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MP के 'मामा' चुनेंगे बिहार का CM... शिवराज को पर्यवेक्षक बनाकर BJP ने साधे एक तीर से कई निशाने!

पटना में मंगलवार को बीजेपी और एनडीए की बैठक है. इस बैठक में बिहार का नया मुख्यमंत्री चुना जाएगा. बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाकर यहां भेजा है.

MP के 'मामा' चुनेंगे बिहार का CM... शिवराज को पर्यवेक्षक बनाकर BJP ने साधे एक तीर से कई निशाने!
  • बिहार की राजधानी पटना में बीजेपी विधायक दल की बैठक मंगलवार को होगी, जिसमें नया मुख्यमंत्री चुना जाएगा
  • शिवराज सिंह चौहान को बिहार का मुख्यमंत्री चुनने और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है
  • शिवराज चौहान मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान कृषि मंत्री हैं, जो संगठन और सरकार दोनों को समझते हैं
पटना:

बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक है. नेता चुना जाएगा. मुख्यमंत्री का चेहरा लगभग साफ होगा. लेकिन राजनीति में असली कहानी वहां शुरू होती है, जहां आधिकारिक लाइन खत्म होती है. ऐसे वक्त में बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान को भेजा है. वजह साफ है. अनुभव, स्वीकार्यता, संगठन पर पकड़ और मुस्कुराते हुए मुश्किल कमरे को संभाल लेने की कला.

शिवराज सिंह चौहान के ऊपर बिहार का नया मुख्यमंत्री चुनने की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा, 'मैं बस पार्टी का एक कार्यकर्ता हूं, और एक कार्यकर्ता के तौर पर, यह मेरा फर्ज है कि मुझे जो भी काम सौंपा जाए, उसे मैं पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ करूं. पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी देती है, मैं उसे पूरी तरह निभाता हूं.'

मशहूर व्यंग्यकार शरद जोशी ने पटना पहुंचने पर लिखा था "नरवस" यहां "नरभस" हो जाता है. आज बिहार की राजनीति में भी कुछ वैसी ही हवा है. चेहरे शांत हैं, लेकिन भीतर हलचल है. बात सर्वसम्मति की है, लेकिन सबकी नजर फैसले पर है. यानी बैठक लोकतांत्रिक है और बेचैनी पूरी तरह राजनीतिक.

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शिवराज ही क्यों?

67 साल के शिवराज चौहान संगठन, सरकार और संघ तीनों धुरियों पर लंबे समय से परखे हुए नेता हैं. 2005 से 2023 के बीच चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, उससे पहले 1991 से 2005 तक विदिशा से लगातार लोकसभा पहुंचे, और आज केंद्र में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री हैं. बीजेपी उन्हें ऐसे समय बिहार भेज रही है जब राज्य की सत्ता में बड़ा संक्रमण दिख रहा है और विधायक दल का नेता चुनना सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शक्ति-संतुलन की असली परीक्षा है.

वैसे शिवराज को भेजने के पीछे सिर्फ अनुभव नहीं, संदेश भी है. वे ओबीसी पृष्ठभूमि से आते हैं, बिहार की राजनीति में पिछड़ा और अति पिछड़ा समीकरण सिर्फ सामाजिक शब्द नहीं, सत्ता की गिनती का अबेकस है. बीजेपी इसे सार्वजनिक रूप से जाति की राजनीति नहीं कहेगी, लेकिन संदेशों की राजनीति हर दल समझता है. यानी पर्यवेक्षक एक, संकेत कई. 

शिवराज हिंदी पट्टी की राजनीति समझते हैं, और पार्टी में ऐसे नेता माने जाते हैं जो टकराव कम, सहमति ज्यादा पैदा करते हैं. बिहार में अभी बीजेपी को ऐसा ही चेहरा चाहिए जो नेता चुने जाने से ज्यादा, बाकी चेहरों को संभाल ले.

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पहले बीजेपी, फिर एनडीए की बैठक

बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी ने बताया कि मंगलवार को 3 बजे बीजेपी विधायक दल की बैठक बुलाई गई है, शिवराज सिंह चौहान इसमें केन्द्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद रहेंगे. इसके बाद 4 बजे एनडीए की बैठक बुलाई गई है.

MP के 'मामा' चुनेंगे बिहार का CM

अब जरा शरद जोशी के दूसरे व्यंग्य को याद कीजिए- 'जिसके हम मामा हैं.' बनारस में एक लड़का "मामाजी" कहकर साथ हो लेता है, गंगा नहला देता है, और जैसे ही सज्जन डुबकी लगाकर निकलते हैं सामान भी गायब, मुन्ना भी गायब. फिर वे तौलिया लपेटे पूछते फिरते हैं ... वही, जिसके हम मामा हैं? 

विपक्ष भी यही सवाल पूछ रहा है, मामा आए हैं, लेकिन आखिर किसके लिए? क्योंकि यहां दावेदार भी हैं, पर्यवेक्षक भी हैं, सहयोगी भी हैं, और जनता भी. फर्क बस इतना है कि इस बार घाट गंगा का नहीं, सत्ता का है. और सबकी निगाह इस पर है कि डुबकी कौन लगाएगा? कुर्सी कौन पाएगा? और बाद में तौलिया लपेटे कौन खड़ा रह जाएगा?

आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा 'बिहार कई संभावनाओं को खारिज कर चुका है. जो प्रभारी महोदय तय किए गए हैं उन्हें भी नहीं पता होगा कि किसको चुनना है. उन्हें भी पर्ची हवाई जहाज में जाते समय दी जाएगी. सेलो टेप से बांधकर कि इसी टाइम पर खुलेगा. पर्ची खुलने दीजिए.'

मध्यप्रदेश के ‘मामा' बिहार में पर्यवेक्षक बनकर आए हैं. अब देखना यह है कि वे बिहार की राजनीति को साधते हैं, या पटना उन्हें भी थोड़ा-बहुत नरभसा देता है.

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