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वे शेड्यूल ट्राइब जो करोड़ों कमाते हैं, ईसाई बन चुके हैं उन्हें टैक्स में छूट क्यों? SC ने दिया ये जवाब

शेड्यूल ट्राइब के लिए इनकम टैक्स में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि केवल इसलिए कि किसी ने किसी प्रावधान का दुरुपयोग किया है, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी लोगों पर संदेह किया जाए.

वे शेड्यूल ट्राइब जो करोड़ों कमाते हैं, ईसाई बन चुके हैं उन्हें टैक्स में छूट क्यों? SC ने दिया ये जवाब
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
  • ST के लिए इनकम टैक्स में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग पर SC नहीं करेगा सुनवाई
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ये सीधे-सीधे विधायी नीति का मामला है
  • संसद में समितियां हैं, जहां कानून में सुधार के लिए कोई अपनी बात रख सकता है.

Supreme Court on ST:  शेड्यूल ट्राइब (ST) इनकम टैक्स में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सीधे-सीधे विधायी नीति का मामला है इसलिए हम इसमें दखल देने को इच्छुक नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि किसी ने किसी प्रावधान का दुरुपयोग किया है. इसका मतलब ये नहीं है कि सभी लोगों पर संदेह किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संसदीय पिटिशन कमेटी जाने की छूट दी. अनुसूचित जनजाति (ST)  में आयकर में क्रीमी लेयर व्यवस्था लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने दलील दी कि आर्थिक रूप से अत्यंत समृद्ध हो चुके लोगों को भी आरक्षण और अन्य विशेष लाभ मिलते रहना समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है.

जानें याचिकाकर्ता ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि उत्तर- पूर्वी राज्यों में आदिवासी समुदायों के लोग जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया है, बड़ी संख्या में शैक्षणिक संस्थान चलाते हैं, करोड़ों रुपये की आय अर्जित करते हैं, फिर भी विभिन्न लाभ प्राप्त करते रहते हैं.  उन्होंने कहा कि मामला संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 19 और 27 की व्याख्या से जुड़ा है. याचिकाकर्ता ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में कई आदिवासी 500-1000 करोड़ के मालिक हैं, उनके कॉलेज हैं, कोल्ड स्टोरेज हैं, फिर भी ऐसे लोगों को टैक्स में छूट दी जा रही है. हम चाहते हैं कि इसमें क्रीमी लेयर सिस्टम लागू किया जाएगा. गरीब ट्राइबल को छूट दी जाए. लेकिन वो आदिवासी जिन्हें ट्राइबल के नाम पर टैक्स में छूट दी जा रही है, जो कि ईसाई बन चुके हैं, किसी आदिवासी परंपरा का पालन भी नहीं करते हैं, उन्हें टैक्स में छूट आर्टिकल 27 का कंपलीट वॉयलेशन है.

CJI सूर्यकांत ने दिया ये जवाब

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि केवल इसलिए कि किसी ने किसी प्रावधान का दुरुपयोग किया है, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी लोगों पर संदेह किया जाए.  मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि यह मूलतः विधायी नीति का विषय है.  उन्होंने संकेत दिया कि संसद और उसके संबंधित समितियां कानून बनाने या उसमें संशोधन करने के लिए उचित मंच है. उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि इस विषय से अवगत होंगे.  संसद में समितियां हैं, जहां कोई भी नागरिक कानून बनाने या कानून में सुधार के लिए अपनी बात रख सकता है. मुझे भरोसा है कि वे इस पर विचार करेंगे.

जानें क्या है पूरा मामला

पूर्वोत्तर राज्यों में आदिवासी इलाके के आदिवासियों को ट्राइबल के नाम पर इनकम टैक्स में दी गई छूट के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सरकार के सामने अपनी बात रखने को कहा है. याचिका मे कहा गया है कि पूर्वोत्तर राज्यों के अधिकतर आदिवासी धर्म बदल चुके हैं,  लेकिन इनकम टैक्स मे छूट का फायदा उठा रहे हैं, जो आदिवासी ईसाई बन गए और अब करोड़ों कमाते हैं, उनके पास इतने सारे एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन कैसे हो सकते हैं. कुछ हर साल 200 करोड़ रुपये कमाते हैं और फिर भी उन्हें टैक्स देने से छूट मिलती है. यह आर्टिकल 14, 19 और 27 का उल्लंघन है. 

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