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बारूद की गंध के बीच फुटबॉल: जब युद्ध और संघर्षों के साये में खेला गया विश्व कप

हिमांशु जोशी
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    जून 11, 2026 12:32 pm IST
    • Published On जून 11, 2026 12:32 pm IST
    • Last Updated On जून 11, 2026 12:32 pm IST
बारूद की गंध के बीच फुटबॉल: जब युद्ध और संघर्षों के साये में खेला गया विश्व कप

इन दिनों 2026 फुटबॉल विश्व कप का आधिकारिक थीम सॉन्ग 'दाई दाई' धूम मचा रहा है, लेकिन यह टूर्नामेंट एक ऐसे दौर में खेला जा रहा है जब मेजबान देशों में से एक अमेरिका और प्रतिभागी देश ईरान के बीच गहरे राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी तनाव मौजूद हैं.

दुनिया के कई हिस्सों में इस समय युद्ध और संघर्ष जारी है. पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है, यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध पिछले चार साल से जारी है. ऐसे अशांत माहौल के बीच 2026 फीफा विश्व कप 11 जून 2026 से अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में संयुक्त रूप से शुरू हो रहा है. 

जब युद्ध ने विश्व कप ही रोक दिया

विश्व कप के इतिहास में केवल दो बार ऐसा हुआ है जब टूर्नामेंट आयोजित नहीं हो सका. 1942 और 1946 के विश्व कप, द्वितीय विश्व युद्ध की वजह से रद्द कर दिए गए थे. इसलिए 1938 के बाद दुनिया को अगला विश्व कप देखने के लिए 1950 तक इंतजार करना पड़ा था.

द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने से ठीक पहले फ्रांस में 1938 का विश्व कप खेला गया था. उस समय यूरोप में तनाव चरम पर था. ऑस्ट्रिया की टीम विश्व कप के लिए क्वालिफाई कर चुकी थी, लेकिन जर्मनी द्वारा ऑस्ट्रिया के विलय (Anschluss) के बाद वह टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकी.

रूस पर प्रतिबंध और यूक्रेन की मुश्किलें

यूक्रेन पर हमले के बाद फीफा और यूईएफए (UEFA) ने रूस पर कड़ा रुख अपनाया. इसका सीधा असर विश्व कप पर पड़ा और प्रतिबंध के कारण रूस 2026 विश्व कप की क्वालिफिकेशन प्रक्रिया का हिस्सा ही नहीं बन सका. इसे आधुनिक खेल इतिहास के सबसे बड़े प्रतिबंधों में से एक माना जा रहा है.

दूसरी ओर, यूक्रेन की टीम को अपने कई घरेलू मुकाबले देश से बाहर न्यूट्रल वेन्यू पर खेलने पड़े. युद्ध के कारण देश के स्टेडियम,प्रशिक्षण सुविधाएं और खेल ढांचा पूरी तरह प्रभावित हुआ, लेकिन इसके बावजूद टीम ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी खेल भावना और मौजूदगी को बनाए रखा. युद्ध की मार झेल रही यूक्रेनी टीम का सफर मार्च 2026 में समाप्त हो गया, जब विश्व कप प्ले-ऑफ के सेमीफाइनल में उसे स्वीडन के हाथों 3-1 से हार का सामना करना पड़ा.

इस विश्व कप में फिलिस्तीन की अधूरी कहानी

2026 विश्व कप क्वालिफिकेशन में फिलिस्तीन ने अपने इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. गाजा संघर्ष की विभीषिका के बीच टीम को अपने सभी घरेलू मैच भी तटस्थ मैदानों पर खेलने पड़े. विपरीत परिस्थितियों के बावजूद यह टीम पहली बार विश्व कप के बेहद करीब पहुंच गई थी.

क्वालिफिकेशन के निर्णायक दौर में ओमान के खिलाफ मुकाबले में फिलिस्तीन जीत की ओर बढ़ रहा था, लेकिन इंजरी टाइम में विपक्षी टीम को मिले पेनाल्टी गोल ने उसका सपना तोड़ दिया. 1-1 की इस बराबरी ने फिलिस्तीन को विश्व कप की दौड़ से बाहर कर दिया. 

इस विश्व कप की सबसे असाधारण कहानी

अगर 2026 विश्व कप की सबसे असाधारण कहानी लिखी जाएगी तो वह ईरान की होगी. एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच गंभीर भू-राजनीतिक तनाव है. दोनों देशों के संबंध दशकों से बेहद खराब रहे हैं और हाल के महीनों में हालात और ज्यादा जटिल हुए हैं. दूसरी तरफ, ईरान ने शानदार खेल दिखाते हुए विश्व कप के लिए क्वालिफाई किया है और उसे अपने ग्रुप चरण के मुकाबले अमेरिका की धरती पर ही खेलने हैं.

स्थिति इतनी असामान्य है कि सुरक्षा और राजनीतिक कारणों से ईरानी टीम ने अमेरिका के बजाय मेक्सिको के सीमावर्ती शहर तिजुआना (Tijuana) में अपना बेस कैंप बनाया है. हाल ही में वीजा को लेकर हुआ विवाद भी सुर्खियों में रहा. खिलाड़ियों को तो अमेरिका में प्रवेश की अनुमति मिल गई, लेकिन ईरान के कुछ प्रमुख अधिकारियों और सहयोगी स्टाफ को वीजा देने से इनकार कर दिया गया.

(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)

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