन पर भी गहरा असर डाला होगा. ठीक उस तरह, जैसे करोड़ों फैन्स और सनी गावस्कर जैसे दिग्गज पर डाला है. तो इंतज़ार कीजिए - तेल देखिए, तेल की धार देखिए! यह धार अलग है, यह धारा और लहर अलग है!

मनीष शर्मा WWW.NDTV.IN में डिप्टी न्यूज एडिटर हैं...

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. 

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