बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
पटना:
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस बात का आभास है कि महगठबंधन छोड़कर जब से उन्होंने भाजपा के साथ राज्य में फिर से सरकार बनाई है तब से अल्पसंख्यक समाज ख़ासकर मुस्लिम समुदाय में उनकी साख घटी है. सोमवार को एक कार्यक्रम में नीतीश ने कहा कि 'राजनीतिक रूप से जहां वोट करना हो कीजिएगा, उसकी चिंता नहीं हैं लेकिन हमने साम्प्रदायिक तत्वों, भ्रष्टाचार और अपराध से कभी समझौता नहीं किया.'
नीतीश अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की नयी योजनाओं का शुभारंभ कर रहे थे. अपने भाषण में उन्होंने अपने सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का बखान करते हुए बार-बार याद दिलाया कि जब से उनके नेतृत्व में बिहार में सरकार चल रही है, भले उनके साथ कोई रहे, काम में कोई कमी नहीं आने दी और ना किसी प्रकार का समझौता किया. उन्होंने याद दिलाया कि कैसे उनके सहयोगी भाजपा के विरोध के बावजूद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए ज़मीन का इंतज़ाम किया.
इस भाषण में नीतीश के तेवर से साफ़ झलका कि वो ये आभास कराना चाहते हैं कि मुस्लिम समुदाय में अपने प्रति एक अविश्वास के माहौल से भली भांति परिचित होने के बावजूद वो कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने कहा कि 'आपकी जवाबदेही मेरी है और ये मेरा दायित्व है. आप लोगों को मुख्य धारा में लाने के लिए अगर और योजनाओं को शुरू करना है तो बताइये, हम शुरुआत करेंगे.'
VIDEO: नीतीश कुमार ने बढ़ाई बेजीपी की मुश्किलें?
नीतीश ने कहा कि उनकी सरकार जाति पर आधारित नहीं बल्कि काम पर आधारित है. अपने सात निश्चय कार्यक्रम की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ समाज के सभी जाति और वर्ग के लोगों को मिल रहा है. इस भाषण से साफ़ है कि नीतीश को विश्वास है कि लोकसभा चुनाव में भले मुस्लिम समुदाय का वोट उन्हें ना मिले लेकिन अपने काम के आधार पर विधानसभा चुनाव तक वो उनके ग़ुस्से को शांत करने में कामयाब हो जाएंगे.
नीतीश अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की नयी योजनाओं का शुभारंभ कर रहे थे. अपने भाषण में उन्होंने अपने सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का बखान करते हुए बार-बार याद दिलाया कि जब से उनके नेतृत्व में बिहार में सरकार चल रही है, भले उनके साथ कोई रहे, काम में कोई कमी नहीं आने दी और ना किसी प्रकार का समझौता किया. उन्होंने याद दिलाया कि कैसे उनके सहयोगी भाजपा के विरोध के बावजूद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए ज़मीन का इंतज़ाम किया.
इस भाषण में नीतीश के तेवर से साफ़ झलका कि वो ये आभास कराना चाहते हैं कि मुस्लिम समुदाय में अपने प्रति एक अविश्वास के माहौल से भली भांति परिचित होने के बावजूद वो कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने कहा कि 'आपकी जवाबदेही मेरी है और ये मेरा दायित्व है. आप लोगों को मुख्य धारा में लाने के लिए अगर और योजनाओं को शुरू करना है तो बताइये, हम शुरुआत करेंगे.'
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नीतीश ने कहा कि उनकी सरकार जाति पर आधारित नहीं बल्कि काम पर आधारित है. अपने सात निश्चय कार्यक्रम की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ समाज के सभी जाति और वर्ग के लोगों को मिल रहा है. इस भाषण से साफ़ है कि नीतीश को विश्वास है कि लोकसभा चुनाव में भले मुस्लिम समुदाय का वोट उन्हें ना मिले लेकिन अपने काम के आधार पर विधानसभा चुनाव तक वो उनके ग़ुस्से को शांत करने में कामयाब हो जाएंगे.
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Nitish Kumar, Muslim Community