- बिहार में पांच राज्यसभा सीटों के लिए NDA ने अपने उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है
- राजद ने राज्यसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है लेकिन तेजस्वी यादव चुनाव नहीं लड़ेंगे, अन्य उम्मीदवारों पर विचार
- राजद AIMIM को एक कन्फर्म सीट देने को तैयार नहीं है, इससे विपक्षी गठबंधन के लिए उम्मीदवार जीतना चुनौतीपूर्ण
बिहार में 5 सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है. भाजपा और RLM ने अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. भाजपा की तरफ से नितिन नबीन, शिवेश राम उम्मीदवार हैं तो RLM ने उपेन्द्र कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है. 2 सीटें जदयू के खाते में जानी हैं जदयू की तरफ से निशांत और रामनाथ ठाकुर के नाम लगभग फाइनल हैं अधिकारिक ऐलान बाकी है. ऐसे में यह साफ है कि NDA सभी 5 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. राजद ने पिछले दिनों यह तय किया था कि पार्टी राज्यसभा चुनाव लड़ेगी. तेजस्वी यादव के नाम की चर्चा थी लेकिन अब यह माना जा रहा है कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे. राजद की तरफ से दो निवर्तमान राज्यसभा सांसदों में से कोई उम्मीदवार हो सकता है.
AIMIM से बातचीत अब तक फाइनल नहीं
बिहार में संख्याबल के हिसाब से समूचा विपक्ष एकजुट होने के बाद ही 1 सीट जीत सकता है. ऐसे में AIMIM की भूमिका अहम थी. सूत्रों की मानें तो AIMIM ने अपने लिए एक MLC की सीट मांगी है. इस मांग पर अब तक अंतिम फैसला नहीं हुआ है. अगर AIMIM विपक्षी खेमे को समर्थन नहीं देता है तो राजद के लिए अपना उम्मीदवार भेजना संभव नहीं होगा NDA ने 5वीं सीट पर उम्मीदवार देकर ऐसे भी मुकाबला दिलचस्प बना दिया है इसलिए अब पार्टी की तरफ से उन नामों पर विचार किया जा रहा है, जिन्हें राज्यसभा चुनाव लड़ने का अनुभव रहा है. इसमें सांसद एडी सिंह और प्रेमचंद गुप्ता के नाम शामिल हैं. दोनों नेता अपने स्तर पर विपक्षी पार्टियों से संपर्क भी कर रहे हैं.
इकलौती MLC सीट नहीं छोड़ना चाहती है RJD
दरअसल, जून-जुलाई में बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर चुनाव होंगे. इनमें 3 सीटें राजद के पास है. मौजूदा संख्याबल के हिसाब से राजद के हिस्से महज एक सीट आएगी यानी इस चुनाव के बाद विधान परिषद में पार्टी की संख्या 15 से घटकर 13 रह जाएगी. अगर राजद AIMIM को यह सीट दे देती है तो संख्या घटकर 12 हो जाएगी. राजद एक कन्फर्म सीट AIMIM को नहीं देना चाहती है. यहीं पेच फंसा हुआ है. इधर जदयू ने भी AIMIM विधायकों से संपर्क किया है. मंत्री अशोक चौधरी ने AIMIM के विधायक तौसीफ आलम से मुलाकात की थी. बसपा विधायक सतीश यादव भी कह चुके हैं कि वे किसी भी गुट का हिस्सा नहीं हैं. ऐसे में विपक्षी खेमे के लिए अपना उम्मीदवार जिता पाना आसान नहीं है इसलिए पार्टी तेजस्वी यादव के चेहरे पर दांव नहीं लगाना चाहती क्योंकि अगर वे चुनाव हारते हैं तो विधानसभा चुनाव के बाद यह एक और सेटबैक होगा.
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