- राबड़ी देवी ने बंगला खाली करने के लिए 5 जुलाई तक समय मांगा है.
- पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी को नया बंगला आवंटित किया जा चुका है.
- राजद और लालू परिवार सरकार पर विपक्ष को दबाने का आरोप लगा रहा है.
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सरकारी बंगला खाली करने के लिए राज्य सरकार से 5 जुलाई तक का समय मांगा है. यह तारीख राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 5 जुलाई को राष्ट्रीय जनता दल का स्थापना दिवस मनाया जाता है. हर साल इस मौके पर पटना में RJD का बड़ा कार्यक्रम होता है, जिसमें देशभर से पार्टी के नेता, सांसद, विधायक और हजारों कार्यकर्ता शामिल होते हैं. माना जा रहा है कि इसी वजह से राबड़ी देवी ने 5 जुलाई तक की मोहलत मांगी है. राबड़ी देवी के इस अनुरोध के साथ ही एक बार फिर 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले का विवाद चर्चा में आ गया है. पिछले कई महीनों से यह मामला सरकार और राजद के बीच राजनीतिक टकराव का कारण बना हुआ है.
कई बार जारी हुआ नोटिस
पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब राज्य सरकार ने राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड का सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया. यह वही बंगला है, जहां लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार लंबे समय से रह रहा है. सरकार ने राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड स्थित दूसरा सरकारी आवास आवंटित कर दिया और कहा कि 10 सर्कुलर रोड का बंगला अब राज्य सरकार के एक मंत्री को दिया जा चुका है.
इसके बाद भवन निर्माण विभाग ने कई बार नोटिस जारी कर तय समय के भीतर बंगला खाली करने को कहा. सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह सरकारी नियमों का मामला है. उसके अनुसार सरकारी आवास किसी व्यक्ति की स्थायी संपत्ति नहीं होता. जब किसी दूसरे पात्र व्यक्ति को वही आवास आवंटित कर दिया गया है, तब उसे खाली कराना सरकार की जिम्मेदारी है.

राबड़ी देवी के सरकारी आवास से सामान लेकर निकल रहे वाहन
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लालू परिवार बोला- बदले का कार्रवाई
दूसरी तरफ राजद और लालू परिवार शुरू से इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से जोड़ते रहे हैं. जब सरकार ने बंगला खाली करने का नोटिस भेजा था, तब राबड़ी देवी ने कहा था कि अगर सरकार बंगला खाली कराना चाहती है तो पुलिस भेजकर खाली करा ले, लेकिन वह खुद बंगला छोड़कर नहीं जाएंगी. इस बयान के बाद विवाद और तेज हो गया था.
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और पार्टी के दूसरे नेताओं ने भी सरकार पर विपक्ष को परेशान करने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है. राजद नेताओं ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया. उस दौरान बड़ी संख्या में राजद कार्यकर्ता भी राबड़ी देवी के आवास पर पहुंच गए थे और उन्होंने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था.
05 जुलाई तक राबड़ी ने मांगी मोहलत
बाद में राबड़ी देवी ने अपना रुख कुछ नरम किया और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर पहले एक महीने का समय मांगा. अब उन्होंने 5 जुलाई तक की मोहलत देने का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उनके रहने के लिए कुछ विशेष व्यवस्था की सलाह दी है. नए आवास में अभी जरूरी तैयारियां पूरी नहीं हुई हैं. इसलिए कुछ और समय की जरूरत है.
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि लालू परिवार सरकार की ओर से दिए गए नए सरकारी बंगले में लंबे समय तक रहने का इच्छुक नहीं है. बताया जा रहा है कि पटना में उनका निजी आवास लगभग तैयार है और परिवार भविष्य में वहीं शिफ्ट हो सकता है. तब तक वे अस्थायी व्यवस्था करना चाहते हैं.

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राजद के लिए खास दिन
5 जुलाई की तारीख इसलिए भी खास है क्योंकि इसी दिन राजद अपना स्थापना दिवस मनाता है. पार्टी के लिए यह केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि अपनी ताकत दिखाने का भी बड़ा मौका होता है. इस दिन पार्टी अपनी राजनीतिक रणनीति, संगठन की दिशा और भविष्य की योजनाओं का संदेश भी देती है. देशभर से बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता पटना पहुंचते हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि राबड़ी देवी चाहती हैं कि स्थापना दिवस का कार्यक्रम किसी तरह के विवाद या जल्दबाजी के बिना पूरा हो जाए.
अब सबकी नजर राज्य सरकार के फैसले पर है. यदि सरकार 5 जुलाई तक की मोहलत देती है तो विवाद कुछ समय के लिए शांत हो सकता है. लेकिन अगर सरकार अपने पहले के फैसले पर कायम रहती है तो यह मामला फिर से राजनीतिक टकराव का कारण बन सकता है.
फिलहाल यह विवाद केवल एक सरकारी बंगला खाली कराने तक सीमित नहीं रह गया है. सरकार इसे नियमों के पालन का मामला बता रही है, जबकि राजद इसे राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण बता रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और गर्मा सकता है.
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