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Success Story: किसान के बेटे पिंकेश बने SDM, गांव में रहकर की सेल्फ स्टडी; पिता पढ़ाई के समय बगल में बैठकर बढ़ाते थे हौसला

कहते हैं कि सफलता किस्मत नहीं, बल्कि मेहनत और हौसले की मोहताज होती है. इसे सच साबित किया किसान के बेटे पिंकेश कुमार ने, जिन्होंने अथक मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर 70वीं बीपीएससी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल किया है. उन्होंने 161वीं रैंक हासिल कर SDM पद के लिए चयनित होकर जिले का नाम रोशन किया है. जानिए उनकी सफलता की कहानी...

Success Story: किसान के बेटे पिंकेश बने SDM, गांव में रहकर की सेल्फ स्टडी; पिता पढ़ाई के समय बगल में बैठकर बढ़ाते थे हौसला
Pinkes Kumar Success Story: किसान के बेटे ने रचा इतिहास, 70वीं BPSC परीक्षा में सफलता पाकर बने SDM

Success Story: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों, तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है. 70वीं बीपीएससी परीक्षा के नतीजों ने यह साबित कर दिया है कि सफलता किस्मत से नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत, निरंतर संघर्ष और बुलंद हौसलों से हासिल होती है. आज एक ऐसी ही सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी बिहार के छोटे से गांव मंझौल से सामने आई है. जहां एक किसान के बेटे ने (SDM Pinkesh Kumar Success Story) ने अथक परिश्रम, लगन और दृढ़ संकल्प के दम पर बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर एसडीएम बनने का सपना पूरा किया है. उन्होंने सीमित संसाधनों और तमाम चुनौतियों के बावजूद यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है.

दूसरे प्रयास में बने SDM

यह कहानी बिहार के बेगूसराय के मंझौल थाना क्षेत्र के मंझौल गांव के रहने वाले पिंकेश कुमार सिंह की है... पिंकेश के पिता साकेत कुमार किसान हैं, जबकि मां कामिनी देवी कुशल गृहिणी हैं. पिंकेश परिवार के इकलौते बेटे हैं और यह सफलता उन्हें दूसरे प्रयास में मिली है. पिंकेश कुमार ने 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा में 161वीं रैंक हासिल कर एसडीएम (SDM) बने हैं. 

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बिना कोचिंग, गांव में रहकर की तैयारी

किसान परिवार से आने वाले पिंकेश ने बिना कोचिंग के गांव में रहकर तैयारी की और दूसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की. उनकी सफलता के पीछे पिता का त्याग और निरंतर सहयोग सबसे बड़ी ताकत रहा. पिंकेश अर्जुन की तरह अपने लक्ष्य पर नजरें गड़ाए बैठे थे. हालांकि उनकी यह राह इतनी आसान नहीं थी. ​पहला प्रयास में उन्हें असफलता हाथ लगी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और अपने हौसले बुलंद रखे... अपनी कमियों को पहचाना, गलतियों को सुधाकर दोगुनी मेहनत से तैयारी में जुट गए. जिसका ​नतीजा आपके सामने है... उन्होंने दूसरे प्रयास में न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि सीधे SDM का पद हासिल कर लिया.

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बेगूसराय के पिंकेश कुमार ने कर दिखाया कमाल

बेगूसराय जिले के मंझौल गांव के निवासी पिंकेश को यह सफलता दूसरे प्रयास में मिली. इससे पहले उन्होंने 67वीं बीपीएससी परीक्षा में प्री और मेंस परीक्षा पास कर इंटरव्यू तक का सफर तय किया था, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका. असफलता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी.

8-10 घंटे करते थे पढ़ाई

पिंकेश ने अपनी स्कूली शिक्षा प्रोग्रेसिव सेंट्रल हाई स्कूल (पीसी हाई स्कूल), पात्सा (समस्तीपुर) से पूरी की. इसके बाद बीएन कॉलेज, पटना से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. वर्ष 2022 में इग्नू से पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया. इसी दौरान साल 2021 में उन्होंने बीपीएससी की तैयारी शुरू कर दी. वह प्रतिदिन 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे. किसान परिवार से आने के कारण वो गांव में रहकर पढ़ाई करते थे, यहां लाइब्रेरी की सुविधा नहीं थी, ऐसे में उन्होंने एक कमरे को स्टडी रूम बनाया.

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सेल्फ स्टडी कर हासिल की सफलता

NDTV से बातचीत में पिंकेश ने बताया वह सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर हैं. किसी भी कोचिंग संस्थान की मदद नहीं ली और सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया. हालांकि इंटरव्यू की तैयारी के लिए विभिन्न संस्थानों में मॉक टेस्ट दिए थे.

उन्होंने NDTV को आगे बताया कि उन्होंने पूरी तैयारी गांव में रहकर की. कभी-कभी बिजली की समस्या आती थी, लेकिन इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं हुई. उन्होंने घर में एक अलग कमरा तैयार किया था, जहां वह नियमित रूप से पढ़ाई करते थे.

पिंकेश ने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपने परिवार और खासकर पिता को दिया है. उन्होंने बताया कि पढ़ाई के दौरान उनके पिता अक्सर बगल वाले बेड पर बैठ जाते थे, ताकि उनका ध्यान पढ़ाई से भटकने न पाए. वह जो पढ़ते थे, पिता उसे ध्यान से सुनते थे और उनका मनोबल बढ़ाते थे. पिंकेश कहते हैं कि परिवार का यही सहयोग उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत बना.

72वीं बीपीएससी अभ्यर्थियों को सलाह

72वीं बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में अब कुछ ही दिन शेष हैं. ऐसे में पिंकेश ने 72वीं बीपीएससी परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों को महत्वपूर्ण सलाह दी है. उन्होंने कहा कि अब किसी नए विषय, नई किताब या नए सोर्स की ओर नहीं जाना चाहिए. केवल पहले से पढ़े गए विषयों का रिवीजन करें और अधिक से अधिक प्रीवियस ईयर क्वेश्चन (PYQ ) का हल करें. उन्होंने अभ्यर्थियों से कोचिंग के नए टेस्ट देने से बचने की भी सलाह दी.

पिंकेश NDTV से कहते हैं- अंतिम समय में दो चीजों पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए, पहला- नेगेटिव मार्किंग कम करना और दूसरा- टाइम मैनेजमेंट को बेहतर बनाना. यही रणनीति परीक्षा में सफलता दिलाने में मददगार साबित होगी.

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