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This Article is From Dec 22, 2025

4 जिले, 3 बड़े नक्सली, बिहार में अंतिम सांसें गिन रहा लाल आतंक, 31 मार्च के डेडलाइन से पहले मिलेगी मुक्ति

बिहार में नक्सली लगभग खत्म हो चुके हैं. NDTV को मिली जानकारी के मुताबिक अब बिहार में केवल 3 नक्सली रह गए हैं और 4 ऐसे जिले हैं, जो उनके प्रभाव क्षेत्र में है. 

4 जिले, 3 बड़े नक्सली, बिहार में अंतिम सांसें गिन रहा लाल आतंक, 31 मार्च के डेडलाइन से पहले मिलेगी मुक्ति
बिहार में नक्सलवाद का अंतिम सासें गिन रहा है.
  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक भारत से नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
  • बिहार में वर्तमान में केवल चार जिले आंशिक रूप से नक्सल प्रभावित हैं और वहां नक्सलियों की संख्या तीन रह गई है.
  • बिहार पुलिस के अनुसार नितेश यादव, मनोहर गंजू और सुरेश कोड़ा बिहार के प्रमुख सक्रिय नक्सली हैं.
पटना:

Naxalism in Bihar: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत से नक्सलवाद के समाप्ति के लिए 31 मार्च 2026 का डेडलाइन तय कर रखा है. इस डेडलाइन से पहले भारत से बड़ी तेजी से लाल आतंक सिमटता नजर आ रहा है. बीते कुछ समय से भारत में बड़े पैमाने पर नक्सलियों के सरेंडर हुए. कई बड़े नाम एनकाउंटर में ढेर भी हुए. इससे यह स्पष्ट होता है कि डेडलाइन से पहले भारत में नक्सलवाद का अंत हो जाएगा. बिहार भी लंबे समय तक नक्सलियों के जद में था. लेकिन अब बड़ी तेजी से बिहार से नक्सलवाद समाप्त हो रहा है.   

बिहार में नक्सली लगभग खत्म हो चुके हैं. NDTV को मिली जानकारी के मुताबिक अब बिहार में केवल 3 नक्सली रह गए हैं और 4 ऐसे जिले हैं, जो उनके प्रभाव क्षेत्र में है. 

2019 तक बिहार के 16 जिलों में था लाल आतंक

एक वक्त था जब बिहार इस देश के सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित राज्यों में से एक था. 2019 में लगभग आधा बिहार यानी कि 16 जिले पूरी तरह से नक्सल प्रभावित और एक साल में 40 से ऊपर नक्सल वारदातें हुई. 2025 में अगर देखे तो पिछले पांच सालों में इन आंकड़े में अप्रत्याशित सुधार हुआ है.

बिहार के 4 जिले, जहां अभी भी नक्सली

अब बिहार पुलिस के मुताबिक बिहार के केवल 4 जिले नक्सल प्रभावित हैं. वो भी आंशिक रूप से, यानी की उनका एक छोटा भूभाग ही प्रभावित है. बिहार में अभी जिन जिलों में नक्सल जिंदा है- उसमें औरंगाबाद, गया, जमुई और लखीसराय है. इन चारों जिलों का भी एक छोटा सा हिस्सा है, जहां लाल आतंक जिंदा है. 

इन सबके पीछे ताबड़तोड़ हो रही गिरफ्तारियां, पुलिस के पास बेहतर खुफिया जानकारियों का होना और लगातार चल रहे एंटी नक्सल ऑपरेशन का अहम रोल रहा है. सोमवार को पटना में बुलाई गई प्रेस कॉफ्रेंस में डीजीपी ने दावा किया कि बिहार में नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है. 

एनडीटीवी को मिली EXCLUSIVE जानकारी के मुताबिक अब केवल तीन नक्सली हैं, जो बिहार पुलिस के रडार पर हैं.
  1. नितेश यादव उर्फ इरफान: औरंगाबाद और पलामू के इलाके में नितेश यादव उर्फ इरफ़ान का दस्ता है, जो काला पहाड़ के इलाके में सक्रिय है.
  2. मनोहर गंजूः गया, चतरा और पलामू इलाके में मनोहर गंजू एक कुख्यात नक्सल है और उसने अपने दस्ते को संगठित कर रखा है और एक छोटे भूभाग पर अपनी गतिविधि जारी रखी है.
  3.  सुरेश कोड़ाः बिहार में बचा तीसरा नक्सली सुरेश कोड़ा है, जिसके कार्य का इलाका जमुई,  मुंगेर और लखीसराय है यानि कि खड़गपुर पहाड़ियों का इलाका.

तीनों कुख्यात नक्सली, 500 के अधिक पुलिस के हथियार होंगे

मिली जानकारी के अनुसार ये तीनों नक्सली कुख्यात हैं. सरकार ने इनके ऊपर इनाम घोषित कर रखा है और बिहार STF और केन्द्र की सभी एजेंसियां इन्हें ढूंढने में लगी है. पुलिस के मुताबिक इन तीनों के पास से बड़ी संख्या में पुलिस द्वारा लूटे गए हथियार होने की भी संभावना है, जिसकी संख्या 500 से पार भी जा सकती है.

बिहार में नक्सल को समाप्त करने की सोची-समझी रणनीति

एक सोची समझी रणनीति के तहत जिस-जिस इलाके से सरकार नक्सलियों का खात्मा करती जा रही है, वहां जरूरी एवं मूलभूत सुविधाएं भी स्थापित करती जा रही है, जैसे कि गांव में स्कूल, भवन इत्यादि का निर्माण, ग्रामीण सड़क का निर्माण,  प्राइमरी हेल्थ सेंटर चालू करना एवं उस पूरे इलाके में ग्रामीण सड़कों का जाल बिछाना.

216 गिरफ्तारियों के बाद 2016 के मध्य तक ऐसी उम्मीद है कि बिहार पूर्णतः नक्सल मुक्त राज्य घोषित हो जाएगा . और जब तक यह नहीं होता है इन 3 वांछित नक्सलियों की खोज जारी रहेगी और वहीं इनके खाली किए गए इलाके में पुलिस अपना वर्चस्व बनाये रखेगी.
 

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