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बंगले की लड़ाई या महादलित वोट बैंक पर चढ़ाई? राबड़ी आवास के विवाद के पीछे छिपा है बड़ा सियासी 'खेल'

राबड़ी देवी के सरकारी आवास को खाली कराने का मामला अब सियासी मुद्दा बन गया है. प्रशासन की कार्रवाई तेज होने के बीच पुलिस टीम आवास पहुंची, जबकि राबड़ी देवी ने साफ तौर पर बंगला खाली करने से इनकार कर दिया है.

बंगले की लड़ाई या महादलित वोट बैंक पर चढ़ाई? राबड़ी आवास के विवाद के पीछे छिपा है बड़ा सियासी 'खेल'
  • पटना पुलिस की टीम सचिवालय थाना की एसडीपीओ के नेतृत्व में 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास पर पहुंची.
  • पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने साफ कहा कि वे स्वयं बंगला नहीं छोड़ेंगी और फोर्स के जरिए ही खाली कराया जाए.
  • सरकार ने यह सरकारी आवास पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है.
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पटना:

बिहार की राजधानी पटना में राबड़ी आवास को खाली कराने का विवाद शनिवार को नया मोड़ लेता दिखा, जब पटना पुलिस की टीम सचिवालय थाना की एसडीपीओ के नेतृत्व में 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर पहुंची. भवन निर्माण विभाग पहले ही इस सरकारी आवास को खाली करने का आदेश जारी कर चुका है. खास बात यह रही कि उस समय राबड़ी देवी खुद आवास में मौजूद थी. दिल्ली से पटना लौटने के कुछ घंटे पहले ही उन्होंने साफ कहा था कि यदि सरकार को आवास खाली कराना है तो फोर्स के जरिए कराए, वह स्वयं बंगला नहीं छोड़ेंगी. उनके इस बयान के तुरंत बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने से बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई.

हालांकि, प्रशासन की ओर से इसे सामान्य प्रक्रिया बताया जा रहा है. लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे एक बड़े सियासी घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है. दरअसल, बिहार सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया है. यह वहीं बंगला है, जो बीते दो दशकों से लालू-राबड़ी परिवार की राजनीतिक पहचान का केंद्र रहा है. बिहार की राजनीति के कई अहम फैसले, चुनावी रणनीतियां और महत्वपूर्ण बैठकें इसी आवास से संचालित होती रही हैं.

इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदेश?

सरकार ने अब इस बंगले को पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है, जो महादलित समाज से आते हैं. ऐसे में इस घटनाक्रम को सिर्फ आवास बदलने का मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी देखा जा रहा है. भाजपा और एनडीए लंबे समय से दलित और महादलित वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में राज्य के सबसे चर्चित आवास में एक महादलित नेता का प्रवेश भाजपा की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

राजनीतिक जानकार इसे प्रतीकात्मक राजनीति का बड़ा उदाहरण बता रहे हैं. एक दौर में लालू प्रसाद यादव की राजनीति पिछड़ा, दलित और मुस्लिम समीकरण पर आधारित रही, जबकि बाद में नीतीश कुमार ने महादलित राजनीति को अलग पहचान दी. अब भाजपा उसी वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास में दिख रही है. ऐसे में यह आवंटन राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है.

दूसरी ओर, आरजेडी इस पूरे मामले को राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रही है. पार्टी नेताओं का आरोप है कि सरकार जानबूझकर लालू परिवार को निशाना बना रही है और आने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रतीकात्मक राजनीति के जरिए विपक्ष को कमजोर दिखाने की कोशिश की जा रही है. राबड़ी देवी के सख्त रुख ने इस विवाद को और तीखा बना दिया है.

नियमों के अनुसार पुराना आवास खाली करना जरूरी

वहीं, सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह नियमों के तहत की गई प्रशासनिक प्रक्रिया है. भवन निर्माण विभाग के मुताबिक, राबड़ी देवी को पहले ही वैकल्पिक आवास आवंटित किया जा चुका है और नियमों के अनुसार पुराना आवास खाली करना जरूरी है. भाजपा इसे नियमों के पालन और महादलित सम्मान से जोड़ रही है, जबकि आरजेडी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है.

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आगे क्या होता है. क्या राबड़ी देवी आवास खाली करेंगी या मामला और आगे बढ़ेगा? यदि प्रशासन सख्ती दिखाता है तो यह विवाद और बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है. विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और आरजेडी दोनों इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से जनता के बीच ले जाने की तैयारी में हैं. फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 10 सर्कुलर रोड का यह विवाद अब सिर्फ एक सरकारी बंगले का मामला नहीं रह गया है, बल्कि बिहार की बदलती सामाजिक राजनीति और भाजपा बनाम आरजेडी की नई सियासी लड़ाई का प्रतीक बन चुका है.

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